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नासा के पर्सिवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह पर सबसे अधिक दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया

Science & Technology 📅 October 19, 2026

पर्सिवरेंस रोवर ने बनाया अंतरिक्ष में ड्राइविंग का नया रिकॉर्ड

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के पर्सिवरेंस रोवर (Perseverance Rover) ने पृथ्वी के अलावा किसी अन्य खगोलीय पिंड पर किसी वाहन द्वारा सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड बनाया है। 11 अक्टूबर को इसके ओडोमीटर पर कुल दूरी 45.22 किलोमीटर दर्ज की गई। इसके साथ ही इसने नासा के ही पुराने ऑपर्च्युनिटी रोवर (Opportunity Rover) का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिसने मंगल ग्रह पर अपने अभियान के दौरान कुल 45.16 किलोमीटर की दूरी तय की थी।

पर्सिवरेंस ने यह उपलब्धि अपने मंगल मिशन के 2,006वें सोल (Sol) पर हासिल की। मंगल ग्रह पर एक सोल का अर्थ वहाँ का एक दिन होता है, जिसकी अवधि पृथ्वी के एक दिन से थोड़ी अधिक होती है।

यह उपलब्धि अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, क्योंकि मंगल ग्रह की सतह पर चट्टानें, गड्ढे, ढलान, रेत और अन्य बाधाएँ मौजूद हैं। ऐसे वातावरण में किसी रोबोटिक वाहन को लंबे समय तक सुरक्षित रूप से चलाना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।

पर्सिवरेंस की सफलता से यह भी स्पष्ट होता है कि स्वचालित नेविगेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय प्रणालियों और उन्नत रोबोटिक तकनीक की सहायता से भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

पर्सिवरेंस रोवर को कब और कहाँ से लॉन्च किया गया?

पर्सिवरेंस रोवर नासा के मार्स 2020 मिशन का हिस्सा है। इसे 30 जुलाई 2020 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से प्रक्षेपित किया गया था।

इस मिशन का प्रमुख उद्देश्य मंगल ग्रह पर प्राचीन सूक्ष्मजीवी जीवन के संभावित संकेतों की खोज करना और यह समझना है कि क्या अतीत में मंगल की परिस्थितियाँ जीवन के अनुकूल थीं।

पर्सिवरेंस 19 फरवरी 2021 को मंगल ग्रह की सतह पर पहुँचा। इसके बाद से यह विभिन्न चट्टानों, मिट्टी और भूवैज्ञानिक संरचनाओं का अध्ययन कर रहा है।

इस मिशन में रोवर केवल तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं है। यह वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से चट्टानों की संरचना का विश्लेषण करता है, नमूने एकत्र करता है और मंगल ग्रह के प्राचीन पर्यावरण से संबंधित जानकारी जुटाता है।

जेजेरो क्रेटर को लैंडिंग स्थल क्यों चुना गया?

नासा ने पर्सिवरेंस रोवर के उतरने के लिए मंगल ग्रह पर स्थित जेजेरो क्रेटर (Jezero Crater) को चुना। यह लगभग 45 किलोमीटर चौड़ा प्रभाव क्रेटर है, जो मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्ध में इसिडिस प्लैनिटिया नामक समतल क्षेत्र के पश्चिमी किनारे पर स्थित है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में पानी मौजूद था। यहाँ एक झील, नदी और नदी के डेल्टा जैसी भूवैज्ञानिक संरचनाएँ विकसित हुई थीं।

पृथ्वी पर नदियाँ अपने साथ मिट्टी, रेत और खनिजों को बहाकर लाती हैं। जब नदी किसी झील या समुद्र में प्रवेश करती है, तो उसकी गति कम होने के कारण ये पदार्थ जमा होने लगते हैं और डेल्टा का निर्माण होता है। ऐसी संरचनाएँ अतीत के पर्यावरण और संभावित जैविक गतिविधियों के संकेत सुरक्षित रख सकती हैं।

यदि मंगल ग्रह पर कभी सूक्ष्मजीवी जीवन मौजूद था, तो उसके कुछ रासायनिक या जैविक संकेत प्राचीन झीलों और डेल्टा की चट्टानों में संरक्षित रह सकते हैं। इसी कारण जेजेरो क्रेटर वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए विशेष महत्व रखता है।

पर्सिवरेंस का लैंडिंग स्थल गेल क्रेटर से लगभग 3,700 किलोमीटर दूर है, जहाँ नासा का क्यूरियोसिटी रोवर काम कर रहा है।

मंगल ग्रह पर प्राचीन जीवन की खोज

पर्सिवरेंस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या मंगल ग्रह पर कभी सूक्ष्मजीवी जीवन मौजूद था।

