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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार किया

National 📅 October 19, 2026

एल. मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 15 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। एल. मुरुगन ने 13 अक्टूबर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद से उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया।

यह केंद्रीय मंत्रिपरिषद से किसी राज्य मंत्री का तीसरा इस्तीफा था। इससे पहले जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू ने क्रमशः जून और जुलाई में इस्तीफा दिया था। दिए गए विवरण के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा राज्यसभा चुनावों के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद इन दोनों मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था।

एल. मुरुगन का राजनीतिक परिचय

एल. मुरुगन सितंबर 2021 से राज्यसभा के सदस्य हैं। अप्रैल 2024 में वे मध्य प्रदेश से दोबारा राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 में समाप्त होना निर्धारित है।

उन्होंने केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका इस्तीफा केंद्रीय मंत्रिपरिषद की संरचना और मंत्रियों की नियुक्ति एवं पदमुक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

भारत की संघीय कार्यपालिका (Union Executive)

भारतीय संविधान के अंतर्गत संघीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद शामिल होती है। मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देती है।

राष्ट्रपति भारत की संघीय कार्यपालिका के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। हालांकि, संसदीय शासन प्रणाली में राष्ट्रपति सामान्यतः प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निर्वहन करते हैं।

इस व्यवस्था में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद सरकार के प्रशासनिक एवं नीतिगत कार्यों का संचालन करते हैं।

मंत्रिपरिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 और 75 मंत्रिपरिषद की व्यवस्था, नियुक्ति और कार्यप्रणाली से संबंधित प्रमुख प्रावधान हैं।

अनुच्छेद 74(1): इसके अनुसार, राष्ट्रपति की सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद होगी। राष्ट्रपति अपने कार्यों का निर्वहन मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार करेंगे।

अनुच्छेद 75(1): इसके अनुसार, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर करते हैं।

प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद में शामिल होने वाले मंत्रियों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मंत्रियों को उनके पद, जिम्मेदारियां और मंत्रालयों से संबंधित विभागों का आवंटन करते हैं।

मंत्रिपरिषद की संरचना

केंद्र सरकार की मंत्रिपरिषद में विभिन्न स्तरों के मंत्री शामिल होते हैं। उनकी जिम्मेदारियां और पद उनके प्रशासनिक दायित्वों तथा वरिष्ठता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

मंत्रिपरिषद में मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियां शामिल होती हैं:

  • कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister): ये महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नेतृत्व करते हैं और केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठकों में भाग लेते हैं।

  • स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री (Minister of State—Independent Charge): ये किसी मंत्रालय या विभाग का स्वतंत्र रूप से प्रभार संभालते हैं और संबंधित मामलों में प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाते हैं।

  • राज्य मंत्री (Minister of State): ये सामान्यतः कैबिनेट मंत्रियों की सहायता करते हैं और उन्हें सौंपे गए विभागीय कार्यों का निर्वहन करते हैं।

  • उपमंत्री (Deputy Minister): यह मंत्रियों की सहायता करने वाला पद है, जिसका उल्लेख पारंपरिक रूप से मंत्रिपरिषद की श्रेणियों के संदर्भ में किया जाता है।

कैबिनेट मंत्री महत्वपूर्ण मंत्रालयों का संचालन करते हैं और केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य होते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल को मंत्रिपरिषद का एक महत्वपूर्ण आंतरिक निकाय माना जाता है, जो सरकार के प्रमुख नीतिगत निर्णयों में अहम भूमिका निभाता है।

मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की अधिकतम संख्या

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार, प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

यह प्रावधान 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से जोड़ा गया था। इसका उद्देश्य मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित करना और सरकार की संरचना को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

उदाहरण के लिए, यदि लोकसभा में कुल 543 निर्वाचित सीटों के आधार पर गणना की जाए, तो मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 81 होगी। यह सीमा प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों पर लागू होती है।

मंत्रियों की नियुक्ति और शपथ

संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

मंत्री पद का कार्यभार संभालने से पहले राष्ट्रपति उन्हें पद की शपथ और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं। इन शपथों का प्रारूप संविधान की तीसरी अनुसूची में निर्धारित है।

