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आतंकवाद से निपटने के लिए BIMSTEC ने दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया

India & World 📅 October 19, 2026

BIMSTEC के गृह मंत्रियों की पहली बैठक

भारत ने 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में BIMSTEC के गृह मंत्रियों की पहली बैठक की मेजबानी की। इस बैठक में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूत करने के लिए सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।

बैठक में BIMSTEC के सदस्य देशों ने दिल्ली घोषणा-पत्र (Delhi Declaration) को मंजूरी दी। इसमें सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले अन्य खतरों से निपटने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक के दौरान BIMSTEC के अंतर्गत सुरक्षा क्षेत्र में किए गए विभिन्न प्रयासों की समीक्षा की गई। साथ ही, उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए भविष्य में क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बनाने की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।

BIMSTEC क्या है?

BIMSTEC का पूरा नाम Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation है। हिंदी में इसे बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल कहा जाता है।

यह बंगाल की खाड़ी के तटीय और आसपास के क्षेत्रों में स्थित सात देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच तकनीकी, आर्थिक और विभिन्न अन्य क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।

BIMSTEC में दक्षिण एशिया के पांच देश—भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और श्रीलंका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश—म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं।

इस संगठन का भौगोलिक महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को आपस में जोड़ता है।

BIMSTEC की स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

BIMSTEC की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा-पत्र (Bangkok Declaration) के माध्यम से हुई थी। शुरुआत में इस संगठन में चार देश—बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे। उस समय इसका नाम BIST-EC था, जिसका अर्थ था Bangladesh, India, Sri Lanka and Thailand Economic Cooperation।

22 दिसंबर 1997 को म्यांमार के शामिल होने के बाद इस संगठन का नाम बदलकर BIMST-EC कर दिया गया। इसके बाद फरवरी 2004 में आयोजित छठी मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान नेपाल और भूटान को भी इसमें शामिल किया गया।

इन दोनों देशों के शामिल होने के बाद संगठन का नाम बदलकर Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (BIMSTEC) कर दिया गया। वर्तमान में इसमें कुल सात सदस्य देश हैं।

BIMSTEC का जनसंख्या और आर्थिक महत्व

BIMSTEC क्षेत्र में लगभग 1.8 अरब लोग रहते हैं, जो विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 22 प्रतिशत है। सदस्य देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 4.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताया गया है।

यह विशाल जनसंख्या और आर्थिक क्षमता BIMSTEC को क्षेत्रीय व्यापार, निवेश, परिवहन, ऊर्जा, पर्यटन और तकनीकी सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच बनाती है।

सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ने से व्यापारिक संपर्क मजबूत करने, आर्थिक विकास को गति देने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार करने के अवसर मिल सकते हैं।

BIMSTEC सचिवालय

BIMSTEC का सचिवालय बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्थित है। सचिवालय संगठन के प्रशासनिक और संस्थागत कार्यों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह सदस्य देशों के बीच संवाद, बैठकों और सहयोग से संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित करने में सहायता करता है।

भारत के लिए BIMSTEC का महत्व

भारत के लिए BIMSTEC विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण मंच है। भारत इस संगठन को अधिक प्रभावी और सक्रिय क्षेत्रीय सहयोग मंच बनाने पर जोर देता रहा है।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के अंतर्गत क्षेत्रीय सहयोग की कई पहलें पाकिस्तान के साथ असहयोग के कारण आगे नहीं बढ़ सकीं। ऐसी परिस्थितियों में BIMSTEC भारत के लिए पड़ोसी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है।

BIMSTEC भारत की विदेश नीति की दो प्रमुख पहलों से भी जुड़ा है:

  • नेबरहुड फर्स्ट नीति (Neighbourhood First Policy): इसके अंतर्गत भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क को प्राथमिकता देता है।

  • एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy): इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत के आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।

BIMSTEC इन दोनों नीतियों को आगे बढ़ाने में सहायक है, क्योंकि यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को एक साझा क्षेत्रीय मंच पर लाता है।

BIMSTEC के अंतर्गत सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

शुरुआत में BIMSTEC के अंतर्गत सहयोग के छह प्रमुख क्षेत्र शामिल थे—व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और मत्स्य पालन। बाद में सहयोग के क्षेत्रों का विस्तार करके इन्हें 14 क्षेत्रों तक पहुंचाया गया।

इन क्षेत्रों में सहयोग का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना, तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करना और क्षेत्रीय चुनौतियों का मिलकर समाधान करना है।

समय के साथ सुरक्षा सहयोग भी इस संगठन के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। आतंकवाद, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच समन्वय आवश्यक है।

