गाजा पट्टी में ‘येलो लाइन’ (Yellow Line) उस निर्धारित रेखा को कहा जा रहा है, जिसके पीछे अक्टूबर 2025 में इजरायली सेना ने युद्धविराम समझौते के तहत अपनी तैनाती को सीमित किया था। यह रेखा शुरू में एक अस्थायी सैन्य विभाजन रेखा के रूप में बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य युद्धविराम के दौरान इजरायली सेना की तैनाती वाले क्षेत्र और फिलिस्तीनी आबादी वाले क्षेत्र को अलग करना था। हालांकि, समय के साथ इस रेखा के आसपास सैन्य नियंत्रण और आवाजाही पर प्रतिबंध बढ़ने की वजह से इसका मानवीय और राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।
येलो लाइन कब बनी?
10 अक्टूबर 2025 को इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद इजरायली सेना गाजा के भीतर से पीछे हटकर एक निर्धारित रेखा तक गई। इसी रेखा को बाद में ‘येलो लाइन’ कहा जाने लगा।
युद्धविराम व्यवस्था के शुरुआती चरण में यह रेखा गाजा के लगभग 53 प्रतिशत क्षेत्र के आसपास थी। इसका अर्थ था कि गाजा का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा फिलिस्तीनी आबादी की आवाजाही और मानवीय गतिविधियों के लिए उपलब्ध रह गया, जबकि शेष क्षेत्र इजरायली सैन्य नियंत्रण या कड़े प्रतिबंधों के दायरे में रहा।
योजना के अनुसार यह व्यवस्था स्थायी सीमा नहीं, बल्कि अंतिम इजरायली वापसी तक एक अस्थायी विभाजन के रूप में परिकल्पित की गई थी।
गाजा को दो हिस्सों में बांटती है यह रेखा
येलो लाइन ने व्यवहारिक रूप से गाजा को दो प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित कर दिया है।
पश्चिमी क्षेत्र में गाजा की अधिकांश फिलिस्तीनी आबादी रहती है। यहां विस्थापित लोगों की बड़ी संख्या घनी आबादी वाले इलाकों, क्षतिग्रस्त इमारतों और अस्थायी शिविरों में रह रही है।
दूसरी ओर, पूर्वी क्षेत्र का बड़ा हिस्सा इजरायली सैन्य नियंत्रण अथवा प्रतिबंधित क्षेत्र के रूप में चिह्नित है। इन क्षेत्रों में नागरिकों की आवाजाही, मानवीय संगठनों की पहुंच और कृषि गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। जून 2026 तक संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार पहुंच-प्रतिबंधित क्षेत्र गाजा के लगभग 65 प्रतिशत भूभाग तक फैल चुके थे।
येलो लाइन धीरे-धीरे अंदर की ओर बढ़ी
शुरुआत में येलो लाइन को युद्धविराम के तहत एक निश्चित सैन्य विभाजन के रूप में देखा गया था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र के मानवीय आकलनों के अनुसार, इसके बाद कुछ स्थानों पर प्रतिबंधित क्षेत्र धीरे-धीरे गाजा के अंदर की ओर बढ़े।
कई जगहों पर पीले रंग के कंक्रीट ब्लॉक लगाए गए हैं, जो जमीन पर प्रतिबंधित क्षेत्र की सीमा का संकेत देते हैं। कुछ मामलों में ये ब्लॉक पहले निर्धारित रेखा से भी पश्चिम की ओर लगाए गए। इससे स्थानीय आबादी के लिए यह समझना कठिन हो सकता है कि कौन-सा क्षेत्र सुरक्षित रूप से पहुंच योग्य है और कौन-सा क्षेत्र सैन्य प्रतिबंधों के अधीन है।
‘येलो लाइन’ के पास जाना जोखिमपूर्ण क्यों है?
