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गांधीनगर में विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 का आयोजन

गुजरात की राजधानी गांधीनगर में 15 सितंबर 2026 को 10वें विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (World Circular Economy Forum—WCEF 2026) का उद्घाटन किया गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने संयुक्त रूप से इस फोरम का उद्घाटन किया।

WCEF 2026 का मुख्य उद्देश्य भारत द्वारा सर्कुलर इकोनॉमी (परिपत्र अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना तथा विभिन्न देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है।

WCEF 2026 की थीम

विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 की थीम है—

“Circular Economy: Transition for People and Prosperity”

हिंदी में इसका अर्थ है—

“परिपत्र अर्थव्यवस्था: लोगों और समृद्धि के लिए संक्रमण”

यह थीम इस बात पर केंद्रित है कि आर्थिक विकास को इस प्रकार आगे बढ़ाया जाए, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन कम हो, अपशिष्ट को संसाधन में बदला जाए और विकास का लाभ समाज तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।

WCEF 2026 का उद्देश्य

WCEF 2026 का प्रमुख उद्देश्य भारत की उन पहलों और नीतियों को प्रदर्शित करना है, जो सर्कुलैरिटी (Circularity) को बढ़ावा देती हैं।

इसके साथ ही यह फोरम विभिन्न देशों, संस्थानों, उद्योगों और विशेषज्ञों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराता है।

फोरम के माध्यम से विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है—

  • संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना।
  • अपशिष्ट को दोबारा आर्थिक गतिविधियों में शामिल करना।
  • पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना।
  • सर्कुलर इकोनॉमी के लिए निवेश और वित्तीय संसाधन जुटाना।
  • नई तकनीकों और नवाचारों को प्रोत्साहित करना।
  • वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना।

WCEF 2026 का आयोजन कौन कर रहा है?

WCEF 2026 का आयोजन कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है।

प्रमुख आयोजक हैं—

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)
  • Finnish Innovation Fund Sitra
  • फिनलैंड सरकार
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC)
  • गुजरात सरकार
  • गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB)

इस प्रकार यह आयोजन भारत और फिनलैंड के बीच पर्यावरणीय एवं सर्कुलर इकोनॉमी सहयोग को भी दर्शाता है।

65 देशों के 2,000 से अधिक प्रतिभागी

WCEF 2026 में 65 देशों के 2,000 से अधिक हितधारकों (Stakeholders) के भाग लेने की बात कही गई है।

इनमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हैं, जैसे—

  • उद्योग जगत के नेता
  • उद्यमी
  • नवोन्मेषक
  • शोधकर्ता
  • नीति-निर्माता
  • शिक्षाविद
  • सामाजिक एवं पर्यावरणीय परिवर्तन के लिए कार्य करने वाले लोग
  • अन्य विशेषज्ञ

इस व्यापक भागीदारी से सर्कुलर इकोनॉमी को केवल पर्यावरणीय मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखने में मदद मिलती है।

वैश्विक सहयोग और Global South

फोरम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना और Global South के साथ अधिक सहभागिता स्थापित करना है।

विकासशील देशों के सामने संसाधनों की कमी, बढ़ता शहरीकरण, औद्योगिक अपशिष्ट और जलवायु परिवर्तन जैसी कई चुनौतियां हैं। सर्कुलर इकोनॉमी के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग करके इन चुनौतियों को कम करने के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

सर्कुलर फाइनेंस और निजी निवेश

सर्कुलर इकोनॉमी के लिए केवल सरकारी नीतियां पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए निजी क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों और निवेशकों की भागीदारी भी आवश्यक है।

WCEF 2026 का उद्देश्य Circular Finance को बढ़ावा देना और निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करना भी है।

सर्कुलर व्यवसाय मॉडल में कंपनियां उत्पादों को बेचने के साथ-साथ रीयूज़, रिपेयर, रिफर्बिशमेंट, रिसाइक्लिंग और रिसोर्स रिकवरी जैसी गतिविधियों से भी आर्थिक मूल्य उत्पन्न कर सकती हैं।

