भारत सरकार की ‘Districts as Export Hubs (DEH)’ पहल का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले की स्थानीय क्षमता, विशिष्ट उत्पादों और सेवाओं को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। इस पहल के माध्यम से निर्यात को केवल बड़े औद्योगिक शहरों और बंदरगाहों तक सीमित रखने के बजाय छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और दूरस्थ जिलों तक विस्तार देने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्तमान में ‘जिलों को निर्यात हब’ पहल के अंतर्गत देश के 770 से अधिक जिले शामिल हैं। यह पहल स्थानीय उत्पादन को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने, रोजगार बढ़ाने और जिला-स्तर पर आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के निर्यात में लगातार वृद्धि
भारत के वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचकर 825.25 अरब डॉलर रहा।
- वित्त वर्ष 2025-26 में कुल निर्यात बढ़कर अनुमानित 863.11 अरब डॉलर हो गया।
- लंबे समय तक भारत की निर्यात गतिविधियाँ कुछ चुनिंदा औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख बंदरगाह शहरों के आसपास केंद्रित रहीं।
- इसके कारण छोटे शहरों, ग्रामीण जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों में उत्पादित कई विशिष्ट एवं उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद वैश्विक बाजार तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुँच पाए।
इसी संभावना को देखते हुए सरकार ने जिला-केंद्रित निर्यात रणनीति को बढ़ावा दिया।
Districts as Export Hubs पहल क्या है?
‘Districts as Export Hubs’ यानी ‘जिलों को निर्यात हब’ पहल का उद्देश्य प्रत्येक जिले को उसकी विशिष्ट आर्थिक क्षमता के आधार पर निर्यात वृद्धि में सहभागी बनाना है।
इस पहल में प्रत्येक जिले को केवल उत्पादन की इकाई के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र निर्यात योजना इकाई के रूप में देखा जाता है।
इसके तहत किसी जिले के:
- स्थानीय उत्पाद,
- कृषि एवं खाद्य उत्पाद,
- हस्तशिल्प,
- हथकरघा,
- औद्योगिक उत्पाद,
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ,
- सेवाएँ
आदि में मौजूद निर्यात क्षमता की पहचान की जाती है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
ODOP से DEH तक का सफर
Districts as Export Hubs पहल को समझने के लिए ‘One District One Product (ODOP)’ कार्यक्रम को समझना आवश्यक है।
One District One Product कार्यक्रम
- ‘One District One Product’ यानी ODOP कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश की राज्य पहल के रूप में हुई थी।
- इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले के एक विशिष्ट उत्पाद की पहचान करना, उसका ब्रांड निर्माण करना और उसे बढ़ावा देना था।
- इस पहल ने स्थानीय उत्पादों को जिले की पहचान के साथ जोड़कर उन्हें आर्थिक अवसर में बदलने पर जोर दिया।
- उत्तर प्रदेश में इस मॉडल की सफलता के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया गया।
ODOP और DEH में अंतर
ODOP मुख्य रूप से किसी जिले के विशिष्ट उत्पाद की पहचान, ब्रांडिंग और प्रचार पर केंद्रित था।
इसके आगे बढ़ते हुए DEH पहल का दायरा अधिक व्यापक है। इसमें केवल उत्पाद के प्रचार के बजाय पूरे निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है।
अर्थात् DEH के तहत उत्पाद की पहचान से लेकर उत्पादन, गुणवत्ता, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, बाजार तक पहुँच और निर्यात की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
DEH पहल के प्रमुख उद्देश्य
1. प्रत्येक जिले की निर्यात क्षमता का उपयोग
प्रत्येक जिले में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय विशेषज्ञता की पहचान करके उनकी निर्यात क्षमता को विकसित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
2. स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराना
स्थानीय स्तर पर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को विदेशी बाजारों तक पहुँचाने के लिए आवश्यक सहायता एवं समन्वय उपलब्ध कराया जाता है।
3. स्थानीय उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना
स्थानीय उद्यमों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाने के लिए गुणवत्ता, उत्पादन, पैकेजिंग, मानकों और बाजार की आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाता है।
4. रोजगार के अवसर बढ़ाना
निर्यात गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय उत्पादन बढ़ सकता है, जिससे ग्रामीण और जिला स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
5. जिला-आधारित आर्थिक विकास
DEH का उद्देश्य आर्थिक विकास को बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय जिलों और स्थानीय क्षेत्रों तक पहुँचाना है।
DEH केवल वित्तीय योजना नहीं है
Districts as Export Hubs को किसी अलग वित्तीय योजना के रूप में समझना उचित नहीं है।
यह मुख्य रूप से एक ‘Convergence Framework’ यानी विभिन्न सरकारी योजनाओं और संस्थागत प्रयासों को एक साथ जोड़ने वाला ढाँचा है।
इसके तहत नई अलग वित्तीय योजना शुरू करने के बजाय केंद्र और राज्य सरकार की पहले से चल रही विभिन्न योजनाओं के उपलब्ध वित्तीय संसाधनों और सुविधाओं का उपयोग किया जाता है।
इससे विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने में सहायता मिलती है।
DEH पहल से होने वाले प्रमुख लाभ
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
जिले के स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ने से स्थानीय व्यवसायों और उद्यमों को लाभ मिल सकता है।
रोजगार सृजन
उत्पादन और निर्यात बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
छोटे उद्यमों को वैश्विक बाजार
छोटे एवं मध्यम उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचने का अवसर मिल सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि, हस्तशिल्प, हथकरघा और अन्य स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है।
निर्यात का विकेंद्रीकरण
निर्यात गतिविधियों को कुछ प्रमुख शहरों और बंदरगाहों तक सीमित रखने के बजाय देश के विभिन्न जिलों तक फैलाने में मदद मिलेगी।
DEH पहल का कार्यान्वयन
Districts as Export Hubs पहल केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर समन्वय की एक बहु-स्तरीय व्यवस्था के माध्यम से संचालित होती है।
1. केंद्र सरकार की भूमिका
वाणिज्य विभाग इस पहल के लिए व्यापक नीति दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करता है।
वहीं, Directorate General of Foreign Trade (DGFT) इसके कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
DGFT की प्रमुख भूमिकाओं में शामिल हैं:
- हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करना।
- पहल के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाना।
- विभिन्न स्तरों पर प्रगति की निगरानी करना।
- निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं को सुगम बनाने में सहायता करना।
राज्य स्तर पर कार्यान्वयन
राज्य स्तर पर State Export Promotion Committees (SEPCs) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इनका उद्देश्य विभिन्न राज्य विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना और DEH पहल को प्रभावी रूप से लागू करना है।
SEPCs यह सुनिश्चित करने में सहायता करती हैं कि निर्यात से संबंधित विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के बीच उचित तालमेल हो।
जिला स्तर पर District Export Promotion Committees
जिला स्तर पर District Export Promotion Committees (DEPCs) इस पहल की प्रमुख कार्यान्वयन इकाई हैं।
DEPCs की प्रमुख जिम्मेदारियाँ हैं:
- जिले में निर्यात की संभावनाओं की पहचान करना।
- स्थानीय उत्पादों और सेवाओं का मूल्यांकन करना।
- निर्यात से जुड़ी स्थानीय समस्याओं की पहचान एवं समाधान करना।
- उद्योगों और निर्यातकों के साथ समन्वय स्थापित करना।
- अन्य संबंधित हितधारकों के साथ सहयोग करना।
- जिले के लिए निर्यात कार्ययोजना तैयार करना।
District Export Action Plan क्या है?
DEH पहल के तहत प्रत्येक जिले के लिए District Export Action Plan यानी DEAP तैयार किया जाता है।
यह योजना जिले की निर्यात क्षमता का विस्तृत आकलन करने और उसे विकसित करने के लिए एक रोडमैप के रूप में काम करती है।
DEAP में क्या शामिल होता है?
