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निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा की

National 📅 October 19, 2026

17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा SSR

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India—ECI) ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision—SSR) की घोषणा की है।

इन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) पूरा हो चुका है। अब मतदाता सूची को अद्यतन करने, पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और मौजूदा प्रविष्टियों में आवश्यक सुधार करने के लिए SSR की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी।

SSR का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल हों और मतदाता सूची में दर्ज जानकारी सही तथा अद्यतन रहे। इसके अंतर्गत नए मतदाताओं का पंजीकरण, नाम या पते जैसी जानकारी में सुधार और अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाने जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं।

SSR किन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में आयोजित होगा?

निर्वाचन आयोग के अनुसार, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण निम्नलिखित 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में आयोजित किया जाएगा:

  1. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

  2. असम

  3. बिहार

  4. छत्तीसगढ़

  5. गोवा

  6. गुजरात

  7. केरल

  8. लक्षद्वीप

  9. मध्य प्रदेश

  10. मणिपुर

  11. पुडुचेरी

  12. पंजाब

  13. राजस्थान

  14. तमिलनाडु

  15. उत्तर प्रदेश

  16. उत्तराखंड

  17. पश्चिम बंगाल

इन क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण पूरा होने के बाद अब विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के माध्यम से मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) क्या है?

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision—SSR) मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता के रूप में पंजीकृत करना, मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को सुधारना और सूची की शुद्धता बनाए रखना है।

यह प्रक्रिया चुनाव संबंधी कानूनों के अंतर्गत निर्धारित वार्षिक पुनरीक्षण व्यवस्था का हिस्सा है। इसे अक्सर चुनावों से पहले भी आयोजित किया जाता है, ताकि मतदान के समय मतदाता सूची अधिक सटीक और अद्यतन हो।

SSR के अंतर्गत विशेष रूप से उन युवाओं और प्रथम बार मतदान करने वाले नागरिकों पर ध्यान दिया जाता है, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है और मतदाता बनने की पात्रता प्राप्त कर ली है।

इसके अतिरिक्त, जिन मतदाताओं ने अपना निर्वाचन क्षेत्र बदल लिया है, वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना नाम नए निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इस प्रक्रिया में मतदाता सूची में मौजूद गलत प्रविष्टियों, दोहराए गए नामों और मृत व्यक्तियों के नामों की पहचान कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई भी की जाती है।

SSR के प्रमुख उद्देश्य

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का उद्देश्य केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ना नहीं है, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना भी है।

इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • नए मतदाताओं का पंजीकरण: 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना।

  • प्रथम बार मतदान करने वाले युवाओं को जोड़ना: नए मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देना।

  • मतदाता विवरण में सुधार: नाम, पता और अन्य संबंधित प्रविष्टियों में मौजूद त्रुटियों को ठीक करना।

  • निर्वाचन क्षेत्र में परिवर्तन: पात्र मतदाताओं के नए निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकरण की प्रक्रिया को सुगम बनाना।

  • दोहराए गए नामों की पहचान: मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति की अनावश्यक दोहरी प्रविष्टियों को नियमानुसार हटाना।

  • मृत मतदाताओं के नाम हटाना: सत्यापन और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाद मृत व्यक्तियों के नाम सूची से हटाना।

  • मतदाता सूची की शुद्धता: चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सही मतदाता सूची तैयार करना।

SSR की प्रक्रिया के दो प्रमुख चरण

मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो चरणों में विभाजित किया जाता है।

1. पुनरीक्षण-पूर्व गतिविधियां (Pre-revision Activities)

इस चरण में मतदाता सूची को अद्यतन करने की तैयारी की जाती है। निर्वाचन आयोग संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करता है और पुनरीक्षण की समय-सारणी निर्धारित करता है।

इस दौरान मौजूदा मतदाता सूची की समीक्षा, आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां और पुनरीक्षण से संबंधित अन्य प्रारंभिक कार्य किए जा सकते हैं।

इस चरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुनरीक्षण की मुख्य प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सके और संबंधित अधिकारियों तथा मतदाताओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो।

2. पुनरीक्षण गतिविधियां (Revision Activities)

इस चरण में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, विवरण में सुधार करने और पात्रता के अनुसार गलत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाने से संबंधित आवेदन और दावे-आपत्तियां प्राप्त की जाती हैं।

निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इन आवेदनों की जांच की जाती है। इसके बाद प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है, जिस पर निर्धारित अवधि के भीतर दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकती हैं।

इनकी जांच और आवश्यक कार्रवाई के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है।

निर्वाचन आयोग प्रत्येक पुनरीक्षण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करता है, ताकि विभिन्न गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध हो और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जा सके।

मतदाता सूची की मशीन-पठनीय डिजिटल प्रति का मुद्दा

मतदाता सूची की मशीन-पठनीय प्रति उपलब्ध कराना विपक्षी राजनीतिक दलों की प्रमुख मांगों में से एक रहा है।