नीति संवाद और क्षेत्रीय साझेदारी

फोरम में विभिन्न क्षेत्रों के बीच Policy Dialogue और Cross-sectoral Partnerships को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सर्कुलर इकोनॉमी के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार, उद्योग, शोध संस्थान, स्टार्टअप, स्थानीय निकाय और नागरिक समाज के बीच समन्वय आवश्यक है।

इसलिए WCEF जैसे मंचों पर नीतियों, तकनीकी समाधानों और व्यावसायिक मॉडलों को एक साथ लाने पर जोर दिया जाता है।

नवाचार, डिजिटलाइजेशन और तकनीक

सर्कुलर इकोनॉमी को आगे बढ़ाने में Innovation, Digitalisation और Technology की महत्वपूर्ण भूमिका है।

डिजिटल तकनीकों की मदद से उत्पादों और सामग्रियों की पूरी आपूर्ति शृंखला पर नजर रखना, संसाधनों की बर्बादी कम करना और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की पहचान करना आसान हो सकता है।

नई तकनीकें उद्योगों को कम संसाधनों में अधिक उत्पादन करने तथा अपशिष्ट को दोबारा उपयोगी सामग्री में बदलने में भी सहायता कर सकती हैं।

सर्कुलर इकोनॉमी क्या है?

Circular Economy (परिपत्र अर्थव्यवस्था) ऐसी आर्थिक व्यवस्था है, जिसमें उत्पादों और संसाधनों को इस्तेमाल करने के बाद फेंकने के बजाय जितना संभव हो उतना लंबे समय तक अर्थव्यवस्था में उपयोगी बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।

इसका मूल विचार है—

Reduce → Reuse → Repair → Refurbish → Recycle

अर्थात संसाधनों का उपयोग कम करना, वस्तुओं का पुन: उपयोग करना, उनकी मरम्मत करना, उनका नवीनीकरण करना और अंत में उनका पुनर्चक्रण करना।

पारंपरिक Linear Economy से अंतर

पारंपरिक अर्थव्यवस्था को सामान्यतः Linear Economy कहा जाता है। इसमें संसाधनों का एक सीधा चक्र होता है—

Take → Make → Consume → Throw Away

अर्थात—

संसाधन निकालो → उत्पाद बनाओ → उपभोग करो → फेंक दो।

इस मॉडल में बड़ी मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है और उत्पाद के जीवनकाल के अंत में वह अक्सर अपशिष्ट बन जाता है।

इसके विपरीत, सर्कुलर इकोनॉमी में उत्पाद और उसमें मौजूद सामग्री को दोबारा आर्थिक गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया जाता है।

सर्कुलर इकोनॉमी का मूल सिद्धांत

सर्कुलर इकोनॉमी का लक्ष्य केवल कचरे का पुनर्चक्रण करना नहीं है, बल्कि पूरे उत्पाद जीवन-चक्र को पुनः डिजाइन करना है।

इसमें उत्पादों और सेवाओं को इस प्रकार डिजाइन किया जाता है कि—

  • उनमें कम संसाधनों का इस्तेमाल हो।
  • उनका जीवनकाल अधिक हो।
  • उनकी मरम्मत आसानी से की जा सके।
  • उनका पुन: उपयोग किया जा सके।
  • उनके घटकों को अलग करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।
  • उपयोग के बाद सामग्री को रिसाइकिल किया जा सके।

Waste को Resource में बदलना

सर्कुलर इकोनॉमी में Waste-to-Wealth की अवधारणा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

इसका अर्थ है कि जिस वस्तु को सामान्य Linear Economy में कचरा माना जाता है, उसे सर्कुलर मॉडल में आर्थिक मूल्य वाले संसाधन के रूप में देखा जाता है।

उदाहरण के लिए—

  • पुराने कपड़ों से नए वस्त्र या अन्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं।
  • Scrap Metal को दोबारा औद्योगिक उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से उपयोगी धातुओं और अन्य सामग्रियों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • जैविक कचरे से खाद या ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।

