Skip to content

जयशंकर ने भारत-एफआईपीआईसी विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की

भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग पर महत्वपूर्ण बैठक

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच यानी FIPIC (Forum for India-Pacific Islands Cooperation) की विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में आयोजित की गई।

इस बैठक में प्रशांत द्वीप देशों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाना तथा पहले से चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा करना था।

FIPIC क्या है?

FIPIC यानी Forum for India-Pacific Islands Cooperation, भारत और प्रशांत क्षेत्र के द्वीप देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए बनाया गया एक बहुपक्षीय मंच है। इसकी स्थापना 2014 में हुई थी।

इस मंच के माध्यम से भारत प्रशांत द्वीप देशों के साथ विकास, क्षमता निर्माण, सामुदायिक विकास और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करता है।

FIPIC में कितने देश शामिल हैं?

FIPIC के अंतर्गत भारत के साथ 14 प्रशांत द्वीप देश सहयोग करते हैं। इनमें शामिल हैं:

  1. कुक द्वीप समूह
  2. फिजी
  3. किरिबाती
  4. मार्शल द्वीप समूह
  5. माइक्रोनेशिया
  6. नाउरू
  7. नीयू
  8. पलाऊ
  9. पापुआ न्यू गिनी
  10. समोआ
  11. सोलोमन द्वीप समूह
  12. टोंगा
  13. तुवालु
  14. वानुअतु

इन देशों का क्षेत्रफल भले ही अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन प्रशांत महासागर में इनके विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) हैं। इसी कारण इन देशों का समुद्री, आर्थिक और रणनीतिक महत्व काफी अधिक है।

दूसरी FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक

वर्तमान बैठक FIPIC के तहत आयोजित दूसरी विदेश मंत्रियों की बैठक थी। बैठक में भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की गई।

मंत्रियों ने FIPIC शिखर सम्मेलनों में लिए गए निर्णयों और उनके परिणामों पर चर्चा की। साथ ही भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का स्वागत किया गया।

12-सूत्रीय कार्ययोजना पर जोर

बैठक में वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 12-सूत्रीय कार्ययोजना के तहत हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई।

इस कार्ययोजना का उद्देश्य भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को बढ़ाना तथा विकास से जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना है। इसके अंतर्गत क्षमता निर्माण और सामुदायिक विकास जैसी पहलों को विशेष महत्व दिया गया है।

प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत का बढ़ता सहयोग

भारत का प्रशांत द्वीप देशों के साथ सहयोग मुख्य रूप से दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) की भावना पर आधारित है। इसके अंतर्गत भारत विकासशील देशों के साथ अपने अनुभव, तकनीकी क्षमता और संसाधनों को साझा करता है।

भारत द्वारा प्रशांत द्वीप देशों में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और सामुदायिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास की क्षमता को मजबूत करना है।

प्रशांत क्षेत्र में FIPIC का रणनीतिक महत्व

FIPIC भारत की विदेश नीति में प्रशांत क्षेत्र के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। भारत का पारंपरिक समुद्री जुड़ाव हिंद महासागर क्षेत्र से रहा है, लेकिन FIPIC के माध्यम से भारत ने प्रशांत क्षेत्र में अपनी भागीदारी को भी मजबूत करने का प्रयास किया है।

प्रशांत द्वीप देशों के पास बड़े समुद्री क्षेत्र और विशाल EEZ होने के कारण वे समुद्री संसाधनों, समुद्री संपर्क और व्यापक क्षेत्रीय सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।

एक्ट ईस्ट नीति से संबंध

प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत का जुड़ाव उसकी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ (Act East Policy) के व्यापक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक्ट ईस्ट नीति के माध्यम से भारत पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया के साथ-साथ व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक, रणनीतिक और विकासात्मक संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान देता है।

FIPIC इसी व्यापक जुड़ाव को प्रशांत द्वीप देशों तक आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

विकास सहायता और क्षमता निर्माण

भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र विकास सहायता है। भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग के तहत इन देशों के साथ विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों में भागीदारी करता है।

इस सहयोग में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और सामुदायिक विकास परियोजनाओं को महत्व दिया जाता है। इस प्रकार भारत का सहयोग केवल कूटनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय विकास और मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करने पर भी केंद्रित है।

भारत-प्रशांत संबंधों के लिए बैठक का महत्व

FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय संवाद को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है। इस प्रकार की बैठकें पहले से चल रही परियोजनाओं की समीक्षा करने, सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने और भविष्य की साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस बैठक में FIPIC शिखर सम्मेलनों के परिणामों की समीक्षा और 2023 की 12-सूत्रीय कार्ययोजना के तहत हुई प्रगति का स्वागत यह दर्शाता है कि भारत प्रशांत द्वीप देशों के साथ अपने संबंधों को निरंतर आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।

यह पहल भारत के व्यापक इंडो-पैसिफिक जुड़ाव, एक्ट ईस्ट नीति और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।