येलो लाइन केवल जमीन पर खींची गई कोई सामान्य प्रशासनिक सीमा नहीं है। इसके आसपास के कुछ क्षेत्रों को सैन्य रूप से प्रतिबंधित क्षेत्र माना गया है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इन प्रतिबंधों को लागू करने के दौरान इजरायली बलों द्वारा घातक बल के इस्तेमाल की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। 10 अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 की शुरुआत तक, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने येलो लाइन के आसपास इजरायली हमलों में 196 फिलिस्तीनियों की मौत सत्यापित की थी, जिनमें 18 महिलाएं और 43 बच्चे शामिल थे।
इस कारण स्थानीय लोगों के लिए रेखा के पास जाना, उसे पार करना या अपने घरों तथा खेतों तक पहुंचना गंभीर सुरक्षा जोखिम बन गया है।
येलो लाइन के कारण विस्थापन बढ़ा
येलो लाइन के खिसकने या उसके आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ने से कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
कुछ इलाकों में परिवारों ने अपने घरों और पड़ोस को छोड़ने के बजाय वहीं रहने का फैसला किया है, क्योंकि उनके पास जाने के लिए कोई सुरक्षित या पर्याप्त जगह नहीं है। अल-तुफ्फाह और अल-जैतून जैसे पूर्वी गाजा सिटी के इलाकों में कई परिवार येलो लाइन के करीब रह रहे हैं।
इन परिवारों के लिए स्थिति लगातार अनिश्चित बनी हुई है। उन्हें आशंका रहती है कि यदि सैन्य स्थिति बदली या प्रतिबंधित क्षेत्र का विस्तार हुआ तो उन्हें बहुत कम समय में अपना घर छोड़कर फिर से विस्थापित होना पड़ सकता है।
लगभग पूरी आबादी विस्थापन से प्रभावित
गाजा की लगभग पूरी आबादी लंबे समय से युद्ध और विस्थापन से प्रभावित है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, करीब 21 लाख लोग येलो लाइन की सीमा के भीतर उपलब्ध क्षेत्र में विस्थापित होकर रह रहे हैं।
इसका मतलब यह है कि आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा एक ऐसे सीमित भूभाग में रहने को मजबूर है, जहां आवास, पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पहले ही गंभीर रूप से प्रभावित है।
येलो लाइन के विस्तार ने इस समस्या को और जटिल बनाया है, क्योंकि विस्थापित लोगों के लिए उपलब्ध सुरक्षित और रहने योग्य जमीन लगातार कम हो रही है।
विस्थापितों के लिए नए शिविर बनाना मुश्किल
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विस्थापित लोगों के लिए नए और अपेक्षाकृत सुरक्षित शिविर स्थापित करने के लिए उपयुक्त जमीन ढूंढना लगातार कठिन हो रहा है।
गाजा के पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में उपलब्ध कई अपेक्षाकृत उपयुक्त क्षेत्र प्रतिबंधित या सैन्य नियंत्रण वाले इलाकों के भीतर आते हैं। इसलिए वहां बड़े पैमाने पर विस्थापित लोगों को स्थानांतरित करना संभव नहीं है।
इसके परिणामस्वरूप उपलब्ध छोटे क्षेत्रों में आबादी का घनत्व बढ़ता है और शिविरों में रहने की परिस्थितियां और कठिन हो जाती हैं।
आवास संकट कितना गंभीर है?
गाजा में आवास की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। नवीनतम आकलन के अनुसार लगभग 19.8 लाख लोग, यानी गाजा की करीब 94 प्रतिशत आबादी, आवास और गैर-खाद्य वस्तुओं से संबंधित सहायता की जरूरत में है।
इनमें से आधे से अधिक लोग गंभीर या अत्यंत गंभीर आवासीय जरूरतों का सामना कर रहे हैं। लगभग 84 प्रतिशत परिवार ऐसी कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं, जहां उनके आश्रय उन्हें मौसम और अन्य पर्यावरणीय जोखिमों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते।
इसका अर्थ है कि समस्या केवल घरों के नष्ट होने तक सीमित नहीं है। लोगों को तंबू, बिस्तर, कंबल, रसोई सामग्री, स्वच्छता संबंधी सामान और मौसम से बचाव के साधनों की भी आवश्यकता है।
तंबू और अस्थायी आश्रयों की समस्या
गाजा में बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार तंबुओं या क्षतिग्रस्त इमारतों में रह रहे हैं। ऐसे आश्रय तेज गर्मी, बारिश, तेज हवाओं और ठंड से पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाते।
संयुक्त राष्ट्र की सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार, गाजा की लगभग 84 प्रतिशत आबादी अभी भी भीड़भाड़ वाले विस्थापन स्थलों अथवा क्षतिग्रस्त और अपर्याप्त आश्रयों में रह रही है। आगामी सर्दियों को देखते हुए बारिश, बाढ़ और ठंड से बचाव के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।
