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EVM में वोटों की गिनती के लिए Totaliser पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से राय क्यों मांगी?

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में दर्ज वोटों की गिनती के लिए Totaliser मशीन शुरू करने की संभावना पर विचार करने को कहा है।

इसका उद्देश्य बूथ-वार मतदान पैटर्न की गोपनीयता बनाए रखना और किसी विशेष मतदान केंद्र के मतदाताओं की पहचान होने तथा उन्हें संभावित रूप से डराने या प्रताड़ित करने से रोकना है।

यह मामला वर्ष 2014 का है। उस समय योगेश गुप्ता और इमरान खान ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि किसी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों पर पड़े वोटों को आपस में मिलाकर गिना जाए, ताकि जिन क्षेत्रों में किसी उम्मीदवार को कम समर्थन मिला हो, वहां के मतदाताओं को डराने या प्रताड़ित करने की संभावना कम हो।

Totaliser क्या है?

Totaliser एक ऐसी प्रस्तावित व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य उम्मीदवारों को किसी एक मतदान केंद्र के मतदान पैटर्न का पता लगाने से रोकना है।

वर्तमान व्यवस्था में EVM के वोटों की बूथ-दर-बूथ गिनती की जाती है। इसके विपरीत, Totaliser लगभग 14 मतदान केंद्रों की EVM के वोटों को एक साथ मिलाकर गिनने की सुविधा देता है।

Totaliser को Bharat Electronics Limited (BEL), बेंगलुरु और Electronics Corporation of India Limited (ECIL), हैदराबाद ने विकसित किया है।

यह एक इंटरफेस के रूप में काम करता है, जिसे 14 EVM की एक क्लस्टर की मुख्य Control Unit से जोड़ा जा सकता है। इसके Result Button को दबाने पर उस समूह की सभी EVM में प्रत्येक उम्मीदवार को मिले वोटों की संयुक्त संख्या प्राप्त होती है। इससे किसी विशेष क्षेत्र या बूथ पर किसी उम्मीदवार को मिले वोटों की संख्या अलग से सामने नहीं आती।

सुप्रीम कोर्ट में Totaliser की मांग वाली याचिका क्यों दायर की गई?

वर्ष 2014 में योगेश गुप्ता और इमरान खान ने जनहित याचिका दायर कर मांग की थी कि किसी निर्वाचन क्षेत्र के अलग-अलग मतदान केंद्रों पर पड़े वोटों को मिलाकर गिना जाए।

उनका तर्क था कि इससे उन क्षेत्रों के मतदाताओं को संभावित रूप से डराने या प्रताड़ित करने से बचाया जा सकता है, जहां किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को कम समर्थन मिला हो।

याचिकाकर्ताओं ने अपने तर्क के समर्थन में महाराष्ट्र के बारामती निर्वाचन क्षेत्र का उदाहरण भी दिया था। उन्होंने तत्कालीन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार पर मतदाताओं को कथित रूप से धमकाने का आरोप लगाया था।

आरोप के अनुसार, मतदाताओं को यह कहा गया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के आंकड़ों से मतदान का पैटर्न पता लगाया जा सकता है और यदि उन्होंने संबंधित पार्टी का समर्थन नहीं किया तो उनके क्षेत्र में पानी की आपूर्ति बंद की जा सकती है।

केंद्र सरकार का क्या रुख रहा है?

केंद्र सरकार का रुख ऐतिहासिक रूप से Totaliser के विरोध में रहा है।

वर्ष 2018 में तत्कालीन अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा था कि Totaliser लगाने से वोटों की गिनती शुरू होने से पहले ही डेटा की गोपनीयता भंग होने की संभावना हो सकती है।

केंद्र सरकार ने इससे पहले 2017 में भी Totaliser की मांग को खारिज किया था।

हाल में भी केंद्र ने आशंका जताई कि Totaliser व्यवस्था के कारण वोटों की गिनती से पहले EVM से संबंधित डेटा लीक हो सकता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को इन आशंकाओं पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।

वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा था कि बूथ-वार मतदान पैटर्न की जानकारी से मतदाताओं को डराने की स्थिति उत्पन्न नहीं होती और इस व्यवस्था को रोकने की आवश्यकता नहीं है।

सरकार का तर्क था कि बूथ-वार वोट शेयर की जानकारी से राजनीतिक दल उन क्षेत्रों में अधिक मेहनत कर सकते हैं, जहां उनका समर्थन कम है। इससे वे मतदाताओं तक बेहतर तरीके से पहुंच सकते हैं।

कानून मंत्रालय के एक हलफनामे में यह भी कहा गया था कि तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह ने माना था कि मीडिया की सक्रियता के इस दौर में मतदाताओं को डराने या प्रताड़ित करने की आशंका बड़े पैमाने पर उत्पन्न नहीं हो सकती।

चुनाव आयोग का क्या रुख है?

निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) लगातार Totaliser व्यवस्था शुरू करने के समर्थन में रहा है।

चुनाव आयोग ने पहली बार 2008 में UPA सरकार के सामने Totaliser लागू करने का सुझाव दिया था।

वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनाव आयोग ने कहा था कि वोटों की गिनती के लिए Totaliser लागू करने का समय आ गया है।

वर्तमान सुनवाई में भी चुनाव आयोग ने अपने समर्थन को दोहराया है। आयोग ने कोर्ट को बताया कि वह पहले भी केंद्र सरकार को Totaliser प्रणाली की सिफारिश कर चुका है।

चुनाव आयोग ने मतदाताओं की पहचान और मतदान की गोपनीयता की रक्षा करने के उद्देश्य का समर्थन किया है। हालांकि, आयोग ने इसे लागू करने से जुड़ी कुछ व्यावहारिक और कानूनी चुनौतियों का भी उल्लेख किया है।

इनमें बूथ-वार सत्यापन और VVPAT से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अब क्या कहा?

1 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से EVM में दर्ज वोटों की गिनती के लिए Totaliser प्रणाली लागू करने पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा।

कोर्ट ने विशेष रूप से केंद्र से पूछा कि:

  • Totaliser लागू करने में कोई कानूनी या तकनीकी बाधा है या नहीं।
  • इस व्यवस्था को लागू करने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है या नहीं।
  • Totaliser के माध्यम से वोटों की गिनती करने की प्रक्रिया में क्या कोई व्यावहारिक समस्या होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को भी अपनी प्रस्तावित व्यवस्था केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

वर्तमान व्यवस्था: बूथ-वार वोटों की गिनती
Totaliser व्यवस्था: लगभग 14 बूथों के वोटों की संयुक्त गिनती
पहली सिफारिश: 2008 में चुनाव आयोग द्वारा
सुप्रीम कोर्ट में याचिका: 2014
याचिकाकर्ता: योगेश गुप्ता और इमरान खान
विकासकर्ता: BEL, Bengaluru और ECIL, Hyderabad

Source: The Hindu