सोलोमन पप्पैया प्रसिद्ध तमिल विद्वान, वक्ता, अभिनेता और टेलीविजन व्यक्तित्व थे।
उनका निधन 90 वर्ष की आयु में मदुरै के एक निजी अस्पताल में हुआ।
उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
उन्होंने सदियों पुरानी तमिल ‘पट्टिमंड्रम’ (वाद-विवाद मंच) परंपरा को अकादमिक दायरे से निकालकर आम लोगों और घर-घर तक लोकप्रिय बनाया।
स्वास्थ्य बिगड़ने से कुछ समय पहले उन्होंने विनायक चतुर्थी के लिए एक विशेष पट्टिमंड्रम कार्यक्रम रिकॉर्ड किया था।
फिल्मी सफर
सोलोमन पप्पैया ने कभी पेशेवर अभिनेता बनने का लक्ष्य नहीं बनाया था। उनकी विशिष्ट आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और लोकप्रियता के कारण उन्हें फिल्मों में भूमिकाएं मिलीं।
फिल्मों में उनकी शुरुआत ‘माप्पिल्लई’ में छोटी भूमिका से हुई।
इसके बाद उन्होंने ‘पुधु वरुषम’ में अभिनय किया।
निर्देशक एस. शंकर ने उन्हें अपनी फिल्मों में महत्वपूर्ण छोटी भूमिकाएं दीं।
शंकर की प्रमुख फिल्मों में उनकी उपस्थिति:
मुधलवन (1999)
बॉयज़ (2003) — मजिस्ट्रेट की भूमिका
यस मैडम (2003)
वर्ष 2007 की फिल्म ‘शिवाजी: द बॉस’, जिसमें रजनीकांत मुख्य भूमिका में थे, ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई।
फिल्म में उन्होंने थोंडैमैन नामक एक धनी पिता की भूमिका निभाई।
रजनीकांत के साथ उनकी हास्यपूर्ण संवाद अदायगी फिल्म की यादगार विशेषताओं में शामिल रही।
200 से अधिक फिल्मों के प्रस्ताव ठुकराए
‘शिवाजी: द बॉस’ की सफलता के बाद उन्हें 200 से अधिक फिल्मों के प्रस्ताव मिले।
उन्होंने सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए।
उनका मुख्य उद्देश्य तमिल साहित्य और पट्टिमंड्रम से जुड़े अपने मूल कार्य को जारी रखना था।
वे लोकप्रियता मिलने के बावजूद अपनी मूल पहचान और साहित्यिक कार्य से जुड़े रहना चाहते थे।
‘शिवाजी’ के दृश्य पर पछतावा
पप्पैया को फिल्म के अंगवई-संगवई वाले हास्य दृश्य में इस्तेमाल किए गए रंगभेद और शारीरिक बनावट पर आधारित मजाक को लेकर पछतावा था।
अंगवई और संगवई नाम तमिल इतिहास और चोल वंश से जुड़े सांस्कृतिक महत्व वाले नाम माने जाते हैं।
पप्पैया को लगा कि इन ऐतिहासिक नामों का इस्तेमाल केवल हास्य के लिए करना उचित नहीं था।
इसी अनुभव के बाद उन्होंने फिल्मों में आगे काम न करने का निर्णय लिया।
प्रमुख सम्मान
2000 — तमिलनाडु सरकार ने तमिल साहित्य और सार्वजनिक विमर्श में योगदान के लिए उन्हें कलैमामणि पुरस्कार से सम्मानित किया।
2021 — 85 वर्ष की आयु में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
पद्म श्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
उन्हें यह सम्मान साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए दिया गया।