भारत में Indian Standard Time (IST) दशकों से देश का आधिकारिक मानक समय रहा है, लेकिन अब तक समय को वजन और माप की तरह स्पष्ट कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं था। Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 का उद्देश्य IST को सरकारी, वाणिज्यिक और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए कानूनी रूप से मान्य एवं बाध्यकारी राष्ट्रीय समय-संदर्भ बनाना है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों की प्रणालियों को ऐसे समय स्रोत से synchronise करना होगा, जिसका समय वैज्ञानिक रूप से IST से traceable हो। इस पहल का व्यापक उद्देश्य “One Nation, One Time” की अवधारणा को लागू करना है, अर्थात पूरे देश में घटनाओं और लेन-देन के लिए एक समान एवं विश्वसनीय समय-संदर्भ सुनिश्चित करना।
IST के वैज्ञानिक रखरखाव की जिम्मेदारी CSIR-National Physical Laboratory (CSIR-NPL) की है। NPL भारत का National Metrology Institute है और देश के वैज्ञानिक मानकों को बनाए रखने के लिए संसद के अधिनियम के तहत अधिकृत संस्था है। NPL लंबे समय से भारतीय मानक समय को बनाए रखने और विभिन्न संस्थानों तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है। अब समय को कानूनी दर्जा मिलने से Legal Metrology Department के पास यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि संबंधित संस्थानों की timing systems IST से उचित रूप से जुड़ी हुई हैं। जिस प्रकार Legal Metrology के अधिकारी पेट्रोल पंप पर मात्रा या किसी दुकान में वजन की शुद्धता की जाँच कर सकते हैं, उसी प्रकार नई व्यवस्था के तहत समय-संबंधी अनुपालन की जाँच के लिए भी व्यवस्था विकसित की जाएगी।
यहाँ “IST से traceable” होने की अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ केवल यह नहीं है कि किसी कंप्यूटर या मोबाइल की घड़ी सही समय दिखा रही है, बल्कि यह है कि उस समय को एक वैज्ञानिक और प्रमाणित श्रृंखला के माध्यम से IST से जोड़ा जा सके। उदाहरण के लिए, किसी कंप्यूटर को NPL के प्रमाणित NTP (Network Time Protocol) server से synchronise किया जाता है, तो उसकी clock का समय IST से traceable हो सकता है। वर्तमान में अलग-अलग संस्थाएँ GPS, विदेशी time servers, निजी data centres या अन्य स्रोतों से समय प्राप्त करती हैं। इन स्रोतों में network delay अथवा अलग-अलग reference clocks के कारण समय में अंतर हो सकता है। “One Nation, One Time” व्यवस्था का उद्देश्य इसी समस्या को समाप्त करके सभी महत्वपूर्ण प्रणालियों को एक common national reference से जोड़ना है।
भारत में इस समय-संरचना को मजबूत करने के लिए Regional Reference Standards Laboratories (RRSLs) की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। पाँच RRSLs अब IST से traceable secondary time scales बनाए रखते हैं। इससे IST को देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचाने की क्षमता बढ़ती है और केवल एक केंद्रीय स्थान पर निर्भरता कम होती है। यह व्यवस्था redundancy, reliability और resilience को मजबूत करती है। साथ ही, ISRO के साथ भी NPL की time-traceability links मौजूद हैं, जिससे अंतरिक्ष और satellite-based applications के लिए अत्यधिक सटीक समय उपलब्ध कराया जा सकता है।
विभिन्न applications के लिए समय की accuracy की आवश्यकता अलग-अलग होती है। सामान्य computer और network applications के लिए NTP उपयोगी है और यह millisecond-level accuracy प्रदान कर सकता है। अधिक precision वाले applications में PTP (Precision Time Protocol) का प्रयोग किया जा सकता है, जो microsecond-level accuracy तक पहुँच सकता है और विशेष रूप से local area networks में उपयोगी है। इससे भी अधिक सटीक समय की आवश्यकता space, defence और अन्य critical applications में होती है। ऐसे मामलों में satellite-based time transfer और advanced optical fibre links का प्रयोग किया जा सकता है। NPL द्वारा ISRO को satellite links के माध्यम से अत्यधिक सटीक समय उपलब्ध कराया जाता है। Dedicated dark fibre optical links के माध्यम से picosecond-level accuracy तक पहुँचना संभव है। इसलिए सभी संस्थाओं के लिए एक जैसी technology आवश्यक नहीं होगी; technology का चुनाव application की accuracy requirement पर निर्भर करेगा।
समय की कानूनी traceability का cybersecurity और digital forensics में भी महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। किसी cyber attack की जाँच करते समय investigators को यह निर्धारित करना पड़ता है कि कौन-सी घटना पहले हुई और कौन-सी बाद में। यदि अलग-अलग servers, CCTV systems, banking systems और digital devices की clocks में अंतर हो, तो घटनाओं का सही sequence निर्धारित करना कठिन हो सकता है। IST से synchronized timestamps होने पर cyber incidents, financial fraud और अन्य अपराधों की जाँच में digital evidence को अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकेगा। इसी प्रकार बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में transactions के accurate timestamps महत्वपूर्ण होते हैं। एक common national time reference transaction records, audit trails और dispute resolution को अधिक विश्वसनीय बना सकता है।
