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वैश्विक लैंगिक समानता सूचकांक 2026 में भारत 131वें स्थान पर

वैश्विक लैंगिक समानता सूचकांक 2026 में भारत 131वें स्थान पर

विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा जारी ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2026 में भारत ने 131वां स्थान बरकरार रखा है। भारत का कुल लैंगिक समानता स्कोर 64.5% रहा। पिछले संस्करण की तुलना में भारत के स्कोर में मामूली सुधार हुआ, लेकिन वैश्विक रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ।

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता की स्थिति को चार प्रमुख क्षेत्रों—आर्थिक भागीदारी एवं अवसर, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य एवं जीवन-उत्तरजीविता तथा राजनीतिक सशक्तीकरण—के आधार पर मापता है। 2026 का संस्करण इस सूचकांक का 20वां संस्करण है।

भारत की लैंगिक समानता में दीर्घकालिक प्रगति

भारत ने 2006 की तुलना में 2026 तक अपने कुल लैंगिक समानता स्कोर में 4.3 प्रतिशत अंकों का सुधार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दीर्घकालिक प्रगति में सबसे महत्वपूर्ण योगदान शैक्षिक उपलब्धि में हुए सुधार का रहा है।

हालांकि, चारों आयामों में प्रगति समान नहीं रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत अधिक रहा, जबकि आर्थिक भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े संकेतकों में लैंगिक अंतर अधिक बना हुआ है।

आर्थिक भागीदारी और अवसर

आर्थिक भागीदारी एवं अवसर के उप-सूचकांक में भारत का लैंगिक समानता स्कोर 41.2% रहा। यह पिछले संस्करण की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है, लेकिन 2013 के भारत के सर्वोच्च स्कोर 44.6% से 3.5 प्रतिशत अंक कम है।

इस क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण सुधार भी दर्ज किए गए हैं। प्रोफेशनल और तकनीकी कर्मचारियों में लैंगिक समानता का स्कोर 2006 के 26.6% से बढ़कर 2026 में 49.9% हो गया है। यानी इस संकेतक में लगभग दो दशकों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

वरिष्ठ पदों पर महिलाओं की भागीदारी

विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधकों की श्रेणी में भारत का लैंगिक समानता स्कोर 2006 की तुलना में 10 प्रतिशत अंक बढ़ा है। हालांकि 2026 में यह अभी भी केवल 13.1% रहा।

यह संकेतक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल रोजगार में महिलाओं की मौजूदगी नहीं, बल्कि निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिकाओं में उनकी भागीदारी को भी दर्शाता है।

श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी

भारत में श्रम बल भागीदारी के क्षेत्र में पिछले दो दशकों में सुधार अपेक्षाकृत सीमित रहा है। 2026 में इस संकेतक का लैंगिक समानता स्कोर 44.1% रहा।

इसका अर्थ यह है कि महिलाओं और पुरुषों की श्रम बाजार में भागीदारी के बीच अंतर अभी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

शिक्षा के क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन

शैक्षिक उपलब्धि भारत के अपेक्षाकृत मजबूत क्षेत्रों में शामिल है। 2026 में इस उप-सूचकांक में भारत का लैंगिक समानता स्कोर 96.6% रहा।

हालांकि यह पिछले वर्ष की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक कम है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से भारत ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। 2006 से अब तक इस क्षेत्र में भारत के स्कोर में 14.7 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है।

भारत ने माध्यमिक और उच्च शिक्षा में नामांकन के मामले में पूर्ण लैंगिक समानता हासिल की है तथा प्राथमिक शिक्षा में भी समानता के करीब है। वयस्क साक्षरता में 2026 का समानता स्कोर 82.5% रहा।

स्वास्थ्य और जीवन-उत्तरजीविता

स्वास्थ्य एवं जीवन-उत्तरजीविता उप-सूचकांक में भारत का स्कोर 2026 में 95.6% रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में सुधार दर्शाता है।

