प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme—NSAP) को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का व्यय निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही, इस योजना का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ (Pradhan Mantri Samajik Sahayata Yojana) करने का निर्णय लिया गया है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विशेषकर वृद्ध व्यक्तियों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और ऐसे परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जिन्हें नियमित आय के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं।
योजना के नाम में बदलाव के साथ कुछ पेंशन योजनाओं के नाम, दिव्यांगजन पेंशन की सहायता राशि और पात्रता संबंधी प्रावधानों में भी संशोधन किए जाने की घोषणा की गई है। इन बदलावों का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाना और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सहायता पहुंचाना है।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1995 में
भारत सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1995 में एक पूर्णतः केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में की थी। इसका उद्देश्य देश के गरीब और असहाय नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना था।
यह कार्यक्रम भारतीय संविधान में दिए गए कल्याणकारी राज्य के सिद्धांतों के अनुरूप शुरू किया गया था। इन सिद्धांतों के अनुसार, राज्य का दायित्व है कि वह अपनी आर्थिक क्षमता और विकास के स्तर के अनुरूप जरूरतमंद नागरिकों को सहायता उपलब्ध कराए।
इस योजना के अंतर्गत ऐसे व्यक्तियों और परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनके पास अपनी आजीविका चलाने के लिए पर्याप्त नियमित आय नहीं है और जो परिवार के सदस्यों या अन्य स्रोतों से भी पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
इस प्रकार, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को वृद्धावस्था, विधवापन, दिव्यांगता और परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु जैसी परिस्थितियों में सहायता प्रदान की जाती है।
भारतीय संविधान में सामाजिक सहायता का प्रावधान
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का आधार भारतीय संविधान के राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में निहित है। ये सिद्धांत सरकार को सामाजिक और आर्थिक न्याय पर आधारित कल्याणकारी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा प्रदान करते हैं।
अनुच्छेद 41 के अनुसार, राज्य अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमाओं के भीतर बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी, दिव्यांगता तथा अन्य अभाव की परिस्थितियों में नागरिकों को सार्वजनिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रभावी प्रावधान करेगा।
इसके अतिरिक्त, संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची में सामाजिक सुरक्षा, सामाजिक बीमा, दिव्यांगजन और वृद्धावस्था पेंशन से संबंधित विषयों को शामिल किया गया है।
समवर्ती सूची के अंतर्गत केंद्र और राज्य दोनों सरकारें संबंधित विषयों पर कानून बना सकती हैं, बशर्ते वे संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हों।
इन्हीं संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप केंद्र सरकार ने वर्ष 1995 में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम शुरू किया, ताकि जरूरतमंद लोगों को न्यूनतम वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का उद्देश्य और प्रशासन
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य ऐसे लोगों को बुनियादी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, जिनके पास आजीविका के पर्याप्त साधन नहीं हैं।
यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) द्वारा प्रशासित किया जाता है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों की पहचान और पात्रता निर्धारित करने में राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यह एक केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम है, जिसमें निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के विभिन्न हिस्सों में पात्र लाभार्थियों को सामाजिक सहायता की सुविधा उपलब्ध हो।
समय के साथ इस कार्यक्रम में विभिन्न बदलाव किए गए हैं। इनमें योजनाओं की संरचना, पात्रता की शर्तें और वित्तपोषण से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की प्रमुख योजनाएं
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन, परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु पर आर्थिक सहायता और पात्र वरिष्ठ नागरिकों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाएं शामिल रही हैं।
1. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS)
इस योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले पात्र वृद्ध व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
पहले निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, 60 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को केंद्र सरकार की ओर से 200 रुपये प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 500 रुपये प्रति माह की सहायता दी जाती थी।
वृद्धावस्था में नियमित आय के साधन कम हो सकते हैं और स्वास्थ्य, भोजन तथा दैनिक आवश्यकताओं पर खर्च बढ़ सकता है। ऐसे में पेंशन जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों के लिए आर्थिक सहायता का एक महत्वपूर्ण साधन है।
नई घोषणा के अंतर्गत इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना (Pradhan Mantri Vridhavastha Pension Yojana) किया जाएगा। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वृद्धावस्था पेंशन योजना अन्य संशोधित प्रावधानों के बावजूद अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेगी।
2. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (IGNWPS)
इस योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली पात्र विधवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
पहले के प्रावधानों के अनुसार, 40 से 79 वर्ष की आयु की पात्र विधवाओं को केंद्र सरकार की ओर से 300 रुपये प्रति माह की सहायता दी जाती थी। 80 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र विधवाओं के लिए यह सहायता 500 रुपये प्रति माह थी।
पति की मृत्यु के बाद कई महिलाओं को परिवार की आय में कमी, घरेलू खर्चों और आजीविका से संबंधित कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। यह पेंशन ऐसी परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का उद्देश्य रखती है।
