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NPCI ने UPI लेनदेन पर MDR लगाने का निर्णय टाला

Business & Economy 📅 October 19, 2026

UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का निर्णय स्थगित

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India—NPCI) ने 13 अक्टूबर को घोषणा की कि ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के निर्णय को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह फैसला त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

NPCI के अनुसार, इस शुल्क को लागू करने की नई तारीख दिवाली के बाद निर्धारित की जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य त्योहारों के दौरान डिजिटल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर किसी संभावित अतिरिक्त वित्तीय दबाव को लेकर उत्पन्न चिंताओं को ध्यान में रखना है।

UPI भारत में डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम है। इसके जरिए लोग अपने बैंक खातों से सीधे दुकानदारों, व्यापारियों और अन्य व्यक्तियों को तत्काल भुगतान कर सकते हैं। इसलिए UPI लेनदेन पर किसी भी प्रकार के शुल्क से संबंधित निर्णय का प्रभाव डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों पर पड़ सकता है।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate—MDR) वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के बदले भुगतान सेवा प्रदाताओं, बैंकों या कार्ड नेटवर्क द्वारा व्यापारियों से लिया जाता है।

जब कोई ग्राहक UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उस भुगतान को संसाधित करने के लिए बैंकिंग और भुगतान प्रणाली के विभिन्न घटकों की सेवाओं का उपयोग किया जाता है। MDR इसी प्रक्रिया से संबंधित शुल्क है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी दुकान पर ग्राहक डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है और उस लेनदेन पर MDR लागू होता है, तो व्यापारी को भुगतान व्यवस्था से संबंधित निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है। इस शुल्क की दर और लागू होने की शर्तें लेनदेन के प्रकार तथा संबंधित नियमों पर निर्भर करती हैं।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि MDR और ग्राहक द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि एक ही चीज नहीं हैं। MDR सामान्यतः व्यापारी पर लगाया जाने वाला शुल्क है। NPCI और वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें।

₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR का प्रस्ताव

सितंबर में NPCI ने ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (Person-to-Merchant—P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने की घोषणा की थी।

P2M लेनदेन का अर्थ है कि कोई व्यक्ति UPI के माध्यम से किसी दुकान, व्यवसाय या अन्य व्यापारी को भुगतान करता है। उदाहरण के लिए, किसी दुकान से सामान खरीदने के बाद QR कोड स्कैन करके भुगतान करना P2M लेनदेन का उदाहरण है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी लेनदेन पर निर्धारित दर से MDR लगाया जाना था। हालांकि, इस निर्णय को त्योहारों के मौसम को देखते हुए स्थगित कर दिया गया है। इसे लागू करने की नई तारीख दिवाली के बाद तय की जाएगी।

वर्ष 2020 में UPI लेनदेन पर MDR शून्य किया गया था

भारत में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 में BHIM-UPI लेनदेन पर MDR शून्य कर दिया गया था।

इसके लिए भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A तथा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269SU में संशोधन किए गए थे।

MDR को शून्य करने का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को अधिक सुलभ बनाना और व्यापारियों को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित करना था। इससे व्यापारियों को UPI के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने पर MDR का अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ता था।

हालांकि, बाद में ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन पर MDR लागू करने का प्रस्ताव सामने आया। इस प्रस्ताव के तहत लेनदेन की राशि और संबंधित क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग शुल्क निर्धारित करने की व्यवस्था बताई गई।

कितने व्यापारी लेनदेन पर MDR का प्रभाव पड़ सकता है?

उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, प्रस्तावित MDR व्यवस्था लगभग 4 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन पर लागू हो सकती है। इसका अर्थ है कि लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन इससे प्रभावित नहीं होंगे।

इसका प्रमुख कारण यह है कि अधिकांश लेनदेन ₹2,000 की निर्धारित सीमा से कम होते हैं या वे छोटे व्यापारियों के लिए लागू शून्य-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं।

हालांकि, यह प्रतिशत उपलब्ध विश्लेषण पर आधारित है। वास्तविक प्रभाव लेनदेन की प्रकृति, लागू नियमों और अंतिम कार्यान्वयन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की सीमा

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है।

इसका उद्देश्य बड़े मूल्य के लेनदेन पर लगने वाले शुल्क को एक निर्धारित सीमा के भीतर रखना है। इस प्रकार, संबंधित शर्तों के अंतर्गत शुल्क की गणना निर्धारित दर के आधार पर की जाएगी, लेकिन वह ₹300 से अधिक नहीं होगा।

आवश्यक सेवाओं और कम लाभ वाले क्षेत्रों के लिए निर्धारित शुल्क

रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी इनपुट जैसे आवश्यक सेवाओं तथा कम लाभ वाले क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था का प्रस्ताव दिया गया है।

इन क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 प्रति लेनदेन का निश्चित MDR लागू किए जाने की बात कही गई है।

इन क्षेत्रों में कई बार लेनदेन की संख्या अधिक होती है, जबकि प्रति लेनदेन लाभ सीमित हो सकता है। इसलिए इन क्षेत्रों के लिए निश्चित शुल्क का प्रावधान रखा गया है, ताकि भुगतान प्रणाली से संबंधित लागत को निर्धारित सीमा में रखा जा सके।

म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति और शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन पर MDR

म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉक ब्रोकरों और डीलरों से संबंधित भुगतान के लिए प्रस्तावित व्यवस्था में 0.02 प्रतिशत MDR निर्धारित किया गया है। इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन होगी।

इसका उद्देश्य इन विशेष वित्तीय लेनदेन के लिए एक अलग शुल्क व्यवस्था निर्धारित करना है। निर्धारित प्रतिशत के आधार पर शुल्क की गणना की जाएगी, लेकिन संबंधित नियमों के अनुसार यह ₹300 से अधिक नहीं होगा।

क्या MDR एक कर है?

