संयुक्त राज्य अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court—ICC) पर संस्थागत प्रतिबंध लगाए हैं। यह घोषणा 9 अक्टूबर 2026 को ICC की पूर्व न्यायाधीश नवनितम ‘नवी’ पिल्लै (Navanethem “Navi” Pillay) को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के कुछ घंटों बाद की गई।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने कहा कि यदि ICC अमेरिकी नागरिकों के लिए खतरा मानी जाने वाली अपनी गतिविधियों को समाप्त नहीं करता है, तो अमेरिका इस न्यायालय को “ईंट-दर-ईंट ध्वस्त” करने की दिशा में कदम उठाएगा।
अमेरिका ICC का सदस्य नहीं है। अमेरिकी प्रशासन ने इस न्यायालय की गतिविधियों पर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता प्रभावित हो सकती है। यह निर्णय ICC के 13 स्वतंत्र न्यायाधीशों और अभियोजकों के खिलाफ पहले की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के बाद आया है।
ICC ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। न्यायालय ने इसे कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की बुनियाद पर हमला बताया।
ICC के अनुसार, इन प्रतिबंधों का उद्देश्य न्यायालय के कामकाज को बाधित करना तथा उसके लिए कार्य करने वाले या उसके साथ सहयोग करने वाले लोगों को डराना है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह इस प्रकार की कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) ने भी अमेरिकी निर्णय की कड़ी आलोचना की।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) क्या है?
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था है, जिसका उद्देश्य नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और युद्ध अपराध जैसे गंभीर अपराधों के आरोपी व्यक्तियों की जाँच करना तथा उन पर मुकदमा चलाना है।
इस न्यायालय का मुख्यालय हेग (The Hague), नीदरलैंड में स्थित है। ICC का संचालन रोम संविधि (Rome Statute) के अंतर्गत होता है, जिसे वर्ष 1998 में अपनाया गया था। यह संविधि 60 देशों द्वारा अनुसमर्थन किए जाने के बाद वर्ष 2002 में प्रभावी हुई।
रोम संविधि न्यायालय में पीड़ितों के प्रतिनिधित्व, निष्पक्ष सुनवाई और अभियुक्तों के अधिकारों से संबंधित प्रावधान भी करती है। ICC का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से रोम संविधि में उल्लिखित गंभीर अपराधों से लोगों की रक्षा करना है।
वर्तमान में रोम संविधि के 125 देश पक्षकार (State Parties) हैं। भारत ने रोम संविधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और वह ICC का सदस्य भी नहीं है।
ICC के अधिकार क्षेत्र में आने वाले चार प्रमुख अपराध
रोम संविधि के अंतर्गत ICC को चार प्रमुख प्रकार के अपराधों पर अधिकार क्षेत्र प्राप्त है।
1. नरसंहार (Crime of Genocide)
नरसंहार का अर्थ किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट करने के विशेष इरादे से किए गए कृत्यों से है।
इसमें समूह के सदस्यों की हत्या करना या उन्हें गंभीर शारीरिक अथवा मानसिक क्षति पहुँचाना जैसे कृत्य शामिल हो सकते हैं।
2. मानवता के विरुद्ध अपराध (Crimes Against Humanity)
मानवता के विरुद्ध अपराध ऐसे गंभीर कृत्य हैं, जो किसी नागरिक आबादी के विरुद्ध व्यापक या व्यवस्थित हमले के हिस्से के रूप में किए जाते हैं।
रोम संविधि में इस श्रेणी के अंतर्गत 15 प्रकार के कृत्यों का उल्लेख है। इनमें हत्या, बलात्कार, कारावास, जबरन गुमशुदगी, दासता, यौन दासता, यातना, रंगभेद और निर्वासन जैसे अपराध शामिल हैं।
महिलाओं और बच्चों को दासता तथा यौन शोषण का शिकार बनाना भी इन अपराधों के अंतर्गत आ सकता है।
3. युद्ध अपराध (War Crimes)
युद्ध अपराधों में सशस्त्र संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जिनेवा अभिसमयों के गंभीर उल्लंघन शामिल होते हैं।
इसके प्रमुख उदाहरण हैं:
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बाल सैनिकों की भर्ती या युद्ध में उनका उपयोग करना।