नई घोषणा के अनुसार, इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना (Pradhan Mantri Vidhawa Pension Yojana) किया जाएगा। योजना की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने की बात कही गई है।
3. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगजन पेंशन योजना (IGNDPS)
इस योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले गंभीर और बहु-दिव्यांगता से प्रभावित पात्र व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
पहले के प्रावधानों के अनुसार, 18 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को 300 रुपये प्रति माह तथा 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 500 रुपये प्रति माह की केंद्रीय सहायता दी जाती थी।
नई घोषणा में दिव्यांगजन पेंशन योजना के अंतर्गत सहायता राशि और पात्रता की शर्तों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, 79 वर्ष तक की आयु के पात्र लाभार्थियों को 375 रुपये प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 625 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, दिव्यांगता के निर्धारित प्रतिशत और न्यूनतम आयु से संबंधित शर्तों में भी बदलाव किया गया है, जिससे अधिक दिव्यांगजन इस योजना के दायरे में आ सकेंगे।
इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना (Pradhan Mantri Divyangjan Pension Yojana) किया जाएगा।
4. राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना (NFBS)
राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का उद्देश्य ऐसे गरीब परिवारों को एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिनके मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु हो जाती है।
पहले के प्रावधानों के अनुसार, गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले पात्र परिवारों को उस स्थिति में 20,000 रुपये की एकमुश्त सहायता दी जाती थी, जब परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु 18 से 59 वर्ष की आयु के बीच हो जाती थी।
परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु से परिवार की आय अचानक समाप्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में भोजन, शिक्षा, आवास और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करना कठिन हो जाता है।
इस योजना का उद्देश्य प्रभावित परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वह संकट की स्थिति में अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुछ आर्थिक सहारा प्राप्त कर सके।
नई घोषणा के अनुसार, इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना (Pradhan Mantri Parivar Labh Yojana) किया जाएगा।
5. अन्नपूर्णा योजना
अन्नपूर्णा योजना का उद्देश्य ऐसे पात्र वरिष्ठ नागरिकों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है, जो वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत पात्र होने के बावजूद वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त नहीं कर रहे हैं।
पहले के प्रावधानों के अनुसार, ऐसे पात्र वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह 10 किलोग्राम खाद्यान्न निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता था।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्गों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिनके पास नियमित आय का पर्याप्त साधन नहीं है और जो पेंशन का लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।
योजना में घोषित प्रमुख बदलाव
केंद्र सरकार की नई घोषणा में योजना के नाम, दिव्यांगजन पेंशन की सहायता राशि और पात्रता संबंधी कुछ शर्तों में संशोधन शामिल हैं।
प्रमुख बदलाव निम्नलिखित हैं:
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राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना किया जाएगा।
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वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना होगा।
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विधवा पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना होगा।
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दिव्यांगजन पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना होगा।
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राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना होगा।
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दिव्यांगजन पेंशन की सहायता राशि 79 वर्ष तक की आयु के पात्र लाभार्थियों के लिए 375 रुपये प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए 625 रुपये प्रति माह निर्धारित की गई है।
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दिव्यांगता के लिए आवश्यक न्यूनतम निर्धारित प्रतिशत को 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने की घोषणा की गई है।
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दिव्यांगजन पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त हटाई जाएगी, जिससे जन्म से ही पात्रता की अन्य शर्तें पूरी करने वाले दिव्यांगजन सहायता के दायरे में आ सकेंगे।
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वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी।
दिव्यांगजन पेंशन की सहायता राशि में वृद्धि
दिव्यांगजन पेंशन योजना में सहायता राशि का संशोधन नई घोषणा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पहले के प्रावधानों के अनुसार, पात्र लाभार्थियों को 300 रुपये प्रति माह की केंद्रीय सहायता मिलती थी, जबकि 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 500 रुपये प्रति माह दिए जाते थे।
संशोधित व्यवस्था के अंतर्गत 79 वर्ष तक के पात्र लाभार्थियों के लिए यह राशि 375 रुपये प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए 625 रुपये प्रति माह होगी।
इस बदलाव का उद्देश्य दिव्यांगजन को कुछ अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। दिव्यांगता के कारण कुछ लोगों को दैनिक जीवन, आवागमन, उपचार, देखभाल और अन्य आवश्यकताओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यहां बताई गई राशि केंद्रीय सहायता से संबंधित है। यदि राज्य सरकारें अपनी ओर से अतिरिक्त सहायता प्रदान करती हैं, तो लाभार्थियों को मिलने वाली कुल राशि अलग हो सकती है।
दिव्यांगता की पात्रता सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत
नई घोषणा के अनुसार, दिव्यांगजन पेंशन योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत की जाएगी।
बेंचमार्क दिव्यांगता का अर्थ निर्धारित कानूनी मानदंडों के अनुसार प्रमाणित दिव्यांगता से है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में बेंचमार्क दिव्यांगता के लिए कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रावधान किया गया है।
पहले की व्यवस्था में 80 प्रतिशत दिव्यांगता की शर्त होने से कम प्रतिशत की दिव्यांगता वाले कई व्यक्ति इस विशेष पेंशन योजना के दायरे से बाहर रह सकते थे।
सीमा को 40 प्रतिशत करने से पात्रता का दायरा बढ़ने की संभावना है। इससे अधिक दिव्यांगजन सामाजिक सुरक्षा सहायता के लिए पात्र हो सकते हैं।
यह बदलाव दिव्यांगजन के अधिकारों और सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका उद्देश्य केवल अत्यधिक गंभीर दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों तक सहायता सीमित रखने के बजाय निर्धारित कानूनी मानदंडों के अनुसार अधिक लोगों को शामिल करना है।
दिव्यांगजन पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त समाप्त
नई घोषणा में दिव्यांगजन पेंशन योजना के लिए न्यूनतम आयु की शर्त हटाने का भी प्रावधान किया गया है।
पहले की व्यवस्था में इस योजना के अंतर्गत पात्रता के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष थी। संशोधित व्यवस्था में इस शर्त को हटाने का उद्देश्य जन्म से ही दिव्यांगता से प्रभावित पात्र व्यक्तियों को सहायता के दायरे में लाना है।
इस बदलाव से बच्चों सहित विभिन्न आयु वर्गों के दिव्यांगजन को लाभ मिल सकता है, बशर्ते वे योजना की अन्य पात्रता संबंधी शर्तें पूरी करते हों।
दिव्यांगता से संबंधित आवश्यकताओं में चिकित्सा, देखभाल, पुनर्वास, शिक्षा और दैनिक गतिविधियों में सहायता शामिल हो सकती है। ऐसे में सामाजिक सहायता की व्यवस्था परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में योगदान दे सकती है।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 से संबंध
दिव्यांगजन पेंशन योजना में प्रस्तावित बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के प्रावधानों के अनुरूप बताए गए हैं।
यह अधिनियम दिव्यांगजनों के अधिकारों, समान अवसरों, गैर-भेदभाव और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
इस अधिनियम के अंतर्गत बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है। साथ ही, अधिनियम की धारा 24 के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संबंध में ऐसे प्रावधान हैं, जिनका उद्देश्य दिव्यांगजनों को समान श्रेणी के अन्य लाभार्थियों की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत अधिक सहायता प्रदान करना है।
दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता और सहायता राशि में संशोधन का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को इन कानूनी प्रावधानों के अनुरूप बनाना है।
पांच वर्षों के लिए 53,428 करोड़ रुपये का व्यय
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी दी है।
पांच वर्षों के लिए वित्तीय प्रावधान निर्धारित करने से कार्यक्रम के संचालन और पात्र लाभार्थियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए संसाधनों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
इस राशि का उपयोग कार्यक्रम के निर्धारित घटकों और लागू प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। इसके माध्यम से केंद्र सरकार सामाजिक सुरक्षा सहायता की निरंतरता बनाए रखने का प्रयास कर रही है।
योजना की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पात्र लाभार्थियों की पहचान कितनी सही तरीके से होती है, सहायता राशि समय पर मिलती है या नहीं और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं।
देशभर में 3.20 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से देशभर में लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
इन लाभार्थियों में वृद्ध व्यक्ति, विधवाएं, दिव्यांगजन और परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु से प्रभावित पात्र परिवार शामिल हो सकते हैं।
सामाजिक सहायता कार्यक्रम का महत्व इसलिए अधिक है, क्योंकि यह उन लोगों को वित्तीय सहारा देने का प्रयास करता है, जिनके पास नियमित आय के पर्याप्त साधन नहीं होते।
वृद्धावस्था, दिव्यांगता या परिवार में कमाने वाले सदस्य की मृत्यु जैसी परिस्थितियों में नियमित आर्थिक सहायता से भोजन, दैनिक आवश्यकताओं और अन्य बुनियादी खर्चों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
संशोधित प्रावधानों को लागू करने की समय-सीमा
सरकार की घोषणा के अनुसार, दिव्यांगजन पेंशन योजना के अंतर्गत संशोधित पात्रता मानदंड, लाभार्थियों का दायरा और सहायता राशि से संबंधित प्रावधान दिशानिर्देश जारी होने के तीन महीने के भीतर लागू किए जाएंगे।
इसका अर्थ है कि नए प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित प्रशासनिक दिशानिर्देश और कार्यान्वयन प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
पात्रता की नई शर्तों को लागू करने के लिए लाभार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की जांच और भुगतान संबंधी व्यवस्थाओं को अद्यतन करने जैसे कार्य आवश्यक हो सकते हैं।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र लोगों को संशोधित व्यवस्था के अंतर्गत सहायता मिल सके और योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी राज्य की दिशा में महत्व
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना करना और इसके कुछ प्रावधानों में संशोधन करना सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव है।
इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को न्यूनतम वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे जीवन की कठिन परिस्थितियों में कुछ आर्थिक सुरक्षा प्राप्त कर सकें।
विशेष रूप से दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता सीमा को 40 प्रतिशत करना और न्यूनतम आयु की शर्त हटाना सहायता के दायरे को विस्तृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
हालांकि, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सफलता केवल बजट या घोषणा पर निर्भर नहीं करती। लाभार्थियों की सही पहचान, समय पर भुगतान, पारदर्शिता और स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन भी आवश्यक हैं।
इस प्रकार, प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के माध्यम से केंद्र सरकार का उद्देश्य वृद्ध व्यक्तियों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था को आगे जारी रखना है।