हालांकि, जन्म के समय लिंगानुपात में दीर्घकालिक सुधार की दिशा दिखाई देती है, लेकिन 2026 में यह संकेतक 2006 की तुलना में अभी भी लगभग एक प्रतिशत अंक कम था।

राजनीतिक सशक्तीकरण में भारत की स्थिति

2026 में भारत का सबसे बेहतर स्थान वाला उप-सूचकांक राजनीतिक सशक्तीकरण रहा। इसमें भारत ने लैंगिक अंतर का 24.5% हिस्सा बंद किया और इस उप-सूचकांक में भारत की वैश्विक रैंक 67वीं रही।

हालांकि, राजनीतिक सशक्तीकरण के भीतर अलग-अलग संकेतकों में स्थिति एक जैसी नहीं है।

राष्ट्राध्यक्ष पद से संबंधित संकेतक

रिपोर्ट के अनुसार, 2006 में भारत का राष्ट्राध्यक्ष संकेतक स्कोर 42.9% था। सूचकांक के पहले दशक में यह बढ़कर 72.3% हो गया था। रिपोर्ट इस वृद्धि को सूचकांक में इस्तेमाल की जाने वाली 50-वर्षीय संदर्भ अवधि में भारत में महिला नेतृत्व के लंबे इतिहास से जोड़ती है।

हालांकि, 2021 के बाद इस संकेतक में गिरावट आई और 2026 में इसका स्कोर 40.7% रहा।

संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व

2026 में संसद से संबंधित संकेतक में भारत ने लैंगिक अंतर का 16.1% हिस्सा बंद किया। 2006 के बाद से इसमें कुल 7 प्रतिशत अंकों का सुधार दर्ज किया गया है।

इससे पता चलता है कि राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में दीर्घकालिक सुधार हुआ है, लेकिन पुरुषों और महिलाओं के बीच समान प्रतिनिधित्व का अंतर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

मंत्रिस्तरीय स्तर पर प्रतिनिधित्व

मंत्रिस्तरीय पदों के मामले में भारत का लैंगिक समानता स्कोर 2006 के 3.5% से बढ़कर 2026 में 5.9% हुआ है। इस प्रकार दो दशकों में कुल 2.4 प्रतिशत अंकों का सुधार हुआ।

हालांकि, 2026 का स्कोर 2019 के भारत के सर्वोच्च 30% स्कोर से काफी नीचे है।

वैश्विक स्तर पर लैंगिक समानता की स्थिति

2026 की रिपोर्ट में 145 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। वैश्विक स्तर पर कुल लैंगिक अंतर का 69.2% हिस्सा बंद हुआ है। रिपोर्ट में शामिल 97 अर्थव्यवस्थाओं के लगातार 20-वर्षीय नमूने में यह स्कोर 69.4% रहा।

वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य एवं जीवन-उत्तरजीविता और शैक्षिक उपलब्धि वे दो क्षेत्र हैं जिनमें लैंगिक समानता सबसे अधिक है। इसके विपरीत आर्थिक भागीदारी एवं अवसर तथा विशेष रूप से राजनीतिक सशक्तीकरण में अंतर अधिक बना हुआ है।

भारत की स्थिति का समग्र आकलन

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2026 के आंकड़े भारत में लैंगिक समानता की मिश्रित तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भारत ने उच्च स्तर की समानता हासिल की है तथा 2006 के बाद दीर्घकालिक सुधार भी हुआ है। दूसरी ओर, आर्थिक भागीदारी, श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी और उच्च निर्णयकारी पदों पर प्रतिनिधित्व जैसे क्षेत्रों में लैंगिक अंतर अभी भी स्पष्ट है।

इस प्रकार, भारत का 64.5% का कुल समानता स्कोर यह दर्शाता है कि 2006 के बाद प्रगति हुई है, लेकिन चारों आयामों में समान गति से सुधार नहीं हुआ है। 2026 में भारत की वैश्विक रैंक 131वीं रही।