भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में क्वाड शेरपाओं की बैठक की मेजबानी की। बैठक का उद्देश्य क्वाड के तहत चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा करना, व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाना और आगामी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की तैयारियों को आगे बढ़ाना था।
बैठक में चारों देशों ने एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। चर्चा में समुद्री एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि एवं सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित क्वाड सहयोग के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया।
क्वाड शेरपाओं की बैठक
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में क्वाड शेरपाओं की बैठक की मेजबानी की।
क्वाड शेरपाओं की बैठक 26 मई को नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद हुई। इसका प्रमुख उद्देश्य विदेश मंत्रियों की बैठक में लिए गए निर्णयों और परिणामों को आगे बढ़ाना तथा अगली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए आवश्यक तैयारियाँ करना था।
बैठक में शेरपाओं ने क्वाड की विभिन्न चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा की और व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।
शेरपा क्या होते हैं?
‘शेरपा’ किसी सरकार या अंतरराष्ट्रीय संगठन के वरिष्ठ प्रतिनिधि होते हैं, जो उच्च-स्तरीय बैठकों और सम्मेलनों की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वे नेताओं या विदेश मंत्रियों की बैठकों के लिए एजेंडा तैयार करने, विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनाने और बैठकों में लिए गए निर्णयों को आगे बढ़ाने में सहायता करते हैं।
क्वाड के संदर्भ में शेरपाओं की भूमिका चारों देशों के बीच नियमित संवाद एवं समन्वय बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
बैठक में चर्चा के प्रमुख क्षेत्र
क्वाड शेरपाओं ने सहयोग के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा की।
प्रमुख विषयों में शामिल रहे—
- समुद्री सुरक्षा।
- अंतरराष्ट्रीय एवं सीमा-पार सुरक्षा।
- आर्थिक समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा।
- महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ।
- साइबर सुरक्षा।
- आतंकवाद-रोधी सहयोग।
- क्षेत्रीय संपर्क एवं बुनियादी ढाँचा।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षमता निर्माण।
इन चर्चाओं का व्यापक उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा, लचीलापन और समृद्धि को बढ़ावा देना है।
क्वाड क्या है?
क्वाड का पूरा नाम Quadrilateral Security Dialogue यानी चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद है।
यह चार देशों का एक अनौपचारिक राजनयिक समूह है—
- भारत
- ऑस्ट्रेलिया
- जापान
- संयुक्त राज्य अमेरिका
क्वाड का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, लचीलापन और समृद्धि को बढ़ावा देना है।
यह किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन के रूप में नहीं, बल्कि चार देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग और रणनीतिक संवाद के मंच के रूप में कार्य करता है।
क्वाड की उत्पत्ति
क्वाड की जड़ें वर्ष 2004 में आई हिंद महासागर भूकंप और सुनामी के बाद शुरू हुए मानवीय सहयोग में देखी जाती हैं।
2004 की हिंद महासागर सुनामी इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक थी। इस आपदा में लगभग ढाई लाख लोगों की जान गई और 14 देशों में लगभग 17 लाख लोग विस्थापित हुए।
इस संकट के बाद भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत के लिए मिलकर काम किया।
चारों देशों ने 40,000 से अधिक आपातकालीन राहतकर्मियों का योगदान दिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रभावित लाखों लोगों की सहायता की।
बाद में यह सहयोग धीरे-धीरे एक व्यापक क्षेत्रीय साझेदारी के रूप में विकसित हुआ और क्वाड का स्वरूप सामने आया।
क्वाड का औपचारिक विकास
क्वाड के चारों देशों के बीच सहयोग समय के साथ लगातार विकसित हुआ।
क्वाड के तहत चारों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक सितंबर 2019 में न्यूयॉर्क में हुई थी।
इसके बाद क्वाड ने उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद को और मजबूत किया।
क्वाड का पहला Leaders’ Summit मार्च 2021 में वर्चुअल रूप से आयोजित किया गया।
इसके बाद नेताओं, विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर नियमित बैठकें होने लगीं।
मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत की अवधारणा
क्वाड की प्रमुख प्राथमिकताओं में ‘Free and Open Indo-Pacific’ यानी ‘मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत’ की अवधारणा शामिल है।
क्वाड देश ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हैं जहाँ—
- अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान हो।
- सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए।
- समुद्री क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनी रहे।
- देशों को स्वतंत्र रूप से आर्थिक गतिविधियाँ करने का अवसर मिले।
- नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
- क्षेत्रीय देशों की क्षमता और लचीलापन बढ़ाया जाए।
समुद्री सुरक्षा में क्वाड की भूमिका
हिंद-प्रशांत क्षेत्र का बड़ा हिस्सा समुद्र से जुड़ा हुआ है। इस कारण समुद्री सुरक्षा क्वाड के सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
क्वाड का मानना है कि समुद्री क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और सुरक्षा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के आर्थिक विकास एवं समृद्धि की आधारशिला हैं।
चारों देश समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय देशों की क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर देते हैं।
समुद्री क्षेत्र में क्षमता निर्माण
क्वाड क्षेत्रीय साझेदार देशों के साथ क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता के माध्यम से सहयोग बढ़ाने का प्रयास करता है।
इसका उद्देश्य—
- समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता बढ़ाना।
- समुद्री गतिविधियों के बारे में जागरूकता मजबूत करना।
- समुद्री संसाधनों के सतत एवं सुरक्षित उपयोग में सहायता करना।
- क्षेत्रीय देशों की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना।
इन प्रयासों को United Nations Convention on the Law of the Sea यानी UNCLOS के अनुरूप आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के खिलाफ सहयोग
क्वाड देश आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद को क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती मानते हैं।
चारों देश विभिन्न प्रकार के सुरक्षा खतरों से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
