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जितिन प्रसाद ने G20 नवाचार मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 1–2 सितंबर 2026 को अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना स्थित चैपल हिल में आयोजित G20 नवाचार मंत्रिस्तरीय बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। बैठक की मेजबानी अमेरिका के वाणिज्य विभाग और व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी (OSTP) ने की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य

बैठक का प्रमुख उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 6G, सेमीकंडक्टर, डिजिटल प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स और नवाचार के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना था।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि नई प्रौद्योगिकियों का विकास केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहे, बल्कि इससे आर्थिक विकास, उत्पादकता, रोजगार और आम लोगों के लिए नए अवसर भी पैदा हों। G20 मंत्रियों ने माना कि उभरती प्रौद्योगिकियों में समृद्धि बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार करने और लोगों के लिए अवसरों का विस्तार करने की क्षमता है। 

6G तकनीक पर भारत की भूमिका

भारत ने अमेरिका सहित 20 से अधिक समान विचारधारा वाले देशों के साथ अगली पीढ़ी के नेटवर्क यानी 6G के लिए खुले, सुरक्षित, परस्पर-संचालनीय और लचीले नेटवर्क की दिशा में सहयोग का समर्थन किया।

6G को भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें तेज संचार, कम विलंबता, अधिक कनेक्टिविटी और उन्नत डिजिटल सेवाओं की क्षमता होगी।

भारत का उद्देश्य 6G के वैश्विक मानकों और पेटेंट में महत्वपूर्ण योगदान देना तथा देश को अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक के विकास में अग्रणी बनाना है।

G20 नवाचार मंत्रिस्तरीय वक्तव्य

बैठक के अंत में G20 मंत्रियों ने सर्वसम्मति से Innovation Ministerial Statement जारी किया। इस वक्तव्य में नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों को आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति का महत्वपूर्ण साधन माना गया।

वक्तव्य में छह प्रमुख स्तंभों पर व्यापक सहमति बनी।

छह प्रमुख स्तंभ

1. नवाचार-समर्थक नीतिगत ढाँचा

ऐसी नीतियाँ और नियामक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया, जो अनुसंधान, नवाचार और नई तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करें।

इसका उद्देश्य नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों, स्टार्टअप और शोध संस्थानों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।

2. अवसर और समृद्धि के लिए प्रौद्योगिकी

प्रौद्योगिकी का उपयोग आर्थिक विकास और समाज के व्यापक वर्गों तक अवसर पहुँचाने के लिए करने पर जोर दिया गया।

AI, डिजिटल सेवाओं और अन्य उभरती तकनीकों को रोजगार, उत्पादकता तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का माध्यम माना गया।

3. कुशल तकनीकी कार्यबल का विकास

नई तकनीकों के विकास के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन आवश्यक है। इसलिए G20 देशों में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और भविष्य की नौकरियों के लिए आवश्यक क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया।

विशेष रूप से AI और अन्य उभरती तकनीकों के क्षेत्र में कुशल कार्यबल तैयार करना इस एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

4. AI के लिए बौद्धिक संपदा नीतियाँ

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से विकास के साथ बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े नए प्रश्न सामने आ रहे हैं।

G20 देशों ने AI से संबंधित बौद्धिक संपदा नीतियों पर सहयोग और उपयुक्त नीतिगत ढाँचा विकसित करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

5. AI के लिए मानक और मानकों के लिए AI

AI के विकास और उपयोग में तकनीकी मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस स्तंभ के अंतर्गत AI के लिए उपयुक्त मानक विकसित करने तथा AI तकनीक का उपयोग मानकीकरण की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए करने पर ध्यान दिया गया।

6. औद्योगिक नवाचार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में निवेश

औद्योगिक क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

सेमीकंडक्टर और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में मजबूत एवं विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण है। उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए Carolina Principles

बैठक में मंत्रियों ने “Carolina Principles for Emerging Technologies” पर भी सहमति व्यक्त की।

इन सिद्धांतों के तहत देशों से मूलभूत अनुसंधान में निवेश बढ़ाने, नई तकनीकों के व्यावसायीकरण के रास्ते मजबूत करने और विश्वसनीय तकनीकों को अपनाने तथा बड़े स्तर पर लागू करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का आह्वान किया गया।

इसका महत्व इसलिए है क्योंकि किसी तकनीक की खोज और प्रयोगशाला स्तर पर विकास के बाद उसे वास्तविक दुनिया में उपयोगी उत्पाद या सेवा में बदलना भी उतना ही आवश्यक है।

AI Prosperity Objectives और AI Prosperity Compact

बैठक के अन्य प्रमुख परिणामों में “AI Prosperity Objectives” और “AI Prosperity Compact” भी शामिल रहे।

इनका उद्देश्य G20 देशों में तकनीकी कार्यबल के विकास को आगे बढ़ाना तथा AI के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी और साझेदारी के अवसरों को बढ़ाना है। 

भारत की द्विपक्षीय चर्चाएँ

G20 बैठक से इतर जितिन प्रसाद ने कई देशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय चर्चाएँ कीं।

यूरोपीय आयोग की कार्यकारी उपाध्यक्ष हेन्ना विर्ककुनेन के साथ बातचीत में नवाचार में सहयोग मजबूत करने और विश्वसनीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर चर्चा हुई।

फ्रांस की AI एवं डिजिटल मामलों की मंत्री ऐनी ले हेनानफ के साथ AI और डिजिटल तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के विषय पर चर्चा हुई। भारत और फ्रांस ने तकनीक आधारित नवाचार तथा विश्वसनीय डिजिटल भविष्य के लिए साझेदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। 

अमेरिका के साथ तकनीकी सहयोग

भारत और अमेरिका के बीच सेमीकंडक्टर, AI और डेटा सेंटर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

इस तरह की साझेदारी भारत के उभरते तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

Duke University का दौरा

G20 बैठक के बाद जितिन प्रसाद ने अमेरिका के Duke University का दौरा किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के नेतृत्व, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के साथ तकनीक, अनुसंधान, इंजीनियरिंग, AI, कंप्यूटर विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने विश्वविद्यालय की Robotics Laboratory का भी दौरा किया, जहाँ AI आधारित सेंसरिंग, रोबोटिक्स, बायोमेडिकल सिमुलेशन, मशीन लर्निंग और स्वास्थ्य संबंधी तकनीकों पर काम करने वाले शोधकर्ताओं के साथ बातचीत की। 

भारत के लिए महत्व

इस बैठक में भारत की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक तकनीकी और नवाचार एजेंडे को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

भारत विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है—

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)।
  • 6G और अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक।
  • सेमीकंडक्टर।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)।
  • रोबोटिक्स।
  • उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ।
  • अनुसंधान एवं नवाचार।
  • तकनीकी कौशल और मानव संसाधन विकास।

इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारत का लक्ष्य तकनीकी प्रगति को आर्थिक विकास, रोजगार, नवाचार और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार से जोड़ना है।