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भारत और MERCOSUR ने प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट के लिए अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए

भारत और मर्कोसुर (MERCOSUR) ने प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (Preferential Trade Agreement—PTA) के तहत पहले अतिरिक्त प्रोटोकॉल (First Additional Protocol) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस प्रोटोकॉल का प्रमुख उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण-पत्र-उत्पत्ति (Electronic Certificate of Origin—e-CoO) को स्वीकार करने की व्यवस्था स्थापित करना है।

यह कदम भारत और मर्कोसुर सदस्य देशों के बीच व्यापार को अधिक डिजिटल, तेज, पारदर्शी और कागजरहित (Paperless) बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण तथा व्यापारिक दस्तावेजों के इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन को बढ़ावा मिलेगा।

मर्कोसुर क्या है?

MERCOSUR का पूरा नाम Southern Common Market (दक्षिणी साझा बाजार) है। इसका नाम स्पेनिश भाषा के Mercado Común del Sur से लिया गया है।

यह दक्षिण अमेरिका में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख संगठन/प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देना है।

मर्कोसुर की स्थापना प्रारंभ में चार देशों ने की थी—

  • अर्जेंटीना
  • ब्राजील
  • पैराग्वे
  • उरुग्वे

बाद में इसके सदस्यता ढांचे में वेनेजुएला और बोलीविया भी शामिल हुए।

मर्कोसुर की स्थापना

मर्कोसुर की स्थापना 1991 में असुनसियोन संधि (Treaty of Asunción) के माध्यम से हुई थी।

इसके बाद संगठन की संस्थागत संरचना को 1994 की ओउरो प्रेटो संधि (Treaty of Ouro Preto) के माध्यम से और अधिक विकसित किया गया।

इस प्रकार परीक्षा की दृष्टि से दो महत्वपूर्ण तिथियां हैं—

  • 1991 — Treaty of Asunción
  • 1994 — Treaty of Ouro Preto

मर्कोसुर के सदस्य देशों की स्थिति

मर्कोसुर की सदस्यता के संदर्भ में वेनेजुएला और बोलीविया की स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

वेनेजुएला जुलाई 2012 में मर्कोसुर में शामिल हुआ था, लेकिन बाद में 2017 में उसकी सदस्यता निलंबित कर दी गई।

वहीं बोलीविया जुलाई 2024 में मर्कोसुर का पूर्ण सदस्य बना। हालांकि, भारत-मर्कोसुर PTA से संबंधित मौजूदा समझौतों में बोलीविया की स्थिति अलग है, क्योंकि इन समझौतों की अधिकांश वार्ताएं उसके पूर्ण सदस्य बनने से पहले ही पूरी हो चुकी थीं।

भारत-मर्कोसुर संबंध

भारत और मर्कोसुर के बीच आर्थिक संबंधों को संस्थागत रूप देने के लिए दोनों पक्षों ने प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) पर हस्ताक्षर किए।

भारत-मर्कोसुर PTA पर 25 जनवरी 2004 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे।

यह समझौता बाद में 1 जून 2009 से प्रभावी हुआ।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच चयनित उत्पादों पर तरजीही शुल्क (Preferential Tariff) उपलब्ध कराकर द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना था।

भारत-मर्कोसुर PTA के तहत व्यापारिक रियायतें

भारत-मर्कोसुर PTA के अंतर्गत दोनों पक्षों ने सीमित संख्या में टैरिफ लाइनों पर शुल्क संबंधी रियायतें प्रदान की हैं।

  • भारत द्वारा: 450 टैरिफ लाइनों पर रियायत
  • मर्कोसुर द्वारा: 452 टैरिफ लाइनों पर रियायत

दोनों पक्ष इस समझौते के दायरे को और व्यापक बनाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं।

पहला अतिरिक्त प्रोटोकॉल क्या है?

भारत-मर्कोसुर PTA के अंतर्गत हस्ताक्षरित पहला अतिरिक्त प्रोटोकॉल समझौते के Annex III — Rules of Origin से संबंधित है।

इस प्रोटोकॉल के माध्यम से PTA के Article 16 में संशोधन किया गया है।

इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में जारी Certificate of Origin को वही कानूनी वैधता और समान महत्व प्राप्त होगा, जो कागजी प्रारूप में जारी Certificate of Origin को प्राप्त है।

इसका अर्थ है कि अब निर्धारित शर्तों के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण-पत्र को केवल डिजिटल दस्तावेज होने के कारण कागजी प्रमाण-पत्र से कमतर नहीं माना जाएगा।

Certificate of Origin क्या है?