भोजन और कृषि पर भी प्रभाव
येलो लाइन का प्रभाव केवल आवास और आवाजाही तक सीमित नहीं है। इसका असर कृषि भूमि और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ा है।
गाजा की बड़ी कृषि भूमि ऐसे क्षेत्रों में है जहां पहुंच प्रतिबंधित हो गई है या सैन्य गतिविधियों से प्रभावित हुई है। अगस्त 2026 के संयुक्त राष्ट्र आकलन के अनुसार गाजा की केवल लगभग 3 प्रतिशत कृषि भूमि ऐसी थी जो एक साथ पहुंच योग्य और बिना क्षति के थी।
इसका सीधा प्रभाव स्थानीय खाद्य उत्पादन और किसानों की आजीविका पर पड़ता है।
मानवीय सहायता पहुंचाने में भी बाधा
येलो लाइन और उससे जुड़े प्रतिबंधों ने राहत एजेंसियों के काम को भी कठिन बनाया है। मानवीय संगठनों को कई प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश के लिए पहले से समन्वय और अनुमति की आवश्यकता होती है।
इससे भोजन, पानी, चिकित्सा सामग्री, तंबू और अन्य जरूरी सामान उन लोगों तक पहुंचाने में देरी हो सकती है जिन्हें उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियों के लिए समन्वय की आवश्यकता और सुरक्षा जोखिम राहत कार्यों को प्रभावित करते हैं।
येलो लाइन और ‘ऑरेंज लाइन’ में अंतर
गाजा में येलो लाइन के अलावा ‘ऑरेंज लाइन’ नामक एक अन्य प्रतिबंधित क्षेत्र की रेखा भी इस्तेमाल की गई है।
अक्टूबर 2025 में मानवीय संगठनों को ऑरेंज लाइन का एक अलग मानचित्र उपलब्ध कराया गया था। बाद में मार्च और जून 2026 में इस क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंधों का विस्तार किया गया।
इस व्यवस्था के कारण येलो और ऑरेंज लाइनों के बीच के इलाकों में भी नागरिक आबादी, स्कूल, स्वास्थ्य और जल-सफाई सुविधाएं तथा अन्य मानवीय ढांचे प्रभावित हुए हैं। जून 2026 तक संयुक्त राष्ट्र के आकलन में ऑरेंज लाइन से जुड़े अधिक कड़े नियंत्रण वाले क्षेत्र गाजा के लगभग 64.9 प्रतिशत भूभाग तक पहुंच गए थे।
क्या येलो लाइन स्थायी सीमा है?
नहीं, मूल रूप से इसे स्थायी अंतरराष्ट्रीय या राजनीतिक सीमा के रूप में नहीं बनाया गया था।
अक्टूबर 2025 के युद्धविराम समझौते में इसे इजरायली सेना की अस्थायी तैनाती और वापसी की प्रक्रिया से जुड़ी रेखा के रूप में देखा गया था। उद्देश्य था कि युद्धविराम के दौरान इजरायली सेना एक निर्धारित क्षेत्र तक पीछे रहे और आगे की प्रक्रिया में पूर्ण वापसी तथा अन्य राजनीतिक-सुरक्षा व्यवस्थाओं पर काम किया जाए।
हालांकि, जमीन पर सैन्य चौकियों, प्रतिबंधित क्षेत्रों, कंक्रीट ब्लॉकों और सुरक्षा व्यवस्थाओं के विस्तार ने इस रेखा को व्यवहार में अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
येलो लाइन का मानवीय महत्व
येलो लाइन को समझने के लिए इसे केवल नक्शे पर बनी एक रेखा के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इसका असर इस बात पर पड़ता है कि गाजा में रहने वाले लोग कहां जा सकते हैं, कहां रह सकते हैं, अपने घर या खेत तक पहुंच सकते हैं या नहीं और मानवीय सहायता उन तक कितनी आसानी से पहुंच सकती है।
जब रहने योग्य क्षेत्र छोटा होता जाता है और विस्थापित आबादी उसी सीमित क्षेत्र में केंद्रित होती जाती है, तो भीड़भाड़, आवास संकट, पानी की कमी, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और मानवीय सहायता की जरूरत बढ़ती जाती है।
वर्तमान स्थिति को कैसे समझें?
सितंबर 2026 तक उपलब्ध संयुक्त राष्ट्र के आकलनों से तस्वीर यह बनती है कि येलो लाइन मूल रूप से एक अस्थायी युद्धविराम व्यवस्था का हिस्सा थी, लेकिन इसके आसपास सैन्य नियंत्रण और पहुंच प्रतिबंधों के विस्तार ने इसे गाजा के नागरिक जीवन को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण वास्तविकता बना दिया है।
इसके कारण तीन प्रमुख प्रभाव दिखाई देते हैं:
- नागरिकों के लिए उपलब्ध भूभाग में कमी
- विस्थापित आबादी का सीमित क्षेत्रों में बढ़ता दबाव
- आवास, पानी, भोजन, स्वास्थ्य और मानवीय सहायता की जरूरतों में वृद्धि
इसलिए गाजा में ‘येलो लाइन’ केवल एक सैन्य विभाजन रेखा नहीं, बल्कि आवाजाही, विस्थापन, मानवीय सहायता और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है।