भारत के लिए इसका एक महत्वपूर्ण strategic dimension भी है। वर्तमान में बड़ी संख्या में devices और systems समय के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से GPS पर निर्भर हैं। GPS अमेरिका द्वारा संचालित प्रणाली है और किसी भी विदेशी satellite infrastructure पर अत्यधिक निर्भरता strategic vulnerability पैदा कर सकती है। 1999 के Kargil War के अनुभव ने भारत को स्वतंत्र navigation capability के महत्व का एहसास कराया। इसके बाद भारत ने Indian Regional Navigation Satellite System (IRNSS) विकसित किया, जिसे अब NavIC कहा जाता है। NavIC भारत और आसपास के क्षेत्र में navigation के साथ-साथ precise timing capability भी प्रदान करता है। इसके satellites में atomic clocks होते हैं और इसकी ground infrastructure को IST से traceable बनाया जा सकता है। इस प्रकार NavIC भारत की strategic autonomy और indigenous timing capability को मजबूत करता है।
समय आधुनिक critical infrastructure का भी एक महत्वपूर्ण आधार है। Defence systems, telecommunications, power grids, financial markets, satellite operations, aviation, railways और digital networks जैसी व्यवस्थाओं में accurate synchronization आवश्यक होता है। यदि इन प्रणालियों में समय-संबंधी गंभीर असंगति उत्पन्न हो जाए, तो इसका प्रभाव केवल एक संस्था तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि interconnected systems में व्यापक disruption पैदा कर सकता है। इसलिए IST-based national timing infrastructure भारत की critical infrastructure resilience को मजबूत करने में सहायता कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय timing links में किसी failure या disruption की स्थिति में indigenous timing infrastructure national time scale की continuity बनाए रखने में महत्वपूर्ण होगा।
इन नियमों का सामान्य नागरिक पर तत्काल बहुत अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। अधिकांश नागरिकों के लिए synchronization service providers और technology companies के स्तर पर हो सकता है। यदि service providers IST-traceable time sources का उपयोग करते हैं, तो उपयोगकर्ता के devices को भी अधिक विश्वसनीय समय प्राप्त हो सकता है। हालांकि, businesses और critical organisations को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके systems IST से synchronized हों। कुछ organisations को operational कारणों से दूसरे time zones भी display करने पड़ सकते हैं, जैसे international hotels या space launch facilities, लेकिन national reference के रूप में IST का उपयोग बनाए रखना आवश्यक होगा।
इस पहल के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं। पुराने legacy IT systems को नए timing infrastructure के साथ synchronize करना महँगा और तकनीकी रूप से कठिन हो सकता है। छोटे व्यवसायों के लिए compliance का अतिरिक्त बोझ हो सकता है। Internet-based NTP services network latency से प्रभावित हो सकती हैं, जबकि high-precision satellite और optical systems के लिए महँगा infrastructure चाहिए। इसके अलावा, time servers स्वयं cyber attacks का लक्ष्य बन सकते हैं। इसलिए national timing infrastructure के साथ मजबूत cybersecurity, backup systems और multiple levels of redundancy विकसित करना आवश्यक होगा।
आगे की दिशा में भारत को NPL, RRSLs, ISRO, NavIC, NIC, Legal Metrology Department और private industry के बीच बेहतर coordination स्थापित करना चाहिए। देश को indigenous atomic clocks, primary frequency standards और secure timing technologies के विकास पर निवेश बढ़ाना चाहिए। NavIC को national timing architecture के साथ अधिक व्यापक रूप से integrate किया जा सकता है। साथ ही, organisations को technical standards, compliance guidelines और cybersecurity protocols उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
अंततः, IST को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाना केवल घड़ियों को एक समय पर सेट करने की पहल नहीं है। यह भारत में एक साझा, वैज्ञानिक और विश्वसनीय National Time Infrastructure स्थापित करने का प्रयास है। इसका संबंध Legal Metrology, Digital Governance, Cybersecurity, Financial Systems, Critical Infrastructure, Space Technology और Strategic Autonomy जैसे अनेक क्षेत्रों से है। UPSC के दृष्टिकोण से इसे “One Nation, One Time” से आगे बढ़कर “One National Reference for a Digitally Connected India” की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है।
Source: Indian Express