मशीन-पठनीय सूची ऐसी डिजिटल सूची होती है, जिसके विवरण को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की सहायता से पढ़ना, खोजना और विश्लेषित करना अपेक्षाकृत आसान होता है। इससे मतदाता सूची के आंकड़ों की जांच और विश्लेषण करने में राजनीतिक दलों तथा अन्य संबंधित पक्षों को सुविधा मिल सकती है।

निर्वाचन आयोग ने पहले इस मांग को स्वीकार नहीं किया था। इसके पीछे आंकड़ों में हेरफेर की आशंका और न्यायालयों के आदेशों से संबंधित चिंताओं का उल्लेख किया गया था।

अब इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की गई है।

राजनीतिक दलों को पढ़ने योग्य PDF में मिलेगी मतदाता सूची

निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित बदलाव के अनुसार, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी।

अब प्रारूप और अंतिम मतदाता सूचियां, तस्वीरों के बिना, केवल इमेज PDF के बजाय पढ़ने योग्य PDF प्रारूप (Readable PDF Format) में उपलब्ध कराई जाएंगी।

इमेज PDF में पृष्ठ अक्सर तस्वीर के रूप में होते हैं, इसलिए उनमें दर्ज नाम और विवरण को सीधे खोजना या कॉपी करना कठिन हो सकता है। इसके विपरीत, पढ़ने योग्य PDF में उपलब्ध पाठ को कंप्यूटर द्वारा खोजना और पढ़ना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

यह बदलाव राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की जांच करने, विवरणों का विश्लेषण करने और आवश्यक सुधारों की पहचान करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, पढ़ने योग्य PDF और पूरी तरह मशीन-पठनीय संरचित डेटा में अंतर होता है। इस घोषणा के अंतर्गत उपलब्ध कराए जाने वाले प्रारूप को उसी रूप में समझना चाहिए, जैसा निर्वाचन आयोग ने निर्धारित किया है।

प्रारूप मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की जानकारी

निर्वाचन आयोग के अनुसार, प्रारूप मतदाता सूची के चरण में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को नाम जोड़ने, हटाने और विवरण में संशोधन से संबंधित पूरक सूचियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

इससे राजनीतिक दलों को यह समझने में सहायता मिल सकती है कि पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में किस प्रकार के बदलाव किए जा रहे हैं।

इन पूरक सूचियों के माध्यम से नाम जोड़ने, हटाने और संशोधित करने से संबंधित प्रविष्टियों की जांच करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

यह व्यवस्था मतदाता सूची की निगरानी और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। साथ ही, इससे संबंधित दावे और आपत्तियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रस्तुत करने में भी सुविधा मिल सकती है।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) मतदाता सूची की अधिक विस्तृत जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रिया है।

इसमें मतदाताओं की जानकारी एकत्र करने और उसका सत्यापन करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान मौजूदा मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की जा सकती है और आवश्यक विवरणों की पुष्टि की जाती है।

जानकारी एकत्र करने और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है। इसके बाद निर्धारित समय के भीतर पात्र नागरिकों और अन्य संबंधित पक्षों से दावे तथा आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक जांच करना और पात्र मतदाताओं की सही पहचान सुनिश्चित करना है।

SIR और SSR के बीच अंतर

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR), दोनों का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना है। हालांकि, दोनों की प्रक्रिया और कार्यक्षेत्र में अंतर होता है।

आधार विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
मुख्य उद्देश्य मौजूदा मतदाता सूची को अद्यतन करना मतदाता सूची की व्यापक और गहन समीक्षा करना
प्रक्रिया मौजूदा सूची में आवश्यक बदलाव किए जाते हैं मतदाताओं की जानकारी का विस्तृत सत्यापन और गणना की जाती है
मौजूदा सूची मौजूदा सूची को आधार बनाकर सुधार किए जाते हैं सूची को अधिक व्यापक तरीके से जांचा और पुनरीक्षित किया जाता है
मतदाताओं की भूमिका नाम जोड़ने, सुधार और अन्य दावों के लिए आवेदन किए जा सकते हैं सत्यापन के साथ दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं
प्रमुख गतिविधियां नए मतदाताओं को जोड़ना, विवरण सुधारना और गलत प्रविष्टियां हटाना मतदाता जानकारी का व्यापक सत्यापन और प्रारूप सूची तैयार करना
प्रकृति नियमित अद्यतन की प्रक्रिया अधिक विस्तृत पुनरीक्षण प्रक्रिया

लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता का महत्व

मतदाता सूची किसी भी चुनाव की आधारभूत आवश्यकता है। इसके माध्यम से यह निर्धारित किया जाता है कि कौन-कौन से पात्र नागरिक मतदान कर सकते हैं।

यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल नहीं है, तो उसे मतदान करने में कठिनाई हो सकती है। दूसरी ओर, गलत या दोहराई गई प्रविष्टियां चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं।

इसलिए मतदाता सूची को नियमित रूप से अद्यतन करना आवश्यक है। SSR और SIR जैसी प्रक्रियाएं इस उद्देश्य को पूरा करने में सहायता करती हैं।

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के माध्यम से नए मतदाताओं को जोड़ना, मौजूदा विवरणों में सुधार करना और मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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