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जीआरएसई ने महासागर अनुसंधान पोत ‘सागर मंथन’ का जलावतरण किया

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने 9 सितंबर को कोलकाता स्थित ऋषि बंकिम शिपयार्ड में अत्याधुनिक महासागर अनुसंधान पोत (Ocean Research Vessel—ORV) ‘सागर मंथन का जलावतरण किया। यह पोत भारत की समुद्री एवं ध्रुवीय अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सागर मंथनकी प्रमुख विशेषताएँ

  • सागर मंथनका डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण जीआरएसई द्वारा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए किया गया है।
  • व्यापक समुद्री परीक्षणों के बाद इसे 2028 तक भारतीय अनुसंधान बेड़े में शामिल किए जाने की उम्मीद है।
  • इस पोत की अनुमानित निर्माण लागत लगभग ₹840 करोड़ है।
  • ‘सागर मंथन’ धीरे-धीरे भारत के प्रतिष्ठित 43 वर्ष पुराने महासागर अनुसंधान पोत सागर कन्या का स्थान लेगा। ‘सागर कन्या’ को वर्ष 1983 में जर्मनी से खरीदा गया था और यह लंबे समय से भारत के समुद्री अनुसंधान कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

अत्याधुनिक और बहुउद्देश्यीय अनुसंधान पोत

‘सागर मंथन’ को एक सर्व-मौसम और बहुविषयक अनुसंधान मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसे अत्यधिक कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी लंबे समय तक संचालन के लिए तैयार किया गया है।

यह पोत विशेष रूप से दक्षिणी महासागर सहित अत्यधिक चुनौतीपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य करने में सक्षम होगा। इसकी अनुमानित सेवा अवधि 30 वर्ष होगी।

इस पोत के माध्यम से वैज्ञानिकों को समुद्र की भौतिक, रासायनिक, जैविक और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए एक आधुनिक मंच मिलेगा। यह समुद्री संसाधनों, जलवायु परिवर्तन, महासागरीय पारिस्थितिकी, समुद्री जैव विविधता और ध्रुवीय क्षेत्रों से जुड़े अनुसंधान में भी उपयोगी होगा।

सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन

‘सागर मंथन’ का निर्माण अंतरराष्ट्रीय नियामक मानकों के अनुरूप किया गया है। इसे इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) और अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग (ABS) की दोहरी श्रेणी प्रमाणन व्यवस्था के तहत तैयार किया गया है।

इससे पोत की सुरक्षा, विश्वसनीयता और समुद्री संचालन क्षमता के उच्च मानकों को सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

भारत के लिए महत्व

‘सागर मंथन’ के परिचालन से भारत की महासागर एवं ध्रुवीय अनुसंधान क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। यह भारत को समुद्री विज्ञान, जलवायु अध्ययन, समुद्री पारिस्थितिकी और ध्रुवीय अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं को और मजबूत करने में सहायता करेगा।

यह पोत भारत के आत्मनिर्भर जहाज निर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का भी उदाहरण है, क्योंकि इसका डिजाइन और निर्माण देश में ही किया गया है। इससे समुद्री अनुसंधान के लिए विदेशी पोतों पर निर्भरता कम करने और भारत की स्वदेशी समुद्री अनुसंधान अवसंरचना को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

पोत: सागर मंथन
प्रकार: महासागर अनुसंधान पोत
जलावतरण: 9 सितंबर 2026
स्थान: ऋषि बंकिम शिपयार्ड, कोलकाता
निर्माता: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE)
निर्माण लागत: लगभग ₹840 करोड़
उपयोगकर्ता संस्था: राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR)
संबंधित मंत्रालय: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
अपेक्षित कमीशनिंग: 2028
सेवा अवधि: लगभग 30 वर्ष
जिस पोत का स्थान लेगा: 43 वर्षीय ‘सागर कन्या’
सागर कन्या की खरीद: जर्मनी से, 1983
प्रमाणन: भारतीय पोत-पंजीकरण संस्था (IRS) और अमेरिकी ब्यूरो ऑफ शिपिंग (ABS)
विशेषता: सर्व-मौसम, बहुविषयक महासागर अनुसंधान मंच