भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 सितंबर 2026 को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-05 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह मिशन भारत के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि EOS-05 को जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाना है। इस कक्षा में स्थित उपग्रह लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊँचाई से पृथ्वी की लगातार निगरानी करने में सक्षम होगा।
प्रक्षेपण कहाँ और कैसे हुआ?
EOS-05 को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) के माध्यम से आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया गया।
यह एक तड़के सुबह का मिशन था। प्रक्षेपण के लगभग 18 मिनट बाद GSLV ने EOS-05 को निर्धारित उप-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर कक्षा (Sub-Geosynchronous Transfer Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।
इसके बाद उपग्रह को उसकी निर्धारित जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
EOS-05 क्या है?
EOS-05 एक पृथ्वी अवलोकन एवं इमेजिंग उपग्रह है। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष से पृथ्वी की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और अवलोकन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना है।
यह उपग्रह विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊँचाई वाली जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की निगरानी के लिए तैयार किया गया है।
जियोसिंक्रोनस कक्षा क्या होती है?
जियोसिंक्रोनस कक्षा पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर स्थित एक विशेष कक्षा है। इस कक्षा में उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन की गति के अनुरूप परिक्रमा करता है।
इसका प्रमुख लाभ यह है कि उपग्रह पृथ्वी के किसी निश्चित क्षेत्र पर लंबे समय तक निगरानी बनाए रख सकता है। यही कारण है कि ऐसी कक्षाएँ मौसम निगरानी, संचार तथा पृथ्वी अवलोकन जैसे कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी होती हैं।
LEO और जियोसिंक्रोनस कक्षा में अंतर
अधिकांश पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों को निम्न पृथ्वी कक्षा यानी Low Earth Orbit (LEO) में स्थापित किया जाता है। LEO उपग्रह पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब होते हैं और पृथ्वी की सतह की अधिक विस्तृत तस्वीरें लेने में सक्षम होते हैं।
इसके विपरीत, EOS-05 को लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊँचाई पर जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाना है। अधिक ऊँचाई के कारण यह बड़े क्षेत्र पर लगातार निगरानी रखने की क्षमता प्रदान करेगा।
GSLV की महत्वपूर्ण भूमिका
EOS-05 का प्रक्षेपण GSLV रॉकेट से किया गया। GSLV भारत का एक महत्वपूर्ण प्रक्षेपण यान है, जिसका उपयोग भारी उपग्रहों को उच्च कक्षाओं में स्थापित करने के लिए किया जाता है।
EOS-05 का वजन 2,300 किलोग्राम से अधिक है। यह GSLV द्वारा अब तक ले जाया गया सबसे भारी उपग्रह है। इससे भारत की भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने की क्षमता का भी प्रदर्शन होता है।
श्रीहरिकोटा से 107वाँ प्रक्षेपण
EOS-05 मिशन श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारत का 107वाँ प्रक्षेपण था।
इसके साथ ही यह GSLV का 19वाँ मिशन भी रहा। इस प्रकार यह मिशन भारत के प्रक्षेपण इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भारत के लिए EOS-05 का महत्व
EOS-05 के परिचालन में आने के बाद यह भारत का जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की निगरानी करने वाला पहला समर्पित इमेजिंग उपग्रह बनेगा।
इससे भारत की अंतरिक्ष आधारित पृथ्वी निगरानी क्षमता में वृद्धि होगी। लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊँचाई से बड़े क्षेत्र की निगरानी संभव होने के कारण यह उपग्रह विभिन्न प्रकार के पृथ्वी अवलोकन कार्यों में उपयोगी साबित हो सकता है।
संभावित उपयोग
EOS-05 से प्राप्त पृथ्वी अवलोकन संबंधी आँकड़े कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं, जैसे—
- मौसम एवं वायुमंडलीय घटनाओं की निगरानी।
- प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी एवं प्रबंधन।
- बाढ़, चक्रवात और अन्य आपदाओं के प्रभाव का आकलन।
- पर्यावरण एवं भूमि उपयोग में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी।
- कृषि एवं प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित अवलोकन।
- बड़े भौगोलिक क्षेत्रों की निरंतर निगरानी।
- रणनीतिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पृथ्वी अवलोकन कार्य।
मिशन की प्रमुख उपलब्धियाँ
- प्रक्षेपण तिथि — 4 सितंबर 2026।
- प्रक्षेपण एजेंसी — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)।
- उपग्रह — EOS-05।
- उपग्रह का प्रकार — पृथ्वी अवलोकन/इमेजिंग उपग्रह।
- प्रक्षेपण यान — GSLV।
- प्रक्षेपण स्थल — सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा।
- प्रक्षेपण पैड — दूसरा लॉन्च पैड।
- प्रारंभिक कक्षा — उप-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर कक्षा।
- निर्धारित कक्षा — जियोसिंक्रोनस कक्षा।
- कक्षीय ऊँचाई — लगभग 36,000 किमी।
- उपग्रह का वजन — 2,300 किलोग्राम से अधिक।
- श्रीहरिकोटा से 107वाँ प्रक्षेपण।
- GSLV का 19वाँ मिशन।
- GSLV द्वारा प्रक्षेपित अब तक का सबसे भारी उपग्रह।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण
EOS-05 मिशन मुख्य रूप से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, पृथ्वी अवलोकन और ISRO से संबंधित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे जुड़े प्रश्न उपग्रह का नाम, प्रक्षेपण यान, प्रक्षेपण स्थल, कक्षा, वजन तथा श्रीहरिकोटा और GSLV के मिशन संबंधी आँकड़ों पर पूछे जा सकते हैं।