यहाँ सूक्ष्मजीवी जीवन से आशय ऐसे अत्यंत छोटे जीवों से है, जिन्हें सामान्य आँखों से नहीं देखा जा सकता। पृथ्वी पर इस प्रकार के जीव विभिन्न वातावरणों में पाए जाते हैं, जिनमें पानी, मिट्टी और अत्यधिक कठिन परिस्थितियाँ भी शामिल हैं।

मंगल ग्रह पर जीवन की खोज के लिए वैज्ञानिक उन क्षेत्रों का अध्ययन करते हैं जहाँ अतीत में तरल पानी मौजूद रहा हो। पानी जीवन के लिए आवश्यक रासायनिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हालाँकि, किसी स्थान पर पानी का होना अपने आप में जीवन की उपस्थिति का प्रमाण नहीं है। वैज्ञानिकों को ऐसे अतिरिक्त प्रमाणों की आवश्यकता होती है, जो जैविक प्रक्रियाओं और गैर-जैविक रासायनिक प्रक्रियाओं के बीच अंतर स्पष्ट कर सकें।

पर्सिवरेंस चट्टानों में मौजूद खनिजों, कार्बनिक पदार्थों और अन्य रासायनिक संकेतों का अध्ययन करके इसी प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास कर रहा है।

पर्सिवरेंस द्वारा चट्टानों और मिट्टी के नमूने एकत्र करना

पर्सिवरेंस रोवर मंगल ग्रह की चट्टानों के कोर सैंपल और रेगोलिथ के नमूने एकत्र कर रहा है।

कोर सैंपल चट्टान के अंदरूनी हिस्से से निकाला गया अपेक्षाकृत बेलनाकार नमूना होता है। इसके अध्ययन से वैज्ञानिक चट्टान की आंतरिक संरचना और उसके निर्माण से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

रेगोलिथ (Regolith) किसी खगोलीय पिंड की सतह पर मौजूद टूटी हुई चट्टानों, धूल और मिट्टी जैसे पदार्थों की परत को कहा जाता है।

इन नमूनों को विशेष ट्यूबों में सुरक्षित रखा जाता है। भविष्य में प्रस्तावित नमूना-वापसी मिशनों के माध्यम से इन्हें पृथ्वी पर लाने की योजना का उद्देश्य वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में अधिक विस्तृत विश्लेषण करना है।

पृथ्वी पर उपलब्ध अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में उन पदार्थों की भी जाँच की जा सकती है, जिनका विश्लेषण रोवर के सीमित उपकरणों से करना संभव नहीं है।

इस प्रकार, नमूने एकत्र करना मंगल ग्रह पर जीवन के संभावित संकेतों की खोज में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पर्सिवरेंस की प्रमुख वैज्ञानिक खोजें

मंगल ग्रह पर अपने शुरुआती पाँच वर्षों के दौरान पर्सिवरेंस ने विभिन्न भूवैज्ञानिक संरचनाओं से दो दर्जन से अधिक विविध प्रकार के चट्टानी नमूने एकत्र किए।

इन नमूनों से वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह के प्राचीन पर्यावरण, पानी की उपस्थिति और चट्टानों के निर्माण से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिली।

चेयावा फॉल्स चट्टान और सैफायर कैन्यन नमूना

2024 की गर्मियों में पर्सिवरेंस ने चेयावा फॉल्स (Cheyava Falls) नाम से पहचानी गई एक चट्टान का अध्ययन किया। इस चट्टान से प्राप्त सैफायर कैन्यन (Sapphire Canyon) नमूने में वैज्ञानिकों को ऐसे संकेत मिले, जिनमें अतीत में पानी की उपस्थिति, कार्बनिक पदार्थ और संभावित रासायनिक प्रतिक्रियाओं से संबंधित विशेषताएँ शामिल थीं।

इन विशेषताओं ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि पृथ्वी पर कुछ समान रासायनिक प्रक्रियाएँ सूक्ष्मजीवी जीवन से संबंधित हो सकती हैं।

हालाँकि, किसी चट्टान में कार्बनिक पदार्थों का मिलना या जीवन से संबंधित संभावित संकेत दिखाई देना इस बात का निर्णायक प्रमाण नहीं है कि वहाँ वास्तव में जीवन मौजूद था। ऐसे पदार्थ गैर-जैविक प्रक्रियाओं से भी बन सकते हैं।

दी गई जानकारी के अनुसार, सितंबर 2025 में वैज्ञानिक निष्कर्षों की समीक्षा और जाँच के बाद इन परिणामों से संबंधित अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature में प्रकाशित हुआ।

इन निष्कर्षों का महत्व इस बात में है कि मंगल ग्रह पर संभावित प्राचीन जैविक गतिविधियों की खोज के लिए एक नया वैज्ञानिक आधार मिला है। फिर भी, मंगल ग्रह पर जीवन की वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि के लिए और अधिक प्रमाण तथा विस्तृत अध्ययन आवश्यक हैं।

नया रिकॉर्ड बनाते समय पर्सिवरेंस कहाँ जा रहा था?

