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केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी गणनाकर्मी बनाने की अनुमति दी

National 📅 October 19, 2026

जनगणना नियम, 1990 में संशोधन

केंद्र सरकार ने जनगणना प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत अब राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन सरकारी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के साथ-साथ सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना के दौरान गणनाकर्मी (Enumerator) नियुक्त कर सकते हैं।

इस संबंध में भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त (Registrar General of India—RGI) मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा राजपत्र अधिसूचना जारी की गई। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन शिक्षकों, लिपिकों, सरकारी अधिकारियों अथवा अन्य व्यक्तियों को जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकते हैं।

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य जनगणना के लिए उपलब्ध मानव संसाधनों का विस्तार करना और गणना से संबंधित कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए अधिक लोगों की सेवाएं लेना है।

किन शिक्षकों और व्यक्तियों को गणनाकर्मी बनाया जा सकता है?

संशोधित नियमों के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के शिक्षण संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों को जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है।

इसमें निम्नलिखित श्रेणियां शामिल हैं:

  • सरकारी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक।

  • स्थानीय निकायों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक।

  • सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक।

  • गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक।

  • सोसायटी और ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक।

  • लिपिक, सरकारी अधिकारी और अन्य उपयुक्त व्यक्ति, जिन्हें संबंधित सरकार द्वारा नियुक्त किया जाए।

इस बदलाव से जनगणना कार्य के लिए उपलब्ध कर्मचारियों का दायरा बढ़ेगा। अब राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अधिक व्यापक स्तर पर गणनाकर्मियों की नियुक्ति कर सकेंगे।

सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों में क्या अंतर है?

इस निर्णय को समझने के लिए सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के बीच अंतर जानना आवश्यक है।

सहायता प्राप्त निजी विद्यालय (Aided Private Schools): ये ऐसे निजी शिक्षण संस्थान होते हैं, जिन्हें सरकार से निर्धारित नियमों के अनुसार वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। इनका संचालन निजी प्रबंधन द्वारा किया जा सकता है, लेकिन इन्हें सरकारी सहायता भी मिलती है।

गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालय (Unaided Private Schools): ये ऐसे निजी शिक्षण संस्थान होते हैं, जो सामान्यतः सरकारी वित्तीय सहायता के बिना संचालित होते हैं। इनके खर्चों की पूर्ति मुख्य रूप से निर्धारित शुल्क और अन्य निजी संसाधनों से होती है।

पहले जनगणना संबंधी ड्यूटी को लेकर इन संस्थानों के शिक्षकों की नियुक्ति पर विभिन्न न्यायालयों में मामले सामने आए थे। नए संशोधन के तहत दोनों प्रकार के निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।

उच्च न्यायालयों के फैसलों की पृष्ठभूमि

देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों ने चल रही जनगणना के दौरान सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी संस्थानों के शिक्षकों को गणनाकर्मी के रूप में नियुक्त किए जाने के मामलों में राहत प्रदान की थी।

ऐसे मामलों के सामने आने से जनगणना के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता और उनकी नियुक्ति के कानूनी आधार से जुड़े प्रश्न महत्वपूर्ण हो गए थे।

इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया है, जिससे निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना अधिकारी नियुक्त करने की व्यवस्था स्पष्ट की जा सके।

हालांकि, संशोधित नियमों का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक निजी शिक्षक को स्वतः जनगणना ड्यूटी पर नियुक्त कर दिया जाएगा। नियुक्ति संबंधित राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन द्वारा लागू नियमों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार की जाएगी। किसी न्यायालय के विशिष्ट आदेश का प्रभाव भी उसके दायरे और संबंधित मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

जनगणना 2027 क्या है?

भारत की जनगणना देश की जनसंख्या और उससे संबंधित सामाजिक, आर्थिक तथा जनसांख्यिकीय विशेषताओं का व्यापक आधिकारिक सर्वेक्षण है। इसे सामान्यतः प्रत्येक दस वर्ष में आयोजित किया जाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से देश में रहने वाले लोगों की संख्या, परिवारों की स्थिति और विभिन्न जनसंख्या संबंधी विशेषताओं की जानकारी एकत्र की जाती है।

वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आयोजित होने वाली आठवीं जनगणना है।

यह जनगणना मूल रूप से वर्ष 2021 में आयोजित की जानी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब जनगणना की प्रक्रिया को दो प्रमुख चरणों में आयोजित करने की व्यवस्था की गई है।

जनगणना 2027 के दो प्रमुख चरण

जनगणना की प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो चरणों में विभाजित किया गया है।

1. मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना (House Listing and Housing Census)

इस चरण में मकानों और आवासीय संरचनाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है। इसका उद्देश्य आवास की उपलब्धता, मकानों की स्थिति और आवासीय सुविधाओं से संबंधित आंकड़े तैयार करना है।

