रक्षा मंत्रालय और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के बीच समझौता
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 160 Satellite Smart Anti-Airfield Weapons (SAT-SAAW) की खरीद के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ लगभग 811 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। इस अनुबंध के अंतर्गत SAT-SAAW हथियारों के साथ उनसे संबंधित आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
यह खरीद भारतीय वायुसेना की हवाई युद्ध क्षमता को मजबूत करने तथा लंबी दूरी से दुश्मन के महत्वपूर्ण हवाई ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
SAT-SAAW क्या है?
SAT-SAAW यानी Satellite Smart Anti-Airfield Weapon एक प्रकार का हवा से जमीन पर मार करने वाला सटीक-निर्देशित ग्लाइड बम (Air-to-Ground Precision-Guided Glide Bomb) है।
यह हथियार विमान से छोड़े जाने के बाद लक्ष्य की ओर निर्देशित होकर आगे बढ़ता है। इसकी विशेषता यह है कि इसे अपेक्षाकृत लंबी दूरी से लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
SAT-SAAW को विशेष रूप से दुश्मन के हवाई अड्डों और एयरफील्ड से संबंधित महत्वपूर्ण ठिकानों को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
किन विमानों से SAT-SAAW लॉन्च किया जा सकता है?
SAT-SAAW को भारतीय वायुसेना के विभिन्न लड़ाकू एवं प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। इनमें प्रमुख रूप से जगुआर, हॉक, Su-30 MKI शामिल हैं।
इससे भारतीय वायुसेना को अलग-अलग विमान प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस हथियार का उपयोग करने की क्षमता प्राप्त होती है।
लंबी दूरी से दुश्मन के एयरफील्ड को निशाना बनाने की क्षमता
SAT-SAAW की प्रमुख विशेषताओं में इसकी लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज से लक्ष्य को निशाना बनाने की क्षमता शामिल है।
स्टैंड-ऑफ हथियार का सामान्य अर्थ ऐसे हथियार से है जिसे लॉन्च करने वाला विमान लक्ष्य के बिल्कुल नजदीक जाए बिना अपेक्षाकृत दूरी से हमला कर सकता है। इससे विमान को दुश्मन के लक्ष्य के निकट जाने की आवश्यकता कम होती है।
SAT-SAAW की यह क्षमता दुश्मन के एयरफील्ड को निष्क्रिय करने के लिए भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ा सकती है।
DRDO ने किया स्वदेशी विकास
SAT-SAAW को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
इसका स्वदेशी विकास भारत की रक्षा तकनीक और घरेलू हथियार निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे आधुनिक सटीक-निर्देशित हथियारों के क्षेत्र में देश की स्वदेशी क्षमता को बढ़ावा मिलता है।
हथियार में 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री
SAT-SAAW प्रणाली में लगभग 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) होगी।
इसके अलावा, इस परियोजना में कई महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों के स्वदेशीकरण पर भी जोर दिया गया है। इनमें प्रमुख रूप से Initial Measurement Unit, Long Impact Delay Fuse, Twin Store Carrier शामिल हैं।
इन उप-प्रणालियों का स्वदेशीकरण भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में योगदान देगा।
Initial Measurement Unit का महत्व
SAT-SAAW में Initial Measurement Unit एक महत्वपूर्ण उप-प्रणाली है। यह हथियार की प्रणाली से संबंधित आवश्यक माप एवं प्रारंभिक जानकारी उपलब्ध कराने में भूमिका निभाती है।
इस प्रकार की तकनीकी उप-प्रणालियों का देश में ही विकास और उत्पादन करने से विदेशी तकनीक एवं आयात पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है।
Long Impact Delay Fuse
SAT-SAAW में Long Impact Delay Fuse भी एक महत्वपूर्ण उप-प्रणाली है।
इस प्रकार की फ्यूज प्रणाली हथियार के लक्ष्य से प्रभावित होने के बाद उसके प्रभाव के समय को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। इसके स्वदेशीकरण से हथियार प्रणाली के महत्वपूर्ण घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
Twin Store Carrier का स्वदेशीकरण
SAT-SAAW से संबंधित Twin Store Carrier का भी स्वदेशीकरण किया जाएगा।
इससे हथियार प्रणाली के सहायक उपकरणों के निर्माण में घरेलू तकनीकी क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी और पूरी प्रणाली में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी को मजबूत किया जा सकेगा।
भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि
SAT-SAAW की भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने से उसकी ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
विशेष रूप से लंबी दूरी से दुश्मन के एयरफील्ड को निशाना बनाने की क्षमता वायुसेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे भारतीय वायुसेना को अपने अभियानों को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
रक्षा तैयारियों को मिलेगा मजबूती
160 SAT-SAAW की खरीद भारत की समग्र रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आधुनिक सटीक-निर्देशित हथियारों की उपलब्धता से भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही, स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों को बड़े पैमाने पर शामिल करने से भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
SAT-SAAW की डिलीवरी कब होगी?
SAT-SAAW की डिलीवरी 2027-28 और 2028-29 के दौरान निर्धारित की गई है।
इस अवधि में भारतीय वायुसेना को अनुबंध के तहत 160 हथियार और संबंधित उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा
SAT-SAAW परियोजना में DRDO द्वारा स्वदेशी डिजाइन एवं विकास तथा लगभग 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का प्रावधान भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा को दर्शाता है।
महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों के स्वदेशीकरण से देश में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी तकनीकी विशेषज्ञता, विनिर्माण क्षमता और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को विकसित करने में सहायता मिलेगी।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- हथियार का नाम: Satellite Smart Anti-Airfield Weapon (SAT-SAAW)
- हिंदी अर्थ: सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार
- खरीददार: भारतीय वायुसेना
- अनुबंध करने वाला मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय
- कंपनी: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL)
- अनुबंध की राशि: लगभग 811 करोड़ रुपये
- हथियारों की संख्या: 160
- हथियार का प्रकार: हवा से जमीन पर मार करने वाला सटीक-निर्देशित ग्लाइड बम
- विकासकर्ता: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
- प्रमुख प्लेटफॉर्म: जगुआर, हॉक और Su-30 MKI
- मुख्य क्षमता: लंबी स्टैंड-ऑफ दूरी से दुश्मन के एयरफील्ड को निष्क्रिय करना
- स्वदेशी सामग्री: 60 प्रतिशत
- स्वदेशी किए जाने वाले प्रमुख उप-तंत्र: Initial Measurement Unit, Long Impact Delay Fuse और Twin Store Carrier
- डिलीवरी अवधि: 2027-28 और 2028-29
- मुख्य उद्देश्य: भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करना