पर्सिवरेंस ने यह रिकॉर्ड मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर के पश्चिमी किनारे के पास स्थित लैक डे शार्म (Lac de Charmes) नामक क्षेत्र से गुजरते हुए बनाया। रोवर इडुबी (Idubi) नामक क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था।

वैज्ञानिक इस इलाके में सौरमंडल के अत्यंत प्राचीन भूभागों का अध्ययन कर रहे हैं। मंगल ग्रह की कुछ चट्टानें इतनी पुरानी हैं कि पृथ्वी पर उनकी समान आयु वाली भूवैज्ञानिक संरचनाएँ अपरदन और प्लेट विवर्तनिकी जैसी प्रक्रियाओं के कारण काफी हद तक बदल चुकी हैं या नष्ट हो चुकी हैं।

मंगल ग्रह पर पृथ्वी जैसी सक्रिय वैश्विक प्लेट विवर्तनिकी प्रणाली नहीं है। इसलिए वहाँ कुछ प्राचीन भूवैज्ञानिक संरचनाएँ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती हैं।

वैज्ञानिक इडुबी क्षेत्र में प्राचीन हाइड्रोथर्मल प्रणालियों के संकेत खोजने की उम्मीद कर रहे हैं। हाइड्रोथर्मल प्रणाली वह व्यवस्था है जिसमें गर्म पानी चट्टानों के भीतर से गुजरता है और खनिजों तथा रासायनिक पदार्थों के साथ प्रतिक्रिया करता है।

पृथ्वी पर ऐसी प्रणालियाँ कुछ सूक्ष्मजीवों के लिए ऊर्जा और रासायनिक पदार्थ उपलब्ध करा सकती हैं। इसलिए मंगल ग्रह पर इनके प्राचीन संकेत मिलना वहाँ के संभावित जीवन और पर्यावरण को समझने में सहायक हो सकता है।

ऑटोनैव तकनीक ने रिकॉर्ड बनाने में कैसे मदद की?

पर्सिवरेंस की लंबी दूरी तय करने की क्षमता में ऑटोनैव (AutoNav) नामक स्वचालित नेविगेशन प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मंगल ग्रह पर रोवर को पृथ्वी से सीधे और लगातार नियंत्रित करना कठिन होता है, क्योंकि पृथ्वी और मंगल के बीच बहुत अधिक दूरी है। रेडियो संकेतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने में समय लगता है। इसलिए प्रत्येक छोटे अवरोध के लिए पृथ्वी से निर्देश प्राप्त करना व्यावहारिक नहीं है।

ऑटोनैव रोवर को अपने आसपास के क्षेत्र का आकलन करके स्वयं सुरक्षित मार्ग चुनने में सहायता करता है।

इस प्रक्रिया में रोवर के कैमरे आसपास की सतह की तस्वीरें लेते हैं। इसके बाद प्रणाली चट्टानों, गड्ढों और अन्य संभावित बाधाओं की पहचान करके इलाके का त्रि-आयामी मानचित्र तैयार करती है।

पृथ्वी पर मौजूद मिशन योजनाकार रोवर के लिए कुछ लक्ष्य बिंदु निर्धारित करते हैं। ऑटोनैव इन बिंदुओं तक पहुँचने के लिए रास्ते की योजना बनाता है और रास्ते में आने वाली बाधाओं से बचने का प्रयास करता है।

नासा की टीम इस क्षमता को “ड्राइविंग करते समय सोचना” कहती है। इसका अर्थ यह है कि रोवर केवल पहले से तय निर्देशों का पालन नहीं करता, बल्कि यात्रा के दौरान अपने आसपास के वातावरण का विश्लेषण भी करता है।

एक सोल में 412 मीटर तक चलने की क्षमता

पर्सिवरेंस अनुकूल परिस्थितियों में एक मंगल दिवस में 1,351 फीट यानी लगभग 412 मीटर तक की दूरी तय कर सकता है।

यह क्षमता वैज्ञानिकों के लिए उपयोगी है, क्योंकि इससे रोवर कम समय में अधिक क्षेत्रों का अध्ययन कर सकता है। हालाँकि, वास्तविक दूरी सतह की कठिनाई, चट्टानों की स्थिति, ढलान, सुरक्षा आवश्यकताओं और वैज्ञानिक कार्यों पर निर्भर करती है।

रोवर की गति बढ़ाने का अर्थ केवल अधिक दूरी तय करना नहीं है। उसे अपने वैज्ञानिक उपकरणों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होती है और ऐसे क्षेत्रों में सावधानी से आगे बढ़ना पड़ता है जहाँ चट्टानें या ढीली मिट्टी उसकी गति को प्रभावित कर सकती हैं।