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो कोई कर है और न ही ऐसा शुल्क है जिसे सरकार या NPCI स्वयं राजस्व के रूप में एकत्र करता है।

यह शुल्क भुगतान व्यवस्था में शामिल विभिन्न पक्षों, जैसे बैंकों और भुगतान एप्लिकेशन प्रदाताओं, के बीच वितरित किया जाता है। इसका उद्देश्य भुगतान संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करना और साइबर सुरक्षा में निवेश को बढ़ावा देना है।

डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुरक्षित और प्रभावी बनाए रखने के लिए तकनीकी अवसंरचना, डेटा सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम तथा भुगतान नेटवर्क की विश्वसनीयता पर लगातार निवेश की आवश्यकता होती है। MDR से प्राप्त राशि को भुगतान व्यवस्था में शामिल संस्थाओं के बीच वितरित करने का उद्देश्य इन आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करना है।

NPCI क्या है?

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India—NPCI) भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए स्थापित एक प्रमुख संस्था है।

इसकी स्थापना वर्ष 2008 में की गई थी। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (Indian Banks’ Association—IBA) की पहल है तथा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के अंतर्गत स्थापित की गई थी।

NPCI का उद्देश्य भारत में सुरक्षित, प्रभावी और व्यापक भुगतान अवसंरचना विकसित करना है। यह बैंकिंग प्रणाली को भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक दोनों प्रकार के भुगतान तथा निपटान के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

NPCI एक गैर-लाभकारी संस्था है

NPCI को एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की संपूर्ण बैंकिंग प्रणाली के लिए भुगतान और निपटान संबंधी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है।

यह संस्था तकनीक के उपयोग से खुदरा भुगतान प्रणालियों में नवाचार को बढ़ावा देती है। इसका प्रयास भुगतान सेवाओं को अधिक कुशल बनाना, उनकी पहुंच का विस्तार करना और कम लागत पर सुरक्षित भुगतान समाधान उपलब्ध कराना है।

NPCI द्वारा विकसित और संचालित भुगतान प्रणालियां भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से आम नागरिकों, व्यापारियों और वित्तीय संस्थानों को डिजिटल लेनदेन की सुविधा मिलती है।

NPCI की प्रमुख भुगतान प्रणालियां

NPCI भारत में विभिन्न खुदरा भुगतान प्रणालियों के विकास और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनमें प्रमुख हैं:

  • यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): बैंक खातों के बीच तत्काल डिजिटल भुगतान की सुविधा प्रदान करता है।

  • RuPay: भारत की घरेलू कार्ड भुगतान योजना है, जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के कार्ड आधारित भुगतानों में किया जाता है।

  • BHIM: UPI आधारित डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित भुगतान एप्लिकेशन है।

इन प्रणालियों ने डिजिटल भुगतान को अधिक सुलभ बनाने और देश में इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के विस्तार में योगदान दिया है।

NPCI International Payments Limited (NIPL)

NPCI International Payments Limited (NIPL) की स्थापना 3 अप्रैल 2020 को NPCI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में हुई थी।

NIPL का प्रमुख उद्देश्य भारत में विकसित सफल भुगतान प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना है। इसके अंतर्गत UPI और RuPay जैसी भारतीय भुगतान प्रणालियों को भारत के बाहर अपनाने तथा उनके उपयोग का विस्तार करने के लिए काम किया जाता है।

इस पहल से भारतीय भुगतान तकनीक को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने, अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतान संपर्क बढ़ाने और विभिन्न देशों के भुगतान नेटवर्क के बीच सहयोग विकसित करने में सहायता मिल सकती है।

डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए इस निर्णय का महत्व

UPI लेनदेन पर MDR लागू करने के निर्णय को स्थगित करना डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े व्यापारियों और अन्य हितधारकों के लिए महत्वपूर्ण है। त्योहारों के दौरान खरीदारी और भुगतान गतिविधियां बढ़ सकती हैं, इसलिए इस अवधि में शुल्क संबंधी बदलावों को टालने से व्यापारियों को तत्काल अतिरिक्त लागत की चिंता से राहत मिल सकती है।

दूसरी ओर, भुगतान प्रणाली के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और तकनीकी विकास के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता बनी रहती है। इसलिए MDR से संबंधित किसी भी प्रस्ताव में व्यापारियों की लागत, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।

फिलहाल, ₹2,000 से अधिक के UPI व्यापारी लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR को स्थगित किया गया है। इसे लागू करने की नई तारीख दिवाली के बाद निर्धारित की जानी है।

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