इसके अलावा वे हिंद-प्रशांत देशों और बहुपक्षीय मंचों के साथ मिलकर आतंकवाद के सभी रूपों का मुकाबला करने के प्रयास करते हैं।
आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा
क्वाड के सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र आर्थिक समृद्धि एवं आर्थिक सुरक्षा भी है।
चारों देश ऐसी आपूर्ति शृंखलाओं और आर्थिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में सहयोग करते हैं जो अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और लचीली हों।
इसका उद्देश्य क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को विभिन्न आर्थिक एवं भू-राजनीतिक जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाना है।
महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियाँ
क्वाड के सहयोग में Critical and Emerging Technologies यानी महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों को विशेष महत्व दिया जाता है।
इस क्षेत्र में सहयोग के माध्यम से चारों देश नई तकनीकों के विकास, सुरक्षित उपयोग और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं।
साइबर सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, दूरसंचार और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियाँ भी इस व्यापक सहयोग का हिस्सा हैं।
वैक्सीन और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग
क्वाड ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा दिया है।
विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन से संबंधित सहयोग को महत्व दिया गया।
क्वाड के व्यापक स्वास्थ्य सहयोग का उद्देश्य महामारी जैसी भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाना और क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना है।
कनेक्टिविटी और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढाँचा
क्वाड देशों का ध्यान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढाँचे के विकास पर भी है।
इसका उद्देश्य क्षेत्रीय देशों को विश्वसनीय एवं टिकाऊ बुनियादी ढाँचे के विकास में सहायता करना है।
इससे व्यापार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
छात्रों और स्टार्टअप के लिए सहयोग
क्वाड देशों ने छात्रों की आवाजाही और शैक्षिक अवसरों को बढ़ावा देने के लिए भी सहयोग किया है।
इसके अलावा स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देना भी क्वाड की प्राथमिकताओं में शामिल है।
इससे युवा नवाचारकर्ताओं, उद्यमियों और तकनीकी क्षेत्र के प्रतिभाशाली लोगों को चारों देशों के बीच सहयोग के अवसर मिल सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन और अन्य वैश्विक चुनौतियाँ
क्वाड का सहयोग केवल सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है।
चारों देश जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य संकट और महामारी जैसी 21वीं सदी की जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए भी मिलकर काम करते हैं।
इसके अलावा निम्न क्षेत्रों में भी सहयोग किया जाता है—
- जलवायु परिवर्तन।
- कैंसर के खिलाफ सहयोग।
- महामारी से निपटना।
- साइबर सुरक्षा।
- महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियाँ।
- आतंकवाद-रोधी प्रयास।
- गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढाँचा।
- क्षेत्रीय क्षमता निर्माण।
नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता
क्वाड देश अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना तथा सभी देशों को समान अवसर प्रदान करना है।
विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री कानूनों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान क्वाड की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।
भारत के लिए क्वाड का महत्व
भारत के लिए क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक एवं कूटनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है।
इसके माध्यम से भारत को—
- समुद्री सुरक्षा मजबूत करने,
- क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने,
- महत्वपूर्ण तकनीकों में साझेदारी विकसित करने,
- आपूर्ति शृंखला को अधिक लचीला बनाने,
- आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने,
- आपदा राहत एवं मानवीय सहायता में समन्वय करने,
- आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने
का अवसर मिलता है।
हालिया क्वाड शेरपाओं की बैठक का महत्व
3 सितंबर 2026 की नई दिल्ली बैठक ने क्वाड के भीतर नियमित उच्च-स्तरीय संवाद और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शेरपाओं ने पहले से चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा की और भविष्य के सहयोग की दिशा पर चर्चा की। बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य अगली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए आधार तैयार करना भी था।
इससे स्पष्ट होता है कि क्वाड अब केवल रणनीतिक संवाद का मंच न रहकर स्वास्थ्य, तकनीक, जलवायु, कनेक्टिविटी, आर्थिक सुरक्षा और समुद्री सहयोग जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| बैठक | क्वाड शेरपाओं की बैठक |
| तारीख | 3 सितंबर 2026 |
| स्थान | नई दिल्ली |
| मेजबान | भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री |
| क्वाड के सदस्य | भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका |
| क्वाड का पूरा नाम | Quadrilateral Security Dialogue |
| प्रकृति | अनौपचारिक राजनयिक समूह |
| प्रमुख क्षेत्र | हिंद-प्रशांत |
| 2004 की घटना | हिंद महासागर भूकंप एवं सुनामी |
| पहली क्वाड विदेश मंत्री बैठक | सितंबर 2019, न्यूयॉर्क |
| पहला क्वाड Leaders’ Summit | मार्च 2021, वर्चुअल |
| प्रमुख दृष्टिकोण | मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत |
| प्रमुख सुरक्षा क्षेत्र | समुद्री एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा |
| प्रमुख तकनीकी क्षेत्र | महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ |
| प्रमुख आर्थिक क्षेत्र | आर्थिक समृद्धि एवं सुरक्षा |
| समुद्री कानून | UNCLOS |
| अन्य सहयोग | वैक्सीन, कनेक्टिविटी, स्टार्टअप, जलवायु, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग |
निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित क्वाड शेरपाओं की बैठक ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार किया। बैठक में चल रही पहलों की समीक्षा के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
क्वाड का विकास 2004 की हिंद महासागर सुनामी के दौरान मानवीय सहयोग से शुरू होकर आज एक व्यापक क्षेत्रीय साझेदारी के रूप में हुआ है। वर्तमान में यह समुद्री सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, तकनीक, कनेक्टिविटी और आतंकवाद-रोधी सहयोग तक अनेक क्षेत्रों में सक्रिय है। इसका प्रमुख उद्देश्य एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है।