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अमेरिका ने आठ आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रायोजन कार्यक्रम से निलंबित किया

India & World 📅 October 11, 2026

अमेरिकी प्रशासन का आठ आईटी कंपनियों के विरुद्ध कदम

अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने की प्रक्रिया से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (Permanent Labor Certification—PERM) के अंतर्गत आठ आईटी कंपनियों को निलंबित करने की घोषणा की है। इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, HCL और कैपजेमिनी के नाम शामिल हैं।

यह घोषणा अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के तहत की गई कार्रवाई के हिस्से के रूप में की।

अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियाँ इस कार्यक्रम का उपयोग अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए कर रही हैं। प्रशासन के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य संभावित धोखाधड़ी को रोकना, अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार हितों की रक्षा करना और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

हालाँकि, इन आरोपों को प्रशासन के दावों के रूप में समझना आवश्यक है। किसी कंपनी को कार्यक्रम से निलंबित किए जाने मात्र से उसके विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाते।

इस निर्णय के पीछे क्या कारण हैं?

अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से कथित धोखाधड़ी, अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर प्रभाव और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित नियमों के संभावित दुरुपयोग को कारण बताया है।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर नियुक्त विदेशी कर्मचारियों के संदर्भ में कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कुछ कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए वीजा व्यवस्था का अत्यधिक उपयोग करने का आरोप लगाया।

प्रशासन का कहना है कि कुछ नियोक्ता PERM कार्यक्रम के माध्यम से अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने और वेतन पर दबाव डालने का प्रयास कर सकते हैं।

यह मुद्दा अमेरिका की आव्रजन नीति, रोजगार संरक्षण और वैश्विक आईटी उद्योग से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी कंपनियाँ लंबे समय से विदेशी कुशल पेशेवरों को तकनीकी और विशेष कौशल वाले पदों पर नियुक्त करती रही हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से स्थानीय कर्मचारियों के वेतन और रोजगार के अवसरों पर अनुचित प्रभाव न पड़े।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट को विशेष रूप से निशाने पर लिया

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी के विरुद्ध कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कंपनियों को श्रम विभाग द्वारा PERM कार्यक्रम से निलंबित किया जा रहा है। उनके अनुसार, इन कंपनियों से संबंधित कई संघीय जाँचें सक्रिय हैं।

वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर इस व्यवस्था का अत्यधिक उपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने वर्ष 2025 में लगभग 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छँटनी की थी और साथ ही यह प्रमाणित किया था कि उसे योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल सके।

वेंस के बयान के अनुसार, इसी अवधि में कंपनी को 6,000 से अधिक H-1B वीजा आवेदनों की स्वीकृति मिली और उसने 3,682 PERM आवेदन भी प्रस्तुत किए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इनमें से लगभग 1,000 आवेदन उन पदों से संबंधित थे, जिन पर पहले अमेरिकी कर्मचारियों को काम से हटाया गया था।

इन आँकड़ों के आधार पर अमेरिकी प्रशासन ने कंपनी की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालाँकि, ये आरोप प्रशासन के बयानों पर आधारित हैं और इनका अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जाँचों तथा प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

PERM कार्यक्रम क्या है?

PERM का पूरा नाम Permanent Labor Certification है, जिसे हिंदी में स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम कहा जाता है। यह अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को रोजगार के आधार पर स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड दिलाने की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण चरण है।

इस कार्यक्रम को 28 मार्च 2005 से लागू किया गया था। इसका उद्देश्य पहले से प्रचलित कागजी प्रक्रिया के कारण होने वाली लंबी देरी को कम करना और श्रम प्रमाणन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना था।

PERM कार्यक्रम के अंतर्गत अमेरिकी नियोक्ता किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से नियुक्त करने के लिए श्रम प्रमाणन का आवेदन प्रस्तुत करता है। अमेरिकी श्रम विभाग (Department of Labor—DOL) यह सुनिश्चित करता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से समान प्रकार के कार्य करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन तथा कार्य परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

यदि श्रम विभाग आवेदन को प्रमाणित कर देता है, तो नियोक्ता आगे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (US Citizenship and Immigration Services—USCIS) के समक्ष विदेशी कर्मचारी के लिए आव्रजन याचिका प्रस्तुत कर सकता है। सामान्यतः इस चरण में I-140 नामक याचिका दाखिल की जाती है।

इस प्रकार, PERM स्वयं ग्रीन कार्ड नहीं है, बल्कि रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण चरण है।

PERM कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य

PERM कार्यक्रम का उद्देश्य विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रोजगार देने की प्रक्रिया में अमेरिकी श्रम बाजार के हितों की रक्षा करना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • यह सुनिश्चित करना कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं हैं।

  • विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और कार्य परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से रोकना।

  • रोजगार-आधारित आव्रजन प्रक्रिया को व्यवस्थित करना।

  • विदेशी कुशल पेशेवरों को अमेरिका में स्थायी रूप से काम करने का अवसर देने के लिए कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध कराना।

  • नियोक्ताओं को नियुक्ति और श्रम प्रमाणन से संबंधित निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए बाध्य करना।

अमेरिकी आईटी कंपनियों और भारतीय पेशेवरों के लिए PERM का महत्त्व

अमेरिका में कई आईटी कंपनियाँ विदेशी कुशल पेशेवरों को अस्थायी कार्य वीजा, विशेषकर H-1B वीजा, के माध्यम से नियुक्त करती हैं। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, डेटा विशेषज्ञ और अन्य तकनीकी पेशेवर शामिल हैं।