ऑटोनैव जैसी प्रणालियाँ इन चुनौतियों से निपटने में सहायता करती हैं और भविष्य के ग्रह-अन्वेषण अभियानों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी अनुभव प्रदान करती हैं।

ऑपर्च्युनिटी और क्यूरियोसिटी रोवर से तुलना

पर्सिवरेंस से पहले नासा के ऑपर्च्युनिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर 45.16 किलोमीटर की दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया था। ऑपर्च्युनिटी ने वर्ष 2004 से 2018 तक मंगल ग्रह का अन्वेषण किया।

वहीं, क्यूरियोसिटी रोवर वर्ष 2012 में मंगल ग्रह पर उतरा था और गेल क्रेटर के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। दी गई जानकारी के अनुसार, उसने अब तक लगभग 38.15 किलोमीटर की दूरी तय की है।

नासा के मंगल रोवर कार्यक्रम में प्रत्येक नई पीढ़ी के वाहन ने पहले के मिशनों से प्राप्त अनुभव का उपयोग किया है।

  • सोजर्नर (Sojourner): मंगल ग्रह पर रोबोटिक सतह-अन्वेषण के शुरुआती चरण का महत्वपूर्ण रोवर।

  • स्पिरिट (Spirit): मंगल ग्रह की चट्टानों और भूवैज्ञानिक इतिहास का अध्ययन करने वाला रोवर।

  • ऑपर्च्युनिटी (Opportunity): लंबे समय तक सक्रिय रहने और उल्लेखनीय दूरी तय करने वाला रोवर।

  • क्यूरियोसिटी (Curiosity): मंगल ग्रह के पर्यावरण और उसकी प्राचीन रहने योग्य परिस्थितियों का अध्ययन करने वाला रोवर।

  • पर्सिवरेंस (Perseverance): प्राचीन जीवन के संभावित संकेतों की खोज और भविष्य के अध्ययन के लिए नमूने एकत्र करने वाला रोवर।

इन मिशनों ने मंगल ग्रह पर सुरक्षित यात्रा, स्वचालित नेविगेशन और वैज्ञानिक अनुसंधान की क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाया है।

चंद्रमा पर दूरी तय करने के पुराने रिकॉर्ड

दूसरे खगोलीय पिंडों पर वाहन चलाने का इतिहास केवल मंगल ग्रह तक सीमित नहीं है। चंद्रमा पर भी अंतरिक्ष यात्रियों और रोबोटिक वाहनों ने उल्लेखनीय दूरी तय की है।

वर्ष 1972 में अपोलो-17 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों यूजीन सर्नन और हैरिसन श्मिट ने चंद्रमा की सतह पर लगभग 35.7 किलोमीटर की दूरी तय की थी।

इसके बाद सोवियत संघ के लूनोखोद-2 (Lunokhod 2) रोवर ने वर्ष 1973 में चंद्रमा पर लगभग 39 किलोमीटर की दूरी तय की।

पर्सिवरेंस द्वारा तय की गई 45.22 किलोमीटर की दूरी इन दोनों ऐतिहासिक चंद्र अभियानों की बताई गई दूरियों से अधिक है। हालांकि, अलग-अलग खगोलीय पिंडों पर चलने वाले वाहनों की परिस्थितियाँ, तकनीक और मिशन उद्देश्य अलग होते हैं, इसलिए उनकी तुलना करते समय इन अंतरों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

नासा ने पर्सिवरेंस मिशन को 2028 तक बढ़ाया

नासा ने हाल ही में पर्सिवरेंस के मिशन को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। योजना के अनुसार, रोवर लगभग 2028 के अंत तक मंगल ग्रह के क्रेटर के किनारे वाले क्षेत्रों का अन्वेषण जारी रख सकता है।

इस विस्तारित अवधि में वैज्ञानिकों को अधिक प्राचीन चट्टानों का अध्ययन करने, नए नमूने एकत्र करने और मंगल ग्रह के भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने के अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।

मिशन की सफलता रोवर की तकनीकी स्थिति, ऊर्जा उपलब्धता, वैज्ञानिक उपकरणों की कार्यक्षमता और मंगल ग्रह की सतह पर मौजूद परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

पर्सिवरेंस का नया दूरी रिकॉर्ड केवल एक वाहन की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह रोबोटिक अन्वेषण, स्वचालित नेविगेशन और ग्रह-विज्ञान के क्षेत्र में हुई प्रगति को भी दर्शाता है। इसके द्वारा एकत्र किए जा रहे नमूने भविष्य में इस प्रश्न का उत्तर खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि क्या पृथ्वी के अलावा मंगल ग्रह पर भी कभी जीवन मौजूद था।

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