प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (WDFC) के तीन महत्वपूर्ण खंड राष्ट्र को समर्पित किए।
इनमें न्यू साणंद (एन)-न्यू मकरपुरा, न्यू उमरगाम-न्यू सफाले तथा न्यू सफाले-न्यू जेएनपीटी खंड शामिल हैं।
इन तीनों खंडों के चालू होने के साथ भारत का 2,843 किलोमीटर लंबा समर्पित माल ढुलाई गलियारा (DFC) नेटवर्क अब अपनी पूरी लंबाई में परिचालित हो गया है।
समर्पित माल ढुलाई अवसंरचना से बहु-माध्यम संपर्क में सुधार, परिवहन समय में कमी और देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच माल की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी। इससे देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
समर्पित माल ढुलाई गलियारों की प्रमुख विशेषताएँ
- रेल मंत्रालय ने दो समर्पित माल ढुलाई गलियारों के निर्माण का कार्य शुरू किया था—पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (EDFC) और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (WDFC)। इन दोनों की कुल लंबाई लगभग 2,843 किलोमीटर है और इनके निर्माण पर कुल ₹1,24,005 करोड़ की लागत आई है।
- समर्पित माल ढुलाई गलियारों के परिचालन से भारत के माल परिवहन नेटवर्क में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। इनसे देश के प्रमुख औद्योगिक, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच अधिक क्षमता वाली, तेज, कुशल और विश्वसनीय रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध हुई है।
- 1,337 किलोमीटर लंबा पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (EDFC) पंजाब के न्यू साहनेवाल से शुरू होकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश से गुजरते हुए बिहार के न्यू सोननगर तक जाता है।
- 1,506 किलोमीटर लंबा पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (WDFC) उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से गुजरते हुए महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक पहुंचता है।
- समर्पित माल ढुलाई गलियारों पर प्रतिदिन औसतन लगभग 443 मालगाड़ियां संचालित होती हैं।
- इन गलियारों ने बेहतर परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया है। माल ढुलाई की मात्रा में लगातार वृद्धि हुई है तथा औसत गति, गाड़ियों के आवागमन की गति और विश्वसनीयता में सुधार हुआ है।
- माल यातायात को पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारों पर स्थानांतरित करने से पारंपरिक रेल नेटवर्क पर अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध हुए हैं।
- इसके परिणामस्वरूप रेलवे अपने नेटवर्क पर अतिरिक्त मालगाड़ियों और यात्री/कोचिंग सेवाओं का संचालन करने में सक्षम हुआ है।
- इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके माध्यम से डबल-स्टैक कंटेनर (डीएससी) ट्रेनों और अधिक भार क्षमता वाली ट्रेनों का संचालन बढ़ेगा।
- पश्चिमी बंदरगाहों के माध्यम से उत्तरी भारत के अंतर्देशीय क्षेत्रों तक तेज पहुंच संभव होगी तथा समर्पित माल ढुलाई गलियारे के साथ उद्योगों के लिए नए टर्मिनल और संपर्क मार्ग विकसित करने में भी सहायता मिलेगी।