District Export Action Plan में मुख्य रूप से निम्नलिखित पहलुओं का अध्ययन किया जाता है—
1. निर्यात योग्य उत्पादों और सेवाओं की पहचान
जिले में ऐसे उत्पादों और सेवाओं की पहचान की जाती है जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग और निर्यात की क्षमता मौजूद है।
2. बुनियादी ढाँचे का मूल्यांकन
उत्पादन, भंडारण, पैकेजिंग और परिवहन से संबंधित बुनियादी ढाँचे की स्थिति का आकलन किया जाता है।
3. लॉजिस्टिक्स का आकलन
उत्पाद को स्थानीय उत्पादन केंद्र से घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने में आने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियों की पहचान की जाती है।
4. निर्यात संबंधी बाधाओं की पहचान
जिले में निर्यात को प्रभावित करने वाली समस्याओं, जैसे परिवहन, गुणवत्ता मानक, पैकेजिंग, बाजार जानकारी और अन्य प्रक्रियात्मक बाधाओं का अध्ययन किया जाता है।
5. प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार
स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिश की जाती है।
6. बाजार तक पहुँच
स्थानीय उत्पादकों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच दिलाने के लिए संभावित बाजारों और आवश्यक हस्तक्षेपों की पहचान की जाती है।
DEH पहल का व्यापक महत्व
Districts as Export Hubs पहल भारत के निर्यात ढाँचे में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है।
पहले जहाँ निर्यात मुख्य रूप से बड़े औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाह शहरों से जुड़ा हुआ था, वहीं DEH मॉडल जिले की स्थानीय क्षमता को निर्यात रणनीति का आधार बनाता है।
इससे भारत के विभिन्न हिस्सों में मौजूद विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
यह पहल ‘स्थानीय के लिए वैश्विक बाजार’ की अवधारणा को मजबूत करते हुए भारत के निर्यात आधार को अधिक व्यापक और विकेंद्रीकृत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| पहल का नाम | Districts as Export Hubs (DEH) |
| हिंदी नाम | जिलों को निर्यात हब |
| वर्तमान कवरेज | 770 से अधिक जिले |
| मुख्य उद्देश्य | प्रत्येक जिले की निर्यात क्षमता का उपयोग |
| ODOP की शुरुआत | 2018 |
| ODOP की शुरुआत | उत्तर प्रदेश |
| ODOP का उद्देश्य | एक जिले के विशिष्ट उत्पाद की पहचान एवं प्रचार |
| DEH का स्वरूप | Convergence Framework |
| प्रमुख मंत्रालय | वाणिज्य मंत्रालय |
| कार्यान्वयन में प्रमुख संस्था | DGFT |
| राज्य स्तर की समिति | State Export Promotion Committee (SEPC) |
| जिला स्तर की समिति | District Export Promotion Committee (DEPC) |
| जिला कार्ययोजना | District Export Action Plan (DEAP) |
| वित्त वर्ष 2024-25 का कुल निर्यात | 825.25 अरब डॉलर |
| वित्त वर्ष 2025-26 का अनुमानित कुल निर्यात | 863.11 अरब डॉलर |
| प्रमुख लक्ष्य | स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ना |
निष्कर्ष
‘Districts as Export Hubs’ पहल का मूल उद्देश्य भारत के निर्यात विकास को जिला स्तर तक ले जाना है। इसके माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्ट आर्थिक ताकत, स्थानीय उत्पाद और सेवाओं को पहचानकर उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
ODOP से आगे बढ़ते हुए DEH ने केवल उत्पाद की पहचान और ब्रांडिंग तक सीमित रहने के बजाय उत्पादन, बुनियादी ढाँचे, लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और बाजार पहुँच जैसे पूरे निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। 770 से अधिक जिलों का इसके दायरे में आना भारत के निर्यात को अधिक विकेंद्रीकृत, समावेशी और जिला-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।