परिचय
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) भारत की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना है।
इसे वर्ष 2005 में शुरू किया गया था ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को साल में कम-से-कम 100 दिनों का मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।
लेकिन LibTech India और NREGA संघर्ष मोर्चा की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025–26 में इस योजना के दायरे, रोजगार, कार्यदिवस और मजदूरी आय में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है।
1. रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार:
- योजना में पंजीकृत परिवारों की संख्या बढ़ी
- लेकिन रोजगार पाने वाले परिवार कम हुए
- मजदूरों को मिलने वाले कार्यदिवस घटे
- 100 दिन का रोजगार पूरा करने वाले परिवारों की संख्या तेजी से घटी
- मजदूरों की औसत आय में कमी आई
इसका अर्थ है कि कागज पर योजना का दायरा बढ़ा, लेकिन वास्तविक लाभ कम लोगों तक पहुँचा।
2. Registered Households बढ़े लेकिन रोजगार घटा
आँकड़े
|
वर्ष |
पंजीकृत परिवार |
|---|---|
| 2024–25 | 14.98 करोड़ |
| 2025–26 | 15.46 करोड़ |
यह लगभग 3.2% वृद्धि है।
लेकिन इसके बावजूद:
- 44 लाख कम परिवारों को काम मिला
- 67 लाख कम मजदूरों को रोजगार मिला
इसका क्या अर्थ है?
यह स्थिति बताती है कि:
लोग रोजगार की जरूरत में अधिक संख्या में योजना में जुड़ रहे हैं,
लेकिन सरकार पर्याप्त काम उपलब्ध नहीं करा पा रही।
यह ग्रामीण आर्थिक संकट का संकेत है।
3. Persondays में भारी गिरावट
Persondays क्या होता है?
यदि 100 लोग 1 दिन काम करें = 100 persondays
यह योजना के वास्तविक रोजगार का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होता है।
आँकड़े
| वर्ष | कुल Person days |
|---|---|
| 2024–25 | 268.44 करोड़ |
| 2025–26 | 210.73 करोड़ |
गिरावट = 21.5%
इसका प्रभाव
यह दर्शाता है कि:
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से कम हुए
- मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिला
- ग्रामीण आय प्रभावित हुई
- गरीबी और आर्थिक असुरक्षा बढ़ सकती है
4. प्रति परिवार औसत कार्यदिवस में कमी
| वर्ष | औसत कार्य दिवस |
|---|---|
| 2024–25 | 50.18 दिन |
| 2025–26 | 42.92 दिन |
गिरावट = 14.5%
इसका मतलब
मनरेगा का उद्देश्य 100 दिन का रोजगार देना है।
लेकिन वास्तविकता में:
- औसतन मजदूरों को केवल 43 दिन ही काम मिला
- यानी आधे से भी कम रोजगार
यह योजना की कमजोर कार्यान्वयन क्षमता को दिखाता है।
5. 100 दिन का रोजगार पूरा करने वाले परिवारों में गिरावट
| वर्ष | 100 दिन पूरा करने वाले परिवार |
|---|---|
| 2024–25 | 0.37 करोड़ |
| 2025–26 | 0.22 करोड़ |
गिरावट = 40.5%
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
मनरेगा का मूल उद्देश्य ही 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करना है।
यदि बहुत कम परिवार 100 दिन का रोजगार प्राप्त कर पा रहे हैं, तो इसका मतलब है:
- योजना अपने मूल लक्ष्य से दूर जा रही है
- गरीब परिवारों की आय सुरक्षा कमजोर हो रही है
6. राज्यों की स्थिति
सबसे अधिक गिरावट वाले राज्य
| राज्य | गिरावट |
|---|---|
| तमिलनाडु | 42.8% |
| हरियाणा | 41.7% |
