SAREX-2026 का आयोजन
भारत की समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard—ICG) ने 8 अक्टूबर 2026 को ओडिशा तट के पास 12वाँ राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास SAREX-2026 आयोजित किया। यह अभ्यास राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड (National Maritime Search and Rescue Board—NMSARB) के तत्वावधान में संपन्न हुआ।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्र में दुर्घटनाओं या आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान फँसे लोगों को शीघ्र खोजने और सुरक्षित बचाने की क्षमता को मजबूत करना था। इसमें विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों, सरकारी विभागों, विमानों, हेलीकॉप्टरों और समुद्री जहाजों ने भाग लिया।
यह अभ्यास पारादीप तट से लगभग 45 किलोमीटर दूर समुद्री क्षेत्र में आयोजित किया गया। इसके माध्यम से विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और खोज एवं बचाव अभियानों की तैयारी का परीक्षण किया गया।
SAREX-2026 की थीम
SAREX-2026 की थीम थी — “Leveraging Technology to Strengthen SAR Preparedness and Maritime Safety”, अर्थात् प्रौद्योगिकी के उपयोग से खोज एवं बचाव की तैयारी तथा समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाना।
इस विषय का प्रमुख उद्देश्य समुद्र में संकट की स्थिति में आधुनिक तकनीक का उपयोग करके बचाव अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना है।
समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान समय पर सूचना प्राप्त करना, दुर्घटनास्थल का पता लगाना, बचाव संसाधनों को सही स्थान पर भेजना और विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है।
इसलिए अभ्यास में तकनीक आधारित निगरानी, संचार व्यवस्था, समन्वित कार्रवाई और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया।
समुद्री खोज एवं बचाव (SAR) क्या है?
SAR का पूरा नाम Search and Rescue (खोज एवं बचाव) है। इसका अर्थ समुद्र में संकटग्रस्त व्यक्तियों, लापता जहाजों या दुर्घटनाग्रस्त नौकाओं का पता लगाना और प्रभावित लोगों को सुरक्षित बचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करना है।
समुद्र में जहाजों की दुर्घटना, खराब मौसम, तकनीकी खराबी, आग लगने या नौकाओं के लापता होने जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे समय में बचाव दलों को तेजी से कार्रवाई करनी पड़ती है।
समुद्री खोज एवं बचाव अभियान में सामान्यतः निम्नलिखित कार्य शामिल होते हैं:
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संकट की सूचना प्राप्त करना और उसका आकलन करना।
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दुर्घटनाग्रस्त जहाज या लापता व्यक्तियों का स्थान निर्धारित करना।
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समुद्री जहाजों, विमानों और हेलीकॉप्टरों को बचाव कार्य में लगाना।
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संकटग्रस्त लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाना।
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घायल व्यक्तियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करना।
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संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी संचार और समन्वय बनाए रखना।
SAREX जैसे अभ्यास इन गतिविधियों का पूर्वाभ्यास करने और वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार रहने में सहायता करते हैं।
भारत के समुद्री खोज एवं बचाव ढाँचे का विकास
भारत के समुद्री खोज एवं बचाव तंत्र का विकास अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संस्थागत व्यवस्थाओं के माध्यम से हुआ है।
भारत ने वर्ष 2001 में अंतरराष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभिसमय, 1979 (International Convention on Maritime Search and Rescue, 1979) को स्वीकार किया। इसके बाद वर्ष 2002 में राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड (NMSARB) का गठन किया गया।
इस व्यवस्था का उद्देश्य समुद्र में संकटग्रस्त व्यक्तियों की सहायता के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना और खोज एवं बचाव सेवाओं को व्यवस्थित बनाना है।
राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड इस क्षेत्र में समन्वय और तैयारी को मजबूत करने के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। SAREX जैसे अभ्यास विभिन्न संगठनों की परिचालन क्षमताओं को परखने तथा उनके बीच सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
SAREX-2026 में भाग लेने वाली प्रमुख एजेंसियाँ