इस चरण में एकत्रित जानकारी से यह समझने में मदद मिलती है कि देश में किस प्रकार के आवास उपलब्ध हैं और लोगों की आवास संबंधी परिस्थितियां कैसी हैं।

2. जनसंख्या गणना (Population Enumeration)

इस चरण में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाती है। इसमें निर्धारित जनगणना प्रश्नावली के अनुसार व्यक्तियों और परिवारों से संबंधित आंकड़े दर्ज किए जाते हैं।

इन आंकड़ों का उपयोग जनसंख्या की संरचना, सामाजिक विशेषताओं और विकास संबंधी आवश्यकताओं को समझने के लिए किया जाता है।

दोनों चरण एक-दूसरे के पूरक हैं। मकान और आवास संबंधी जानकारी के साथ जनसंख्या से संबंधित आंकड़े देश की जनसांख्यिकीय स्थिति की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना आयोजित करने के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।

यह देश की अब तक की सबसे बड़ी जनगणना कवायद मानी जा रही है। इतने बड़े स्तर पर जनगणना आयोजित करने के लिए व्यापक प्रशासनिक तैयारी, कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, डेटा संग्रह और आंकड़ों के प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

जनगणना के दौरान गणनाकर्मी घर-घर जाकर निर्धारित जानकारी एकत्र करते हैं। इसके बाद संबंधित आंकड़ों को व्यवस्थित किया जाता है, ताकि उनका उपयोग सरकारी योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यक्रमों के निर्माण में किया जा सके।

जनगणना में गणनाकर्मियों की भूमिका

गणनाकर्मी जनगणना प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक होते हैं। वे निर्धारित क्षेत्र में जाकर मकानों और व्यक्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र करते हैं तथा निर्धारित प्रश्नावली के अनुसार आंकड़े दर्ज करते हैं।

उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:

  • निर्धारित क्षेत्र में मकानों और परिवारों की पहचान करना।

  • जनगणना प्रश्नावली के अनुसार आवश्यक जानकारी एकत्र करना।

  • दर्ज किए गए आंकड़ों की शुद्धता और पूर्णता पर ध्यान देना।

  • निर्धारित समय-सीमा के भीतर गणना संबंधी कार्य पूरा करना।

  • जनगणना से संबंधित आधिकारिक निर्देशों और गोपनीयता संबंधी नियमों का पालन करना।

शिक्षकों और अन्य उपयुक्त व्यक्तियों को गणनाकर्मी के रूप में नियुक्त करने से प्रशासन को अतिरिक्त मानव संसाधन मिल सकते हैं। हालांकि, इस जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, कार्य-विभाजन और समय-प्रबंधन महत्वपूर्ण होंगे।

जनगणना के आंकड़ों का महत्व

जनगणना से प्राप्त आंकड़े देश की विकास योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।

इनका उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है:

  • शिक्षा: विद्यालयों, शिक्षकों और शैक्षणिक सुविधाओं की आवश्यकता का आकलन करने में।

  • स्वास्थ्य: स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं की योजना बनाने में।

  • आवास: आवासीय सुविधाओं और बुनियादी सेवाओं से संबंधित आवश्यकताओं को समझने में।

  • रोजगार एवं आजीविका: जनसंख्या की विशेषताओं के आधार पर विकास योजनाओं के निर्माण में।

  • स्थानीय प्रशासन: क्षेत्रों में जनसंख्या के वितरण और सार्वजनिक सुविधाओं की जरूरतों का आकलन करने में।

  • नीति निर्माण: केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं तथा संसाधनों के बेहतर नियोजन में।

इसलिए जनगणना का कार्य केवल लोगों की संख्या गिनने तक सीमित नहीं है। यह देश की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को समझने तथा भविष्य की विकास आवश्यकताओं का आकलन करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

इस निर्णय का महत्व

जनगणना नियम, 1990 में संशोधन के माध्यम से निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी गणनाकर्मी नियुक्त करने की अनुमति देना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव है।

इससे राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को जनगणना के लिए उपलब्ध कर्मचारियों का व्यापक आधार मिल सकता है। साथ ही, बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली जनगणना के लिए मानव संसाधनों की व्यवस्था करने में सहायता मिल सकती है।

वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुई जनगणना को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक तैयारी आवश्यक है। ऐसे में गणनाकर्मियों की उपलब्धता, प्रशिक्षण, सही आंकड़ा संग्रह और निर्धारित समय-सीमा का पालन विशेष महत्व रखते हैं।

अंततः, जनगणना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पूरी प्रक्रिया कितनी सटीक, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाती है तथा एकत्रित आंकड़ों का उपयोग देश की विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किस प्रकार किया जाता है।

यह लेख शैक्षणिक एवं सामान्य सूचना के उद्देश्य से, विषयगत जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

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