| हिमाचल प्रदेश | 41% |
| तेलंगाना | 40.2% |
जिन राज्यों में वृद्धि हुई
| राज्य | वृद्धि |
|---|---|
| झारखंड | 12.9% |
| जम्मू-कश्मीर | 7.3% |
| ओडिशा | 6.7% |
| मध्य प्रदेश | 0.5% |
पश्चिम बंगाल की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार:
- पश्चिम बंगाल में 2024–25 और 2025–26 दोनों वर्षों में persondays शून्य रहे
- इसलिए इसे तुलना से बाहर रखा गया
यह प्रशासनिक और राजनीतिक विवादों का परिणाम माना जा रहा है।
7. मजदूरी व्यय (Wage Expenditure) में गिरावट
| वर्ष | मजदूरी व्यय |
|---|---|
| 2024–25 | ₹67,835 करोड़ |
| 2025–26 | ₹56,265 करोड़ |
कमी = ₹11,570 करोड़
जबकि मजदूरी दर बढ़ी थी
| वर्ष | औसत दैनिक मजदूरी |
|---|---|
| 2024–25 | ₹252.7 |
| 2025–26 | ₹267 |
फिर भी कुल मजदूरी भुगतान कम हुआ क्योंकि काम के दिन कम हो गए।
8. ग्रामीण परिवारों की आय पर प्रभाव
| वर्ष | औसत आय |
|---|---|
| 2024–25 | ₹12,681 |
| 2025–26 | ₹11,460 |
संभावित आय हानि
LibTech के अनुसार:
यदि persondays पहले जितने रहते, तो:
- मजदूरों को अतिरिक्त ₹15,409 करोड़ मिल सकते थे
- प्रति परिवार संभावित आय ₹13,398 होती
लेकिन वास्तविक आय केवल ₹11,460 रही।
संभावित आय हानि: ₹1,938 प्रति परिवार
9. नई योजना : Viksit Bharat Rozgar Mission
सरकार अब “Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act 2025” लाने जा रही है जो मनरेगा की जगह लेगा।
चिंता क्यों बढ़ी?
रिपोर्ट के अनुसार:
- नई योजना बिना व्यापक जन-परामर्श के लाई गई
- संक्रमण काल के लिए केवल ₹30,000 करोड़ आवंटित किए गए
- इससे ग्रामीण रोजगार सुरक्षा कमजोर हो सकती है
10. विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की चिंता
NREGA संघर्ष मोर्चा ने कहा:
- रोजगार गारंटी कार्यक्रम ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा हैं
- इन योजनाओं में बड़े बदलाव से पहले सार्वजनिक चर्चा आवश्यक है
- सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संक्रमण काल में रोजगार बाधित न हो
11. व्यापक आर्थिक प्रभाव
(1) ग्रामीण मांग में कमी
जब मजदूरों की आय घटती है:
- ग्रामीण बाजार कमजोर पड़ते हैं
- उपभोग कम होता है
- छोटे व्यापार प्रभावित होते हैं
(2) गरीबी बढ़ने का खतरा
मनरेगा संकट के समय गरीब परिवारों की सुरक्षा करता है।
यदि रोजगार कम होगा:
- कर्ज बढ़ सकता है
- पलायन बढ़ सकता है
- खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है
(3) कृषि मजदूरों पर असर
कई ग्रामीण परिवार कृषि के अलावा मनरेगा पर निर्भर रहते हैं।
कम काम मिलने से:
- मजदूरी दबाव बढ़ेगा
- ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ सकती है
12. निष्कर्ष
MGNREGA में 2025–26 के दौरान आई गिरावट केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि:
- रोजगार के अवसर घटे
- मजदूरों की आय कम हुई
- 100 दिन का रोजगार कमजोर पड़ा
- ग्रामीण सुरक्षा तंत्र कमजोर हुआ
यदि नई रोजगार योजना को प्रभावी बनाना है, तो सरकार को:
- पर्याप्त बजट देना होगा
- पारदर्शिता बढ़ानी होगी
- सार्वजनिक परामर्श करना होगा
- ग्रामीण गरीबों की आय सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी
तभी ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा को बनाए रखा जा सकेगा।