कुछ कर्मचारी अस्थायी वीजा पर काम शुरू करने के बाद अपने नियोक्ता के माध्यम से रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं। इस प्रक्रिया में PERM श्रम प्रमाणन एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अमेरिका में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी 70% से अधिक रही है। इस कारण अमेरिकी कार्य वीजा और स्थायी निवास से संबंधित नीतियों में होने वाले बदलाव भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए विशेष महत्त्व रखते हैं।

आठ कंपनियों पर लगाए गए निलंबन के कारण प्रभावित कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास प्राप्त करने की प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ सकती है। अमेरिकी श्रम विभाग ने इन कंपनियों से संबंधित नए PERM आवेदन स्वीकार करने और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर रोक लगाई है।

हालाँकि, PERM कार्यक्रम से निलंबन और H-1B वीजा का निलंबन अलग-अलग विषय हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई का सीधा अर्थ यह नहीं है कि इन कंपनियों के सभी मौजूदा H-1B कर्मचारी तत्काल अपना वीजा या अमेरिका में काम करने का अधिकार खो देंगे। प्रभावित कर्मचारियों की स्थिति उनके मौजूदा आव्रजन दस्तावेजों और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

ग्रीन कार्ड क्या है?

ग्रीन कार्ड को आधिकारिक रूप से Permanent Resident Card यानी स्थायी निवासी कार्ड कहा जाता है। यह अमेरिकी सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला पहचान दस्तावेज है, जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का अधिकार प्रदान करता है।

ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के बाद व्यक्ति को अमेरिका में स्थायी निवासी का दर्जा मिलता है। हालाँकि, यह अमेरिकी नागरिकता के समान नहीं है। स्थायी निवासियों को अमेरिकी कानूनों का पालन करना होता है और उनके कुछ अधिकार तथा दायित्व अमेरिकी नागरिकों से अलग होते हैं।

ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के कई रास्ते हैं। इनमें परिवार-आधारित आव्रजन, रोजगार-आधारित आव्रजन और कुछ अन्य निर्धारित श्रेणियाँ शामिल हैं। रोजगार-आधारित मामलों में कुछ श्रेणियों के लिए नियोक्ता का प्रायोजन और श्रम प्रमाणन आवश्यक होता है।

ग्रीन कार्ड का नाम कैसे पड़ा?

ग्रीन कार्ड नाम की उत्पत्ति अमेरिका में विदेशी नागरिकों के पंजीकरण की ऐतिहासिक व्यवस्था से जुड़ी है।

वर्ष 1940 के एलियन रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत अमेरिका में रहने वाले विदेशी नागरिकों के पंजीकरण और फिंगरप्रिंट लेने की व्यवस्था स्थापित की गई थी। इस कानून के अंतर्गत 14 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन विदेशी नागरिकों को पंजीकरण कराना आवश्यक था, जो अमेरिका में 30 दिन या उससे अधिक समय तक रहते थे। यह नियम उस समय कानूनी और अवैध, दोनों प्रकार की स्थितियों में रहने वाले विदेशी नागरिकों पर लागू होता था।

पंजीकरण के बाद विदेशी नागरिकों को Alien Registration Receipt Card यानी विदेशी नागरिक पंजीकरण रसीद कार्ड जारी किया जाता था। इसका प्रारंभिक प्रपत्र AR-3 था, जिसे बाद में संशोधित करके AR-3A और AR-103 जैसे प्रपत्रों में बदला गया।

वर्ष 1946 में अमेरिकी सरकार ने विदेशी नागरिकों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग प्रकार के पंजीकरण दस्तावेज जारी करना शुरू किया। कानूनी रूप से स्थायी निवास प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को I-151 नामक कार्ड दिया जाता था।

इस कार्ड पर हरे रंग की झलक होती थी। इसी कारण इसे आम बोलचाल में Green Card कहा जाने लगा।

ग्रीन कार्ड के रंग में बदलाव

समय के साथ ग्रीन कार्ड के डिजाइन और रंग में बदलाव किए गए।

  • वर्ष 1940: विदेशी नागरिकों के पंजीकरण और फिंगरप्रिंट लेने की व्यवस्था के लिए एलियन रजिस्ट्रेशन एक्ट लागू किया गया।

  • वर्ष 1946: स्थायी निवासियों के लिए I-151 कार्ड जारी किया जाने लगा, जिस पर हरे रंग की झलक थी।

  • वर्ष 1964: कार्ड का रंग हल्का नीला कर दिया गया।

  • वर्ष 1965: इसके बाद कार्ड का रंग गहरा नीला हो गया।

रंग बदलने के बावजूद अमेरिकी नागरिकों और प्रवासियों के बीच ग्रीन कार्ड नाम लोकप्रिय बना रहा। स्थायी निवास प्राप्त करने वाले लोगों को भी सामान्यतः ग्रीन कार्ड धारक कहा जाने लगा।

इस निर्णय का व्यापक महत्त्व

अमेरिका का यह कदम रोजगार-आधारित आव्रजन नीति, विदेशी कुशल कर्मचारियों की नियुक्ति और घरेलू श्रम बाजार की सुरक्षा से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा है।

एक ओर अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि नियुक्ति संबंधी नियमों का दुरुपयोग रोकना और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना आवश्यक है। दूसरी ओर, वैश्विक आईटी उद्योग में विदेशी पेशेवरों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है और कंपनियाँ तकनीकी कौशल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा पर निर्भर रहती हैं।

इस निलंबन से प्रभावित आठ कंपनियों के उन कर्मचारियों के लिए विशेष अनिश्चितता पैदा हो सकती है, जिनकी स्थायी निवास प्रक्रिया उनके नियोक्ता द्वारा प्रस्तुत PERM आवेदन पर निर्भर है। इसका वास्तविक प्रभाव निलंबन की अवधि, संबंधित आवेदनों की स्थिति और अमेरिकी प्रशासन द्वारा आगे लिए जाने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगा।