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ओडिशा में मनाया गया नुआखाई पर्व

ओडिशा में 15 सितंबर 2026 को प्रमुख कृषि एवं लोकपर्व नुआखाई पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। यह पर्व विशेष रूप से पश्चिमी ओडिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसका संबंध नई फसल, कृषि, प्रकृति तथा सामुदायिक एकता से है। नुआखाई किसानों की मेहनत और नई उपज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नुआखाई को किसानों, फसल और एकजुटता की भावना का पर्व बताते हुए शुभकामनाएं दीं।

नुआखाई का अर्थ

‘नुआखाई’ शब्द ओडिया भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘नुआ’, जिसका अर्थ है ‘नया’, और ‘खाई’, जिसका अर्थ है ‘खाना’ या ‘भोजन करना’। इस प्रकार नुआखाई का शाब्दिक अर्थ ‘नई फसल का भोजन करना’ है।

इस पर्व में खेतों से प्राप्त नई उपज, विशेषकर नए चावल को सबसे पहले देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। इसके बाद परिवार के सदस्य प्रसाद के रूप में नई फसल का सेवन करते हैं।

पश्चिमी ओडिशा में विशेष महत्व

नुआखाई मुख्य रूप से ओडिशा के पश्चिमी और पश्चिम-मध्य क्षेत्रों में मनाया जाता है। संबलपुर, बरगढ़, झारसुगुड़ा, बलांगीर, कालाहांडी, नुआपाड़ा, नबरंगपुर, देवगढ़ और सुंदरगढ़ जिलों में इसका विशेष महत्व है। इसके अलावा बौध और अंगुल के कुछ क्षेत्रों में भी यह पर्व मनाया जाता है।

पश्चिमी ओडिशा में नुआखाई केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की कृषि-आधारित जीवनशैली और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अच्छी फसल के लिए कृतज्ञता का पर्व

नुआखाई को पारंपरिक रूप से अच्छी फसल, पर्याप्त वर्षा और कृषि के लिए अनुकूल मौसम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले पर्व के रूप में मनाया जाता है।

किसान पूरे वर्ष खेतों में मेहनत करते हैं। नई फसल तैयार होने के बाद उसका पहला अंश देवी-देवताओं को समर्पित किया जाता है। इस परंपरा में प्रकृति, कृषि और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध को महत्व दिया जाता है।

नई फसल और ‘नवान्न’ की परंपरा

नुआखाई के अवसर पर खेतों से प्राप्त नई फसल के चावल तथा अन्य खाद्य पदार्थों को परिवार के आराध्य या कुलदेवता को अर्पित किया जाता है। संबलपुर में विशेष रूप से मां समलेश्वरी को नवान्न अर्पित करने की परंपरा महत्वपूर्ण है। नवान्न अर्पित करने के बाद लोग देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

इसके बाद परिवार के सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह परंपरा नई फसल के उपयोग से पहले उसे ईश्वर को समर्पित करने और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है।

पारिवारिक और सामाजिक एकता

नुआखाई का महत्व केवल कृषि और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह परिवार और समाज को जोड़ने वाला पर्व भी है।

अनुष्ठान के बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ भोजन करते हैं। लोग अपने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों से मिलते हैं तथा एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। परिवार के छोटे सदस्य अपने बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी नुआखाई को केवल एक पारंपरिक त्योहार न मानकर सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने वाला पर्व बताया है।

‘नुआखाई जुहार’ और ‘नुआखाई भेटघाट’

नुआखाई के अवसर पर लोगों द्वारा एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने और बड़ों का आशीर्वाद लेने की परंपरा को ‘नुआखाई जुहार’ कहा जाता है।

शाम के समय सामाजिक संगठनों और सामुदायिक समूहों द्वारा ‘नुआखाई भेटघाट’ कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, शुभकामनाएं देते हैं और सामूहिक रूप से पर्व की खुशियां साझा करते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मनाया नुआखाई

ओडिशा से संबंध रखने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी नुआखाई के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं।

15 सितंबर 2026 को उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नुआखाई जुहार के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया। राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, इस कार्यक्रम में ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में ओडिशा की लोक एवं शास्त्रीय कलाएं

राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में ओडिशा की विभिन्न शास्त्रीय और लोक नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियां दी गईं।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से—

  • ओडिसी
  • घुमुरा
  • ढेमसा
  • लांजिया सौरा
  • संबलपुरी

जैसी नृत्य एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत किया गया।

इन प्रस्तुतियों के माध्यम से ओडिशा की विविध सांस्कृतिक विरासत और विशेष रूप से पश्चिमी ओडिशा की लोक परंपराओं को प्रदर्शित किया गया।

कृषि और प्रकृति से जुड़ा पर्व

नुआखाई का मूल आधार कृषि है। ओडिशा के ग्रामीण समाज में कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

नई फसल को सबसे पहले देवी-देवताओं को अर्पित करना इस बात का प्रतीक है कि कृषि उत्पादन में भूमि, जल, वर्षा, प्रकृति और किसान के श्रम सभी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इस दृष्टि से नुआखाई किसानों के परिश्रम का सम्मान करने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला पर्व है।

गांवों और शहरों में सांस्कृतिक आयोजन

नुआखाई के अवसर पर ओडिशा के विभिन्न गांवों और कस्बों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोक नृत्य, संगीत, सामुदायिक मिलन और पारंपरिक गतिविधियां इस पर्व को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान करती हैं।

विशेष रूप से शाम के समय आयोजित नुआखाई भेटघाट कार्यक्रम लोगों को एक साथ आने और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर देते हैं।

नुआखाई का सांस्कृतिक महत्व

नुआखाई ओडिशा की लोक संस्कृति में कृषि, परिवार, समुदाय और प्रकृति के बीच संबंध को दर्शाता है। यह नई फसल के स्वागत के साथ-साथ लोगों के बीच आपसी सद्भाव, सहयोग और भाईचारे को मजबूत करने का अवसर है।

इस पर्व की विशेषता यह है कि इसमें धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ पारिवारिक मिलन, सामुदायिक भोजन और लोक संस्कृति का भी महत्वपूर्ण स्थान है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • नुआखाई कब मनाया गया? — 15 सितंबर 2026
  • नुआखाई किस राज्य का प्रमुख कृषि पर्व है? — ओडिशा
  • नुआखाई का प्रमुख क्षेत्र — पश्चिमी ओडिशा
  • ‘नुआ’ का अर्थ — नया
  • ‘खाई’ का अर्थ — खाना/भोजन करना
  • नुआखाई का संबंध — नई फसल और कृषि से
  • नई फसल का पहला अंश — देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है
  • संबलपुर की प्रमुख देवी — मां समलेश्वरी
  • नुआखाई जुहार — बड़ों का आशीर्वाद लेने और शुभकामनाएं देने की परंपरा
  • नुआखाई भेटघाट — सामुदायिक मिलन एवं शुभकामना कार्यक्रम
  • राष्ट्रपति भवन में नुआखाई कार्यक्रम — 15 सितंबर 2026
  • कार्यक्रम का स्थान — राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली
  • प्रमुख सांस्कृतिक प्रस्तुतियां — ओडिसी, घुमुरा, ढेमसा, लांजिया सौरा और संबलपुरी
  • नुआखाई का मूल संदेश — नई फसल, किसान, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता तथा सामाजिक एकता