Skip to content

फार्मेसियों में सीसीटीवी निगरानी का प्रस्ताव

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अनुसूची H, H1 और X के अंतर्गत आने वाली दवाओं की बिक्री एवं वितरण पर नियामकीय निगरानी को मजबूत करना है। इन दवाओं में कई ऐसी दवाएँ शामिल हैं जिनकी बिक्री चिकित्सकीय परामर्श और वैध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर की जानी आवश्यक होती है।

प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य

प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री, अनधिकृत पहुंच और दवाओं के गलत इस्तेमाल से संबंधित चिंताओं को दूर करना है। इसके लिए मेडिकल स्टोर और फार्मेसियों में अनिवार्य सीसीटीवी निगरानी को एक अतिरिक्त नियामकीय सुरक्षा उपाय के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव है।

सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से दवाओं की बिक्री से संबंधित गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। इससे यह पता लगाने में सहायता मिल सकती है कि निर्धारित नियमों के अनुसार ही प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की बिक्री की जा रही है या नहीं।

अनुसूची H, H1 और X की दवाएँ

अनुसूची H में ऐसी दवाएँ शामिल हैं जिनकी बिक्री सामान्यतः पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर की जाती है।

अनुसूची H1 में कुछ ऐसी दवाएँ शामिल हैं जिनके उपयोग और बिक्री पर अतिरिक्त नियंत्रण रखा गया है। इनके दुरुपयोग और विशेष रूप से कुछ दवाओं के अनियंत्रित उपयोग को रोकने के लिए रिकॉर्ड और बिक्री संबंधी नियम लागू होते हैं।

अनुसूची X में ऐसी दवाएँ शामिल हैं जिनकी बिक्री और भंडारण पर अपेक्षाकृत अधिक कड़े नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं।

इसलिए इन श्रेणियों की दवाओं की बिक्री में नियमों का पालन सुनिश्चित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी की भूमिका

फार्मेसियों में सीसीटीवी निगरानी का प्रस्ताव सबसे पहले ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) के स्तर पर विचार-विमर्श के लिए आया। समिति ने इस व्यवस्था से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया।

इसके बाद प्रस्ताव को ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श के लिए भेजा गया।

DTAB की सिफारिश

प्रस्ताव पर विचार करने के बाद DTAB ने इसे मंजूरी देने की सिफारिश की। इसका अर्थ है कि तकनीकी और नियामकीय स्तर पर प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक सिफारिश की गई है।

हालांकि, प्रस्तावित संशोधन को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन और उसके बाद निर्धारित नियामकीय प्रक्रिया का पालन किया जाना होगा।

सीसीटीवी निगरानी से क्या लाभ होंगे?

प्रस्ताव लागू होने पर मेडिकल स्टोर में दवाओं की बिक्री से संबंधित गतिविधियों की निगरानी को मजबूत किया जा सकेगा। इससे विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में सहायता मिलने की उम्मीद है—

  • बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पर नियंत्रण।
  • अनुसूची H, H1 और X की दवाओं की बिक्री की बेहतर निगरानी।
  • दवाओं तक अनधिकृत पहुंच को रोकने में सहायता।
  • मेडिकल स्टोर और फार्मेसियों में जवाबदेही बढ़ाना।
  • नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निगरानी और जांच को आसान बनाना।
  • प्रिस्क्रिप्शन आधारित दवाओं के अनधिकृत वितरण पर अंकुश लगाना।

फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन में पारदर्शिता

सीसीटीवी निगरानी केवल मेडिकल स्टोर के स्तर पर ही नहीं, बल्कि दवाओं की आपूर्ति एवं वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है।

दवाओं के उत्पादन, वितरण और बिक्री की पूरी श्रृंखला में नियामकीय निगरानी मजबूत होने से यह सुनिश्चित करने में सहायता मिल सकती है कि नियंत्रित श्रेणी की दवाएँ निर्धारित नियमों के अनुसार ही अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचें।

सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्व

प्रिस्क्रिप्शन आधारित दवाओं का अनियंत्रित या गलत उपयोग स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए ऐसी दवाओं की बिक्री को नियंत्रित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रस्तावित सीसीटीवी व्यवस्था का उद्देश्य दवा की बिक्री के समय निगरानी बढ़ाना, अनधिकृत बिक्री को रोकना और मौजूदा नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके लागू होने से फार्मेसियों में नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा तंत्र उपलब्ध हो सकता है।