भारत ने इंडस जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) द्वारा दिए गए तथाकथित “पॉन्डेज अवॉर्ड” को सिरे से खारिज कर दिया है। यह मामला भारत की जलविद्युत परियोजनाओं में पानी के भंडारण (Pondage) की अधिकतम सीमा से जुड़ा हुआ है। भारत सरकार ने स्पष्ट कहा है कि वह इस पंचाट (Tribunal) को वैध रूप से गठित संस्था नहीं मानती और इसलिए उसके किसी भी फैसले या कार्यवाही को स्वीकार नहीं करेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पहले भी इस “अवैध रूप से गठित” कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसलों को अस्वीकार करता रहा है और वर्तमान निर्णय भी “शून्य और अमान्य” है। साथ ही भारत द्वारा इंडस जल संधि को स्थगित (abeyance) रखने का निर्णय भी अभी लागू रहेगा।
यह विवाद भारत की किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर शुरू हुआ था। पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि इन परियोजनाओं की डिजाइन इंडस जल संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करती है। इसके बाद पाकिस्तान के अनुरोध पर जनवरी 2023 में पांच सदस्यीय कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर सीन डी. मर्फी कर रहे हैं। हालांकि भारत ने शुरुआत से ही इस प्रक्रिया में भाग लेने से इनकार कर दिया। भारत का तर्क है कि यह तकनीकी मामला है, जिसका समाधान विश्व बैंक द्वारा नियुक्त “न्यूट्रल एक्सपर्ट” के माध्यम से होना चाहिए, न कि किसी मध्यस्थ न्यायाधिकरण के जरिए।
मामले में “पॉन्डेज” यानी जल भंडारण की सीमा सबसे बड़ा मुद्दा है। अगस्त 2025 में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने एक निर्णय में पाकिस्तान के पक्ष में फैसला देते हुए भारत की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाओं के लिए पानी संग्रह की गणना पर कई प्रतिबंध लगाए थे। इससे भारत की परियोजनाओं की डिजाइन और संचालन क्षमता प्रभावित हो सकती थी। हाल ही में अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की ओर से अंतरिम राहत और संधि की स्थिति पर तीन दिन तक सुनवाई हुई थी। पाकिस्तान की ओर से वरिष्ठ वकील और अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि भारत ने सुनवाई में भाग नहीं लिया और किसी भी निमंत्रण का जवाब नहीं दिया।
भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इंडस जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मृत्यु हुई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ जल सहयोग को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया। भारत का मानना है कि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देता है और ऐसे माहौल में सामान्य द्विपक्षीय समझौतों को जारी रखना उचित नहीं है। यही कारण है कि भारत अब इंडस जल संधि से जुड़े किसी भी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ फैसले को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा है।