पद की शपथ के माध्यम से मंत्री संविधान के प्रति निष्ठा रखने और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं। गोपनीयता की शपथ के अंतर्गत वे अपने आधिकारिक कार्यों से संबंधित गोपनीय जानकारी की सुरक्षा करने का दायित्व स्वीकार करते हैं।

मंत्रियों का कार्यकाल और पद से हटना

संविधान के अनुच्छेद 75(2) के अनुसार, मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं। संसदीय शासन प्रणाली में इसका अर्थ यह है कि मंत्रियों का पद पर बने रहना संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत होता है और व्यवहार में प्रधानमंत्री की सलाह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

एल. मुरुगन के मामले में राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार किया और उन्हें मंत्रिपरिषद से तत्काल प्रभाव से मुक्त किया।

इसके अतिरिक्त, संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार, यदि कोई मंत्री लगातार छह महीने की अवधि तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता, तो उस अवधि के समाप्त होने पर वह मंत्री पद पर नहीं रह सकता।

यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि मंत्रिपरिषद के सदस्यों का संसद से संवैधानिक संबंध बना रहे।

मंत्रियों के वेतन और भत्ते

संविधान के अनुच्छेद 75(6) के अनुसार, मंत्रियों के वेतन और भत्ते संसद द्वारा समय-समय पर कानून के माध्यम से निर्धारित किए जाते हैं।

इसका उद्देश्य मंत्रियों के वेतन और भत्तों से संबंधित व्यवस्था को कानूनी आधार प्रदान करना है। मंत्रियों को मिलने वाले वेतन और भत्ते उनके आधिकारिक पद और लागू कानूनों के अनुसार निर्धारित होते हैं।

प्रधानमंत्री की मंत्रिपरिषद में भूमिका

प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के प्रमुख होते हैं और उसकी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। वे सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा नीतिगत निर्णयों को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संविधान के अनुच्छेद 78 के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वे संघ के प्रशासन और विधायी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को दें।

प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को ऐसी जानकारी भी उपलब्ध कराते हैं, जिसकी मांग राष्ट्रपति संघ के प्रशासनिक मामलों या विधायी प्रस्तावों के संबंध में कर सकते हैं।

इस प्रकार प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपति के बीच संवैधानिक समन्वय स्थापित करने वाली प्रमुख कड़ी होते हैं।

मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी (Collective Responsibility)

भारतीय संसदीय शासन प्रणाली का एक प्रमुख सिद्धांत मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी है। संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

सामूहिक जिम्मेदारी का अर्थ है कि मंत्रिपरिषद के सभी मंत्री सरकार की नीतियों और प्रमुख निर्णयों के लिए सामूहिक रूप से जवाबदेह होते हैं।

इस सिद्धांत के अंतर्गत:

  • मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य सरकार के प्रमुख नीतिगत निर्णयों के लिए सामूहिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।

  • यदि लोकसभा में सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को पद छोड़ना पड़ता है।

  • यदि कोई मंत्री मंत्रिमंडल के किसी महत्वपूर्ण निर्णय से सहमत नहीं है, तो संसदीय परंपरा के अनुसार उसे निर्णय स्वीकार करना चाहिए या पद से इस्तीफा देना चाहिए।

  • मंत्रियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सरकार की स्वीकृत नीतियों का सार्वजनिक रूप से समर्थन करें।

यह सिद्धांत मंत्रिपरिषद में एकता, अनुशासन और राजनीतिक जवाबदेही बनाए रखने में सहायता करता है।

इस घटनाक्रम का संवैधानिक महत्व

एल. मुरुगन का इस्तीफा और राष्ट्रपति द्वारा उसे स्वीकार किया जाना भारतीय संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपति की भूमिकाओं को स्पष्ट करता है।

प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के गठन और उसके संचालन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मंत्रियों की नियुक्ति और पद से संबंधित औपचारिक कार्य करते हैं।

यह घटनाक्रम विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 75(2), मंत्रियों के कार्यकाल और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

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