भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR(B) योजना के तहत अनिवासी भारतीयों (NRIs) से विदेशी मुद्रा जमा 100 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया।
FCNR(B) योजना के माध्यम से भारी डॉलर प्रवाह के कारण भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
RBI ने FCNR(B) योजना जून 2026 में विदेशी मुद्रा निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू की थी।
31 अगस्त 2026 तक FCNR(B) योजना के तहत पूंजी प्रवाह 100 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस योजना के तहत लगभग 80 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान लगाया था।
योजना को अनुमान से अधिक सफलता मिलने के बाद RBI ने FCNR(B) विंडो को निर्धारित समय से एक माह पहले बंद कर दिया।
FCNR(B) विंडो को मूल रूप से 30 सितंबर 2026 तक खुला रखा जाना था।
अत्यधिक विदेशी मुद्रा प्रवाह के भविष्य में वापस निकलने से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को देखते हुए योजना को समय से पहले बंद किया गया।
FCNR(B) योजना के तहत पहले से अनुबंधित जमाओं के लिए बैंक 11 सितंबर 2026 तक स्वैप सुविधा का लाभ ले सकेंगे।
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से RBI को मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर भारतीय रुपये को समर्थन देने की अधिक क्षमता मिली।
बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना हुआ था।
जुलाई 2026 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जिसके बाद इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
फरवरी 2026 में युद्ध शुरू होने के बाद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 46 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई थी।
अगस्त 2026 तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल था।
सितंबर 2026 में मजबूत विदेशी मुद्रा प्रवाह के कारण भारतीय रुपये को समर्थन मिला।
रुपया मंगलवार को 0.4 प्रतिशत मजबूत होकर 94.7988 प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो 1 जुलाई के बाद इसका सबसे मजबूत स्तर था।
FCNR(B) योजना के बारे में
FCNR(B) का पूरा नाम फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) है।
यह योजना अनिवासी भारतीयों को अपनी विदेशों में अर्जित आय भारत में विदेशी मुद्रा के रूप में जमा करने की सुविधा देती है।
FCNR(B) खातों में अमेरिकी डॉलर सहित विदेशी मुद्राओं में जमा किया जा सकता है।
इस योजना में जमाकर्ताओं को अपनी विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपये में बदलना आवश्यक नहीं होता।
FCNR(B) जमा निश्चित अवधि के लिए किए जाते हैं।
जमाकर्ताओं को मूलधन और ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में प्राप्त होते हैं।
विदेशी मुद्रा में भुगतान होने के कारण जमाकर्ताओं को भारतीय रुपये के मूल्य में उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलती है।
RBI ने जून 2026 में तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली नई FCNR(B) जमाओं के लिए रियायती स्वैप सुविधा शुरू की।
इस स्वैप सुविधा के तहत RBI ने विदेशी मुद्रा हेजिंग की लागत वहन की, जो सामान्यतः बैंकों द्वारा वहन की जाती है।
वित्त वर्ष 2025 में FCNR(B) के माध्यम से 7 अरब डॉलर से अधिक का प्रवाह हुआ था।
वित्त वर्ष 2026 में FCNR(B) प्रवाह घटकर केवल 946 मिलियन डॉलर रह गया था।
प्रवाह बढ़ाने के लिए RBI द्वारा शुरू की गई रियायती स्वैप सुविधा को व्यापक सफलता मिली।
अगस्त की शुरुआत तक जून से FCNR(B) के माध्यम से 40.8 अरब डॉलर भारत में आ चुके थे।
31 अगस्त तक FCNR(B) के माध्यम से कुल प्रवाह 100 अरब डॉलर को पार कर गया।
FCNR(B) का ऐतिहासिक महत्व
भारत ने पहली बार वर्ष 1991 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान प्रवासी भारतीयों की विदेशी मुद्रा जमाओं का सहारा लिया था।
वर्ष 2013 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ‘टेपेर टैंट्रम’ के कारण हुए पूंजी बहिर्वाह को रोकने के लिए भारत ने प्रवासी भारतीयों से लगभग 34 अरब डॉलर जुटाए थे।
FCNR(B) के माध्यम से प्राप्त भारी डॉलर प्रवाह से भारत का बाहरी वित्तीय सुरक्षा कवच मजबूत हुआ है।
रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार RBI को डॉलर बेचकर रुपये को समर्थन देने के लिए अधिक क्षमता प्रदान करता है।