दिल्ली घोषणा-पत्र की प्रमुख विशेषताएं

दिल्ली घोषणा-पत्र BIMSTEC के अंतर्गत सुरक्षा सहयोग को दिशा देने वाले प्रमुख सिद्धांतों और प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। इसके माध्यम से सदस्य देशों ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और विकास के लिए आपसी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

घोषणा-पत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने पर विशेष जोर दिया गया।

इसके अतिरिक्त, सदस्य देशों ने सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान, कानूनी सहायता, अपराधियों के प्रत्यर्पण और संबंधित संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने जैसे उपायों को प्राथमिकता दी।

सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण पर जोर

सीमा पार आतंकवाद का अर्थ ऐसी आतंकवादी गतिविधियों से है, जिनका संचालन या समर्थन किसी देश की सीमा के पार से किया जाता है। ऐसी गतिविधियां क्षेत्रीय शांति, राष्ट्रीय सुरक्षा और देशों के बीच विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।

आतंकवाद के वित्तपोषण का अर्थ आतंकवादी संगठनों या उनकी गतिविधियों के लिए धन और अन्य वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है। आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए उनकी वित्तीय सहायता के स्रोतों की पहचान करना और उन्हें रोकना महत्वपूर्ण है।

दिल्ली घोषणा-पत्र में इन दोनों चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही कट्टरपंथ को रोकने और ऐसी गतिविधियों के विरुद्ध समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।

मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और साइबर अपराध

दिल्ली घोषणा-पत्र में मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध को भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियों के रूप में शामिल किया गया है।

मादक पदार्थों की तस्करी से समाज, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, मानव तस्करी लोगों के शोषण और उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी गंभीर समस्या है।

साइबर अपराधों में डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके धोखाधड़ी करना, निजी जानकारी चुराना और अन्य अवैध गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। इन अपराधों का संचालन अक्सर विभिन्न देशों में फैले नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है।

इसलिए इन चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सूचना साझा करना, जांच में सहयोग करना और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

सूचना साझा करना और कानूनी सहयोग

दिल्ली घोषणा-पत्र में सदस्य देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और कानूनी सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।

आतंकवाद और संगठित अपराध से संबंधित मामलों में अपराधियों, संदिग्ध गतिविधियों और आपराधिक नेटवर्क की जानकारी साझा करने से जांच एजेंसियों को सहयोग मिल सकता है।

घोषणा-पत्र में पारस्परिक कानूनी सहायता (Mutual Legal Assistance) और प्रत्यर्पण (Extradition) जैसे उपायों को भी महत्व दिया गया है।

पारस्परिक कानूनी सहायता के माध्यम से एक देश दूसरे देश से जांच, साक्ष्य एकत्र करने और कानूनी प्रक्रियाओं में सहायता प्राप्त कर सकता है। वहीं, प्रत्यर्पण की प्रक्रिया के अंतर्गत संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार किसी आरोपी या अपराधी को मुकदमे अथवा सजा के लिए दूसरे देश को सौंपा जा सकता है।

इसके साथ ही, मौजूदा समझौतों और कार्ययोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया है।

ऑनलाइन घोटालों में फंसे मानव तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा

दिल्ली घोषणा-पत्र में ऑनलाइन घोटालों से जुड़े मामलों में मानव तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है।

कुछ मामलों में लोगों को नौकरी या बेहतर अवसरों का लालच देकर दूसरे स्थानों पर ले जाया जाता है और वहां उनसे जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी गतिविधियां कराई जा सकती हैं। ऐसे मामलों में पीड़ितों की पहचान करना, उन्हें शोषण से मुक्त कराना और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

घोषणा-पत्र में ऐसे पीड़ितों की सुरक्षा पर जोर देना इस बात को रेखांकित करता है कि संगठित अपराध से निपटने के दौरान केवल अपराधों की जांच ही नहीं, बल्कि पीड़ितों के अधिकारों और सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में भारत की भूमिका

दिल्ली घोषणा-पत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने में भारत के नेतृत्व की सराहना की गई। भारत ने BIMSTEC के सदस्य देशों के बीच सुरक्षा संबंधी संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बंगाल की खाड़ी क्षेत्र व्यापार, समुद्री संपर्क और आर्थिक गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सदस्य देशों के बीच विश्वास, सूचना साझा करना और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।

BIMSTEC के माध्यम से भारत और अन्य सदस्य देश आतंकवाद, संगठित अपराध तथा उभरते सुरक्षा खतरों का सामूहिक रूप से सामना करने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।

इस प्रकार दिल्ली घोषणा-पत्र BIMSTEC के सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाना, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्रोत्साहित करना तथा साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी सहयोग विकसित करना है।

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