Certificate of Origin (CoO) एक महत्वपूर्ण व्यापारिक दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि निर्यात किया गया उत्पाद किस देश में उत्पन्न या निर्मित हुआ है।

PTA जैसे व्यापार समझौतों में इसका विशेष महत्व है क्योंकि किसी उत्पाद को तरजीही शुल्क का लाभ देने के लिए यह प्रमाणित करना आवश्यक हो सकता है कि वह निर्धारित Rules of Origin को पूरा करता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी भारतीय उत्पाद को मर्कोसुर बाजार में PTA के तहत कम सीमा शुल्क का लाभ मिलना है, तो संबंधित Certificate of Origin यह प्रमाणित करने में मदद करता है कि उत्पाद PTA में निर्धारित मूल-उत्पत्ति की शर्तों को पूरा करता है।

इलेक्ट्रॉनिक Certificate of Origin की व्यवस्था

नए प्रोटोकॉल के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक Certificate of Origin को संबंधित पक्षों के घरेलू कानूनों और नियमों के अनुरूप जारी किया जाना होगा।

इन्हें—

  • अधिकृत संस्थाओं द्वारा जारी किया जाएगा।
  • अधिकृत अधिकारियों द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित किया जाएगा।
  • संबंधित देश के घरेलू कानून के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

इससे Certificate of Origin जारी करने और उसके सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा सकेगा।

Paperless Trade को बढ़ावा

इस प्रोटोकॉल का एक प्रमुख उद्देश्य कागजरहित व्यापार (Paperless Trade) की दिशा में आगे बढ़ना है।

पारंपरिक व्यापार व्यवस्था में Certificate of Origin सहित कई दस्तावेज कागजी रूप में तैयार, भेजे और सत्यापित किए जाते हैं। इससे दस्तावेजों के परिवहन, भंडारण और सत्यापन में अतिरिक्त समय और लागत लग सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण-पत्र की स्वीकृति से दस्तावेजों को डिजिटल माध्यम से साझा और सत्यापित करना आसान होगा।

व्यापारिक लागत और समय में कमी

इलेक्ट्रॉनिक Certificate of Origin से दस्तावेज तैयार करने, भेजने और सत्यापित करने में लगने वाला समय कम हो सकता है।

इससे विशेष रूप से निम्न लाभ अपेक्षित हैं—

  1. लेन-देन लागत में कमी
  2. दस्तावेजी प्रक्रिया में तेजी
  3. Certificate of Origin के सत्यापन में सुविधा
  4. सीमा शुल्क प्रक्रिया की दक्षता में सुधार
  5. व्यापारिक दस्तावेजों के डिजिटल प्रबंधन को बढ़ावा

इस प्रकार यह प्रोटोकॉल व्यापारियों और सीमा शुल्क अधिकारियों दोनों के लिए प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में सहायता कर सकता है।

भारत-मर्कोसुर व्यापार के लिए महत्व

भारत और मर्कोसुर के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए मौजूदा PTA का आधुनिकीकरण महत्वपूर्ण है।

इलेक्ट्रॉनिक Certificate of Origin की व्यवस्था से मौजूदा PTA के तहत तरजीही व्यापार को अधिक कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।

यह कदम व्यापक रूप से वैश्विक व्यापार में बढ़ते डिजिटलाइजेशन, पेपरलेस डॉक्यूमेंटेशन और आधुनिक कस्टम्स प्रक्रियाओं के अनुरूप है।

प्रोटोकॉल कब लागू होगा?

पहला अतिरिक्त प्रोटोकॉल हस्ताक्षर किए जाने के तुरंत बाद स्वतः लागू नहीं होगा।

यह तब प्रभावी होगा जब—

  • भारत अपनी आवश्यक आंतरिक प्रक्रियाएं (Internal Procedures) पूरी करेगा।
  • संबंधित मर्कोसुर पक्ष अपनी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी करेंगे।
  • दोनों पक्ष एक-दूसरे को इन प्रक्रियाओं के पूरा होने की अधिसूचना (Notification) देंगे।

इसके बाद प्रोटोकॉल प्रभावी होगा।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

तथ्य जानकारी
संगठन MERCOSUR
पूरा नाम Southern Common Market
स्पेनिश नाम Mercado Común del Sur
स्थापना 1991
स्थापना संधि Treaty of Asunción
प्रमुख संस्थागत संधि Treaty of Ouro Preto, 1994
संस्थापक देश अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे और उरुग्वे
वेनेजुएला 2012 में शामिल, 2017 में निलंबित
बोलीविया 2024 में पूर्ण सदस्य
भारत-मर्कोसुर PTA पर हस्ताक्षर 25 जनवरी 2004
PTA प्रभावी 1 जून 2009
भारत की टैरिफ रियायतें 450 टैरिफ लाइनें
मर्कोसुर की टैरिफ रियायतें 452 टैरिफ लाइनें
नया समझौता First Additional Protocol
मुख्य विषय Electronic Certificate of Origin
मुख्य उद्देश्य Paperless Trade एवं Customs Modernisation
CoO का पूरा नाम Certificate of Origin
प्रमुख लाभ समय एवं लेन-देन लागत में कमी
लागू होने की शर्त संबंधित आंतरिक प्रक्रियाओं और पारस्परिक अधिसूचना की पूर्णता