इस प्रकार अपशिष्ट को अर्थव्यवस्था में पुनः शामिल किया जाता है।

Reuse, Repair और Refurbishment का महत्व

सर्कुलर इकोनॉमी में किसी उत्पाद को खराब होने के बाद तुरंत फेंकने के बजाय उसका Repair और Refurbishment किया जाता है।

Reuse का अर्थ है किसी वस्तु का दोबारा उपयोग करना।

Repair का अर्थ है खराब वस्तु की मरम्मत करके उसके उपयोगी जीवन को बढ़ाना।

Refurbishment का अर्थ है पुराने उत्पाद को सुधारकर उसे दोबारा उपयोग के योग्य बनाना।

इन प्रक्रियाओं से नए उत्पाद बनाने के लिए आवश्यक कच्चे माल की मांग कम हो सकती है।

Recycling की भूमिका

जब किसी उत्पाद का दोबारा उपयोग या मरम्मत संभव नहीं होती, तब उसके उपयोगी घटकों और सामग्रियों को Recycling के माध्यम से पुनः प्राप्त किया जा सकता है।

इससे सामग्री अर्थव्यवस्था से बाहर जाकर कचरा बनने के बजाय फिर से उत्पादन प्रक्रिया में प्रवेश कर सकती है।

इस प्रकार सर्कुलर इकोनॉमी में Recycling महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल Recycling तक सीमित नहीं है; Reduce, Reuse, Repair और Refurbish भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण

सर्कुलर इकोनॉमी प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने में मदद कर सकती है।

यदि किसी उत्पाद की सामग्री को बार-बार उपयोग किया जाए, तो नए कच्चे माल के निष्कर्षण की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे संसाधनों की बचत, अपशिष्ट में कमी और पर्यावरणीय दबाव को कम करने में सहायता मिल सकती है।

यह मॉडल जलवायु परिवर्तन से निपटने के व्यापक प्रयासों के साथ भी जुड़ा हुआ है क्योंकि उत्पादन और उपभोग की अधिक संसाधन-कुशल व्यवस्था विकसित करने से पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के अवसर पैदा होते हैं।

सर्कुलर इकोनॉमी और रोजगार

सर्कुलर इकोनॉमी केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे नए आर्थिक क्षेत्र और रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

Repair, refurbishment, recycling, waste management, resource recovery, sustainable product design और नई पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में नए व्यवसाय और रोजगार उत्पन्न हो सकते हैं।

इस प्रकार सर्कुलर इकोनॉमी पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास करती है।

भारत के लिए WCEF 2026 का महत्व

भारत जैसे विशाल और तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए संसाधनों का कुशल उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और उपभोग के कारण विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट की मात्रा बढ़ रही है। ऐसे में सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल अपनाकर कचरे को आर्थिक संसाधन में बदलने, संसाधनों की दक्षता बढ़ाने और टिकाऊ उत्पादन एवं उपभोग को प्रोत्साहित करने के अवसर मिलते हैं।

गांधीनगर में WCEF 2026 का आयोजन भारत को Circularity और Waste-to-Wealth से जुड़े वैश्विक विमर्श में अपनी पहल और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करता है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

तथ्य जानकारी
फोरम World Circular Economy Forum 2026
संक्षिप्त नाम WCEF 2026
संस्करण 10वां
स्थान गांधीनगर, गुजरात
उद्घाटन तिथि 15 सितंबर 2026
थीम Circular Economy: Transition for People and Prosperity
प्रमुख भारतीय संस्थाएं CPCB, MoEF&CC, गुजरात सरकार, GPCB
अंतरराष्ट्रीय साझेदार Finnish Innovation Fund Sitra, फिनलैंड सरकार
प्रतिभागिता 65 देशों से 2,000+ हितधारक
मुख्य उद्देश्य सर्कुलर इकोनॉमी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना
प्रमुख अवधारणा Waste-to-Wealth
Linear Economy मॉडल Take → Make → Consume → Throw Away
Circular Economy मॉडल Reduce → Reuse → Repair → Refurbish → Recycle
मुख्य फोकस संसाधन दक्षता, पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण और अपशिष्ट में कमी
अन्य फोकस क्षेत्र Circular Finance, Innovation, Digitalisation, Technology