26वें SCO शिखर सम्मेलन का आयोजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को किर्गिज़ गणराज्य की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 26वीं बैठक में भाग लिया।
यह बैठक SCO के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 2026 में शंघाई सहयोग संगठन अपनी स्थापना की 25वीं वर्षगांठ मना रहा है।
शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव ने की।
शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य
26वें SCO शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं ने बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में नेताओं ने क्षेत्र में:
- शांति।
- सुरक्षा।
- स्थिरता।
- आर्थिक एवं सामाजिक समृद्धि।
- आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला।
- मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक।
- ऊर्जा सहयोग।
- जलवायु परिवर्तन।
- सूचना सहयोग।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई प्रौद्योगिकी।
जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर विचार किया।
नेताओं ने SCO की गतिविधियों में हुई प्रगति की समीक्षा की तथा संगठन की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न पहल एवं प्रस्ताव प्रस्तुत किए।
बिश्केक घोषणा सहित 28 दस्तावेजों को मंजूरी
शिखर सम्मेलन के बाद कुल 28 दस्तावेजों को मंजूरी दी गई।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बिश्केक घोषणा (Bishkek Declaration) थी।
इन दस्तावेजों के माध्यम से SCO के सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, मादक पदार्थ नियंत्रण, सूचना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत रूप देने का प्रयास किया गया।
SCO चार्टर में महत्वपूर्ण संशोधन
शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख निर्णय SCO चार्टर में संशोधन से संबंधित था।
इसके तहत अंग्रेजी भाषा को SCO की आधिकारिक एवं कार्यकारी भाषाओं में शामिल करने को मंजूरी दी गई।
यह निर्णय SCO के कामकाज में अंग्रेजी के उपयोग को औपचारिक मान्यता प्रदान करता है तथा सदस्य देशों के बीच संवाद एवं दस्तावेजी समन्वय को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
सुरक्षा चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए सार्वभौमिक केंद्र
SCO ने ‘Universal Centre for Countering Challenges and Threats to the Security of SCO Member States’ के लिए नियमों को मंजूरी दी।
इस केंद्र का उद्देश्य SCO सदस्य देशों के सामने मौजूद विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति के खतरों से निपटने में सहयोग को मजबूत करना है।
केंद्र के प्रमुख उद्देश्य
- आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग बढ़ाना।
- उग्रवाद और कट्टरपंथ से निपटना।
- संगठित अपराध पर नियंत्रण।
- सीमा-पार अपराधों से मुकाबला।
- सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान।
- सदस्य देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करना।
यह केंद्र SCO के सदस्य देशों के बीच सूचना साझाकरण और संयुक्त कार्रवाई की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग
शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) को भी मंजूरी दी गई।
इसका उद्देश्य सदस्य देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए एक साझा सहयोग मंच उपलब्ध कराना है।
प्रमुख क्षेत्र
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अनुकूलन।
- उत्सर्जन में कमी और जलवायु शमन।
- जलवायु-अनुकूल विकास।
- जलवायु संबंधी प्रौद्योगिकी में सहयोग।
- पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अनुभव एवं ज्ञान साझा करना।
यह समझौता SCO के आर्थिक विकास को जलवायु-सहिष्णु और टिकाऊ विकास से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
SCO एंटी-नारकोटिक्स सेंटर
SCO ने SCO Anti-Narcotics Centre की कार्यकारी समिति के नियमों को भी मंजूरी दी।
इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों के खिलाफ समन्वय को मजबूत करना है।
विशेष रूप से यह केंद्र:
- सीमा-पार मादक पदार्थों की तस्करी।
- मादक पदार्थों से जुड़े संगठित अपराध।
- नार्को-आतंकवाद।
- खुफिया एवं सूचना साझाकरण।
जैसी चुनौतियों से निपटने में सहयोग बढ़ाएगा।
वर्ष 2030 तक मादक पदार्थों की लत से मुकाबले का कार्यक्रम
शिखर सम्मेलन में 2030 तक SCO सदस्य देशों के बीच मादक पदार्थों की लत से मुकाबला करने के लिए सहयोग कार्यक्रम को भी मंजूरी दी गई।
इस पहल का उद्देश्य केवल मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना ही नहीं, बल्कि मादक पदार्थों की मांग और लत की समस्या से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
इससे रोकथाम, जागरूकता, अनुभव साझा करने और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा संरक्षण एवं ऊर्जा दक्षता पर सहयोग
SCO देशों ने ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।
इसके साथ ही ऊर्जा प्रणालियों के विकास में सहयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।
इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि SCO के सदस्य देशों में ऊर्जा संसाधनों के बड़े उत्पादक और उपभोक्ता दोनों शामिल हैं।
ऊर्जा सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में:
- ऊर्जा की बचत।
- ऊर्जा दक्षता में सुधार।
- आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों का विकास।
- ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग।
- सदस्य देशों के अनुभवों का आदान-प्रदान।
शामिल हैं।
सूचना के क्षेत्र में सहयोग
SCO सदस्य देशों की अधिकृत एजेंसियों के बीच सूचना के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) को मंजूरी दी गई।
इसका उद्देश्य संबंधित संस्थाओं के बीच सूचना के आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूत करना है।
यह पहल विशेष रूप से क्षेत्रीय घटनाक्रमों, सुरक्षा चुनौतियों और साझा हितों से जुड़े विषयों पर बेहतर समन्वय में मदद कर सकती है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग
SCO शिखर सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence—AI) के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन को भी मंजूरी दी गई।
AI आधुनिक अर्थव्यवस्था, शासन, उद्योग, सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
SCO के भीतर AI सहयोग का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच:
- AI तकनीक से संबंधित ज्ञान का आदान-प्रदान।
- तकनीकी सहयोग।
- अनुसंधान एवं नवाचार।
- AI के विकास से जुड़े अनुभव साझा करना।
- AI के जिम्मेदार एवं प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना।
जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम — एक नजर में
| क्रम | प्रमुख निर्णय | महत्व |
|---|---|---|
| 1 | SCO चार्टर में संशोधन | अंग्रेजी को आधिकारिक एवं कार्यकारी भाषा के रूप में शामिल करना |
| 2 | सार्वभौमिक सुरक्षा केंद्र | आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध आदि से मुकाबला |
| 3 | जलवायु परिवर्तन MoU | जलवायु अनुकूलन, शमन और तकनीकी सहयोग |
| 4 | SCO Anti-Narcotics Centre | मादक पदार्थों की तस्करी और नार्को-आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग |
| 5 | 2030 तक नशा-विरोधी कार्यक्रम | मादक पदार्थों की लत से मुकाबले के लिए दीर्घकालिक सहयोग |
| 6 | ऊर्जा सहयोग | ऊर्जा संरक्षण, दक्षता एवं ऊर्जा प्रणालियों का विकास |
| 7 | सूचना सहयोग MoU | सदस्य देशों की अधिकृत एजेंसियों के बीच सूचना साझाकरण |
| 8 | AI सहयोग MoU | कृत्रिम बुद्धिमत्ता में तकनीकी एवं नवाचार सहयोग |
भारत के लिए महत्व
भारत SCO का एक महत्वपूर्ण सदस्य है और संगठन के माध्यम से मध्य एशिया, रूस, चीन तथा अन्य सदस्य देशों के साथ बहुपक्षीय संवाद का अवसर प्राप्त करता है।
26वें शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी से आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक और AI जैसे विषयों पर भारत के दृष्टिकोण को SCO मंच पर रखने का अवसर मिला।
विशेष रूप से आतंकवाद, सीमा-पार अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दे भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। SCO के सुरक्षा एवं सूचना-साझाकरण तंत्र को मजबूत करने से इन चुनौतियों के विरुद्ध क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
SCO की 25वीं वर्षगांठ
2026 SCO के लिए 25वीं वर्षगांठ का वर्ष है।
SCO की स्थापना 2001 में हुई थी। पिछले 25 वर्षों में संगठन ने सुरक्षा सहयोग से आगे बढ़कर आर्थिक, ऊर्जा, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय, तकनीकी और मानवीय क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया है।
26वां शिखर सम्मेलन इस विकास की समीक्षा करने और भविष्य में संगठन की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण मंच रहा।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर
प्रश्न 1. 26वां SCO शिखर सम्मेलन 2026 में कहाँ आयोजित हुआ?
उत्तर: बिश्केक, किर्गिज़ गणराज्य।
प्रश्न 2. 26वें SCO शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर: किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव।
प्रश्न 3. 2026 में SCO की कौन-सी वर्षगांठ मनाई गई?
उत्तर: 25वीं वर्षगांठ।
प्रश्न 4. 26वें SCO शिखर सम्मेलन के बाद कितने दस्तावेजों को मंजूरी दी गई?
उत्तर: 28 दस्तावेज।
प्रश्न 5. 26वें SCO शिखर सम्मेलन में प्रमुख घोषणा कौन-सी थी?
उत्तर: बिश्केक घोषणा।
प्रश्न 6. SCO चार्टर में किस भाषा को आधिकारिक एवं कार्यकारी भाषा के रूप में शामिल करने की मंजूरी दी गई?
उत्तर: अंग्रेजी।
प्रश्न 7. SCO का नया सार्वभौमिक सुरक्षा केंद्र किन चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा?
उत्तर: आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और अन्य सीमा-पार सुरक्षा खतरों से।
प्रश्न 8. SCO Anti-Narcotics Centre का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: सीमा-पार मादक पदार्थों की तस्करी और नार्को-आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग मजबूत करना।
प्रश्न 9. SCO सदस्य देशों के बीच नशा-विरोधी सहयोग कार्यक्रम किस वर्ष तक के लिए है?
उत्तर: 2030 तक।
प्रश्न 10. 26वें SCO शिखर सम्मेलन में AI से संबंधित क्या निर्णय लिया गया?
उत्तर: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग के लिए MoU को मंजूरी दी गई।
निष्कर्ष
बिश्केक में आयोजित 26वां SCO शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और समृद्धि के साथ-साथ उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। 28 दस्तावेजों की मंजूरी, SCO चार्टर में अंग्रेजी को आधिकारिक एवं कार्यकारी भाषा के रूप में शामिल करना, सुरक्षा एवं मादक पदार्थ-विरोधी तंत्र को मजबूत करना तथा जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना इस सम्मेलन के प्रमुख परिणाम रहे।