इस अभ्यास में समुद्री सुरक्षा, विमानन, नौवहन, मत्स्य पालन, सीमा शुल्क और स्थानीय प्रशासन से संबंधित अनेक संस्थाओं ने भाग लिया।
प्रमुख प्रतिभागी निम्नलिखित थे:
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भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard)
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भारतीय नौसेना (Indian Navy)
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भारतीय वायु सेना (Indian Air Force)
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शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Shipping Corporation of India)
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नौवहन महानिदेशालय (Directorate General of Shipping)
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मत्स्य विभाग से संबंधित प्रतिनिधि
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सीमा शुल्क विभाग (Customs)
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समुद्री पुलिस (Marine Police)
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पारादीप पोर्ट अथॉरिटी (Paradip Port Authority)
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ओडिशा सरकार के संबंधित विभाग
इन संस्थाओं की भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि समुद्री आपातकालीन परिस्थितियों में केवल एक एजेंसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। प्रभावी बचाव अभियान के लिए समुद्री जहाजों, हवाई संसाधनों, स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित संगठनों के बीच समन्वय आवश्यक होता है।
अभ्यास में शामिल जहाज, विमान और हेलीकॉप्टर
SAREX-2026 में बड़े स्तर पर समुद्री और हवाई संसाधनों का उपयोग किया गया। इन संसाधनों की भागीदारी का उद्देश्य विभिन्न परिस्थितियों में खोज एवं बचाव गतिविधियों के संचालन और समन्वय की क्षमता को मजबूत करना था।
अभ्यास में शामिल प्रमुख संसाधन निम्नलिखित थे:
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संसाधन |
संख्या |
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| भारतीय तटरक्षक बल के जहाज | 15 |
| डोर्नियर विमान | 3 |
| एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) | 3 |
| चेतक हेलीकॉप्टर | 1 |
| भारतीय वायु सेना का C-130J विमान | 1 |
| भारतीय वायु सेना का Mi-17 विमान/हेलीकॉप्टर | 1 |
| भारतीय नौसेना के जहाज | 2 |
इनके अतिरिक्त नागरिक संगठनों और राज्य सरकार के विभिन्न संसाधनों ने भी अभ्यास में भाग लिया।
समुद्री जहाजों और हवाई संसाधनों का संयुक्त उपयोग खोज एवं बचाव अभियानों में विशेष महत्त्व रखता है। जहाज समुद्र में बचाव कार्य कर सकते हैं, जबकि विमान और हेलीकॉप्टर व्यापक क्षेत्र में खोज करने तथा संकटग्रस्त स्थान तक शीघ्र पहुँचने में सहायता प्रदान करते हैं।
भारतीय तटरक्षक बल की भूमिका
भारतीय तटरक्षक बल भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। इसका कार्य समुद्री क्षेत्रों में कानूनों के प्रवर्तन, तटीय निगरानी, समुद्री खोज एवं बचाव और समुद्री प्रदूषण से संबंधित घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने सहित विभिन्न जिम्मेदारियों को पूरा करना है।
SAREX-2026 में भारतीय तटरक्षक बल की प्रमुख भूमिका विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर खोज एवं बचाव अभियानों की तैयारी और समन्वय को मजबूत करना थी।
ऐसे अभ्यासों के माध्यम से तटरक्षक बल समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने, संकट की सूचना पर प्रतिक्रिया देने और अन्य एजेंसियों के साथ तालमेल स्थापित करने की क्षमता को बेहतर बना सकता है।
भारत की लंबी तटरेखा और व्यापक समुद्री गतिविधियों को देखते हुए तटरक्षक बल की यह भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
भारतीय नौसेना और वायु सेना की भागीदारी
SAREX-2026 में भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना की भागीदारी ने संयुक्त बचाव अभियानों के महत्त्व को रेखांकित किया।
भारतीय नौसेना के जहाज समुद्र में खोज, सहायता और बचाव संबंधी गतिविधियों में योगदान दे सकते हैं। दूसरी ओर, भारतीय वायु सेना के C-130J और Mi-17 जैसे प्लेटफॉर्म हवाई सहायता प्रदान करने की क्षमता रखते हैं।
समुद्री आपातकाल के दौरान हवाई और समुद्री संसाधनों का संयुक्त उपयोग खोज क्षेत्र को व्यापक बनाने, दुर्घटनास्थल तक पहुँचने और आवश्यक सहायता पहुँचाने में उपयोगी हो सकता है।
इस प्रकार के संयुक्त अभ्यास विभिन्न बलों के बीच संचार, परिचालन प्रक्रियाओं और संसाधनों के समन्वय को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
30 देशों के 32 पर्यवेक्षकों की भागीदारी
