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भारत और कनाडा – CEPA वार्ता का दूसरा दौर संपन्न

भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) पर दूसरे दौर की वार्ता सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह वार्ता 4 से 8 मई 2026 तक नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयोजित की गई। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इसी क्रम में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के 25 मई को कनाडा दौरे पर जाने की संभावना भी जताई जा रही है, जहां वे व्यापार और निवेश सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा कर सकते हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह वार्ता मार्च 2026 में दोनों देशों के व्यापार मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित “टर्म्स ऑफ रेफरेंस” (ToR) के आधार पर आयोजित की गई। 2 मार्च 2026 को ToR पर हस्ताक्षर के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। मंत्रालय ने कहा कि CEPA समझौते से भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संभावनाओं का बड़ा विस्तार होगा। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा था, जिसे आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ाने की योजना है।

दूसरे दौर की वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा हुई। वार्ता में व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इनमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, बौद्धिक संपदा अधिकार, मूल नियम (Rules of Origin), सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी (SPS) उपाय, तथा तकनीकी व्यापार बाधाएं (TBT) जैसे विषय शामिल रहे। दोनों देशों ने संतुलित, महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

समझौते पर अगला यानी तीसरा औपचारिक दौर जुलाई 2026 में कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित किया जाएगा। भारत की ओर से वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा और कनाडा की ओर से ब्रूस क्रिस्टी मुख्य वार्ताकार हैं। तब तक दोनों देश अंतरिम बैठकों और तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रखेंगे ताकि समझौते को शीघ्र अंतिम रूप दिया जा सके।

हालांकि नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और कनाडा के बीच कुल वस्तु व्यापार घटकर 7.92 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कम है। इसका मुख्य कारण कनाडा से भारत के आयात में भारी गिरावट रहा। भारत का निर्यात 10.6 प्रतिशत बढ़कर 4.67 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि कनाडा से आयात 37 प्रतिशत घटकर 3.25 अरब डॉलर रह गया। भारत कनाडा को मुख्य रूप से दवाइयां, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, लोहा एवं इस्पात, रसायन, वस्त्र तथा इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्यात करता है। वहीं कनाडा से भारत मुख्य रूप से दालें, विमान एवं उनके पुर्जे, खनिज, उर्वरक, न्यूजप्रिंट, पल्प और कागज आयात करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि CEPA समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही भारतीय निर्यातकों को कनाडाई बाजार में अधिक अवसर मिलेंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा।

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