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नागरिकों या युद्धबंदियों की हत्या करना अथवा उन्हें यातना देना।
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अस्पतालों और ऐतिहासिक स्मारकों पर जानबूझकर हमला करना।
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धर्म, शिक्षा, कला, विज्ञान या धर्मार्थ कार्यों के लिए समर्पित भवनों को जानबूझकर निशाना बनाना।
4. आक्रामकता का अपराध (Crime of Aggression)
आक्रामकता का अपराध किसी राज्य द्वारा दूसरे राज्य की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र चार्टर के विपरीत सशस्त्र बल का प्रयोग करने से संबंधित है।
हालाँकि, इस अपराध पर ICC के अधिकार क्षेत्र का प्रयोग रोम संविधि में निर्धारित विशेष शर्तों और प्रक्रियाओं के अधीन होता है।
ICC की कार्यप्रणाली
न्यायाधीशों की नियुक्ति
ICC में 18 न्यायाधीश होते हैं। इनका चुनाव रोम संविधि के पक्षकार देशों की सभा (Assembly of States Parties) द्वारा किया जाता है। न्यायाधीशों का कार्यकाल नौ वर्ष का होता है।
स्वयं की पुलिस व्यवस्था का अभाव
ICC के पास अपनी स्वतंत्र पुलिस या गिरफ्तारी करने वाली प्रवर्तन एजेंसी नहीं है। इसलिए उसे आरोपियों की गिरफ्तारी, उन्हें हेग स्थित न्यायालय के हिरासत केंद्र तक पहुँचाने, उनकी संपत्तियों को फ्रीज करने और सजा लागू कराने के लिए विभिन्न देशों के सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
ICC संयुक्त राष्ट्र (UN) का अंग नहीं है, लेकिन दोनों के बीच सहयोग समझौता है।
कुछ परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद किसी मामले या स्थिति को ICC के पास भेज सकती है, जिससे न्यायालय को संबंधित मामले पर अधिकार क्षेत्र प्राप्त हो सकता है।
सदस्य और गैर-सदस्य देशों के साथ सहयोग
ICC विभिन्न क्षेत्रों में संगोष्ठियों, सम्मेलनों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से अपने कामकाज के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। यह रोम संविधि के सदस्य देशों के साथ-साथ गैर-सदस्य देशों से भी सहयोग करता है।
राष्ट्रीय न्यायालयों का पूरक है ICC
ICC राष्ट्रीय न्यायालयों का स्थान नहीं लेता, बल्कि यह अंतिम विकल्प के रूप में कार्य करने वाला न्यायालय (Court of Last Resort) है।
गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों की जाँच करना, आरोपियों पर मुकदमा चलाना और उन्हें दंडित करना प्राथमिक रूप से संबंधित देशों की जिम्मेदारी है।
ICC तभी हस्तक्षेप करता है, जब संबंधित राज्य अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले गंभीर अपराधों के मामले में वास्तविक जाँच और अभियोजन करने में अनिच्छुक हो या ऐसा करने में सक्षम न हो।
न्यायालय के संसाधन सीमित हैं, इसलिए वह एक समय में केवल कुछ मामलों पर ही कार्य कर सकता है। यह अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं के साथ भी सहयोग करता है।
ICC और ICJ में क्या अंतर है?
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) दोनों का मुख्यालय हेग, नीदरलैंड में है, लेकिन इनके उद्देश्य और अधिकार क्षेत्र अलग-अलग हैं।
| आधार | अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) | अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) |
|---|---|---|
| पूरा नाम | International Criminal Court | International Court of Justice |
| मुख्य उद्देश्य | गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपी व्यक्तियों पर मुकदमा चलाना | राज्यों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करना |
| संबंधित पक्ष | व्यक्तिगत आरोपी | मुख्य रूप से संप्रभु राज्य |
| स्थिति | संयुक्त राष्ट्र का अंग नहीं है | संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है |
| कानूनी आधार | रोम संविधि, 1998 | संयुक्त राष्ट्र चार्टर और ICJ संविधि |
| मुख्यालय | हेग, नीदरलैंड | हेग, नीदरलैंड |