SAREX-2026 की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि इसमें 30 देशों के 32 पर्यवेक्षकों ने भाग लिया।
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति समुद्री खोज एवं बचाव के क्षेत्र में सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान के महत्त्व को दर्शाती है।
समुद्र में होने वाली दुर्घटनाएँ हमेशा किसी एक देश की समुद्री सीमा तक सीमित नहीं रहतीं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाज विभिन्न देशों के जलक्षेत्रों और समुद्री क्षेत्रों के निकट से गुजरते हैं। इसलिए समुद्री सुरक्षा और बचाव के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
ऐसे अभ्यासों से विभिन्न देशों को बचाव प्रक्रियाओं, तकनीकी व्यवस्थाओं और आपातकालीन समन्वय से संबंधित अनुभवों को समझने का अवसर मिलता है।
समुद्री सुरक्षा में आधुनिक तकनीक का महत्त्व
आधुनिक तकनीक समुद्री खोज एवं बचाव अभियानों को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में सहायता करती है। समुद्र का विशाल क्षेत्र, बदलता मौसम और दुर्घटनास्थल तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयाँ बचाव अभियानों को चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं।
तकनीक की सहायता से संकट की सूचना का शीघ्र प्रसारण, समुद्री क्षेत्रों की निगरानी और विभिन्न बचाव संसाधनों के बीच समन्वय को बेहतर बनाया जा सकता है।
SAREX-2026 की थीम भी इसी दृष्टिकोण पर केंद्रित थी। तकनीक आधारित तैयारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक आपातकालीन स्थिति में संबंधित एजेंसियाँ उपलब्ध जानकारी और संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर सकें।
हालाँकि, तकनीक के साथ प्रशिक्षित कर्मियों, स्पष्ट जिम्मेदारियों और प्रभावी संचार व्यवस्था का होना भी आवश्यक है। इन सभी घटकों का संयुक्त उपयोग ही बचाव अभियान की सफलता में योगदान देता है।
SAGAR और MAHASAGAR की अवधारणा से संबंध
SAREX-2026 ने भारत की व्यापक समुद्री सहयोग संबंधी दृष्टि के अनुरूप क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के महत्त्व को भी रेखांकित किया।
SAGAR का पूरा नाम Security and Growth for All in the Region है, जिसका अर्थ है—क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास। यह भारत की हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग, सुरक्षा और साझा विकास को बढ़ावा देने वाली दृष्टि से संबंधित है।
MAHASAGAR भारत की व्यापक समुद्री सहभागिता और सहयोग की दृष्टि को आगे बढ़ाने वाली अवधारणा है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग, साझा चुनौतियों का समाधान और समुद्री क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों पर बल दिया जाता है।
समुद्री खोज एवं बचाव जैसे मानवीय कार्य इन अवधारणाओं से संबंधित सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। संकट के समय लोगों की जान बचाने के लिए देशों और एजेंसियों के बीच सहयोग राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
SAREX-2026 का महत्त्व
SAREX-2026 भारत की समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन बचाव तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण अभ्यास है। इसमें बड़ी संख्या में जहाजों, विमानों, हेलीकॉप्टरों और विभिन्न सरकारी तथा नागरिक संस्थाओं की भागीदारी ने संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता को स्पष्ट किया।
इस अभ्यास का प्रमुख महत्त्व निम्नलिखित है:
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समुद्री खोज एवं बचाव अभियानों की तैयारी को मजबूत करना।
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विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना।
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आधुनिक तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
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समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को बेहतर बनाना।
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अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
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समुद्र में संकटग्रस्त लोगों की सुरक्षा के लिए साझा प्रयासों को मजबूत करना।
कुल मिलाकर, SAREX-2026 ने भारत की समुद्री खोज एवं बचाव व्यवस्था में तकनीक, प्रशिक्षण, संयुक्त कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्त्व को रेखांकित किया। इस तरह के अभ्यास वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर तैयारी और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक आधार तैयार करते हैं।