Skip to content

डेटा केंद्रों से वैश्विक स्तर पर बिजली प्रणालियों को बढ़ता खतरा

  • संयुक्त राष्ट्र यूरोप के लिए आर्थिक आयोग (UNECE) ने चेतावनी दी है कि डेटा-गहन तकनीकों, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डेटा केंद्रों, का उपयोग बिजली अवसंरचना की क्षमता से अधिक तेजी से बढ़ रहा है।
  • हाइपरस्केल डेटा केंद्रों जैसी डेटा-गहन तकनीकों के तेजी से विस्तार का ऊर्जा प्रणालियों की विश्वसनीयता और लचीलेपन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ रहा है।
  • इसके अलावा, इसका प्रभाव अवसंरचना निवेश, जल और भूमि उपयोग, आर्थिक विकास, डिजिटल संप्रभुता और स्थानीय समुदायों पर भी पड़ रहा है।

मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन

  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, डेटा केंद्रों की बिजली खपत 2030 तक लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है। यह 2025 में 485 टेरावाट-घंटे (TWh) से बढ़कर 2030 में 950 TWh हो सकती है, जो वैश्विक बिजली मांग का लगभग 3 प्रतिशत होगी।
  • दूसरी ओर, दुनिया भर में डेटा केंद्रों की अवसंरचना में निवेश 2050 तक लगभग दोगुना होने का अनुमान है। यह वर्ष 2026 में लगभग 800 अरब डॉलर प्रतिवर्ष से बढ़कर 2050 में लगभग 1.8 ट्रिलियन डॉलर प्रतिवर्ष हो सकता है।
  • UNECE के अनुसार, कई क्षेत्रों में डेटा केंद्र और अन्य ऊर्जा-गहन सुविधाएं उन बिजली ग्रिडों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से विकसित हो रही हैं, जिन्हें उनकी बिजली आवश्यकता पूरी करनी होती है।
  • किसी बड़े डेटा केंद्र को अक्सर 2 से 5 वर्षों में बनाया और बिजली ग्रिड से जोड़ा जा सकता है, लेकिन बिजली पारेषण लाइनों और अन्य ग्रिड अवसंरचना के विस्तार में 10 वर्ष से अधिक समय लग सकता है। इसका कारण लंबी योजना, मंजूरी और निर्माण प्रक्रियाएं हैं।
  • अत्यधिक भार पड़ने से बिजली प्रणालियों में वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, अनपेक्षित बिजली विच्छेदन और एक के बाद एक होने वाली व्यापक विफलताएं हो सकती हैं।
  • कुछ अत्यधिक मामलों में, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर बिजली प्रणालियों में ऐसी समस्याएं पहले से देखी जा रही हैं।
  • एआई आधारित डेटा केंद्रों की बिजली मांग काफी अस्थिर हो सकती है और इसमें अचानक तेज वृद्धि हो सकती है। नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर बिजली ग्रिड वास्तविक समय में ऐसी मांग के अनुरूप तुरंत समायोजन नहीं कर पाते।
  • मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन के कारण कई देशों ने अपने राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क पर अधिक भार पड़ने से रोकने के लिए ऊर्जा-बचत और नियंत्रण संबंधी उपाय किए हैं।
  • दुनिया में डेटा केंद्रों की सबसे अधिक सघनता वाले देशों में से एक आयरलैंड ने डबलिन में नए बिजली कनेक्शनों पर प्रतिबंध लगाए हैं।
  • नीदरलैंड ने यह तय करने के लिए भी प्रतिबंध लगाए हैं कि नए डेटा केंद्र किन स्थानों पर बनाए जा सकते हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़े बिजली उपभोक्ताओं, विशेष रूप से डेटा केंद्रों के कारण 2030 तक विद्युत उपकरणों की मांग और आपूर्ति शृंखला पर काफी दबाव बढ़ने का अनुमान है।

अधिक नियमन और समन्वय की आवश्यकता

  • बड़े डेटा केंद्रों को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए भारी अवसंरचना निवेश की आवश्यकता हो सकती है। लेकिन वर्तमान में ऐसा कोई एक समान ढांचा नहीं है, जो यह स्पष्ट करे कि इन लागतों को डेटा केंद्र विकसित करने वाली कंपनियों, बिजली कंपनियों और उपभोक्ताओं के बीच किस प्रकार बांटा जाए।
  • स्पष्ट नियमों के अभाव में आवश्यक निवेश में देरी हो सकती है।
  • डेटा केंद्रों की स्थान-निर्धारण नीति को लेकर भी नियामक स्तर पर कई कमियां मौजूद हैं।
  • ऊर्जा-गहन सुविधाएं अक्सर ऐसे क्षेत्रों में केंद्रित हो जाती हैं, जहां अच्छी कनेक्टिविटी और अनुकूल नियामक परिस्थितियां उपलब्ध हों। इससे उन स्थानों पर बिजली की मांग अत्यधिक बढ़ सकती है, जबकि स्थानीय बिजली ग्रिड उस अतिरिक्त मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं होते।
  • कम लागत वाली बिजली वाले क्षेत्र बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग सुविधाओं को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन केवल सस्ती बिजली उपलब्ध होना दीर्घकालिक आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं देता

पर्यावरणीय प्रभाव

  • पर्यावरण संबंधी नियमन अब केवल बिजली की खपत तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा केंद्रों के जल उपयोग, उत्सर्जन और स्थानीय संसाधनों पर प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाने लगा है।
  • हालांकि, UNECE का कहना है कि इस संबंध में बनाए गए नियम अभी भी बिखरे हुए और असंगत हैं।
  • नियामकों के पास इस बात की भी पर्याप्त जानकारी नहीं होती कि बड़े डेटा केंद्र वास्तविक समय में कितनी बिजली का उपयोग कर रहे हैं। इससे बिजली ग्रिड पर उनके प्रभाव का पहले से अनुमान लगाना कठिन हो जाता है।

दीर्घकालिक दृष्टिकोण

  • दीर्घकाल में डेटा केंद्रों, विशेष रूप से एआई आधारित डेटा केंद्रों, का मूल्यांकन केवल बिजली ग्रिड की क्षमता और उत्सर्जन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
  • इनके मूल्यांकन में व्यापक आर्थिक प्रभाव, विभिन्न वर्गों पर पड़ने वाले प्रभाव, डिजिटल एवं राष्ट्रीय संप्रभुता तथा पर्यावरणीय प्रभावों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
  • उचित नीतियों के अभाव में देशों को इस जोखिम का सामना करना पड़ सकता है कि वे अपनी सीमित बिजली का उपयोग ऐसे एआई उत्पादों और सेवाओं के लिए करें, जिनसे होने वाला आर्थिक मूल्य किसी अन्य देश या कंपनी को प्राप्त हो, जबकि बुनियादी ढांचे की लागत और श्रम बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव का भार घरेलू स्तर पर उठाना पड़े।
  • कुल मिलाकर, UNECE ने अधिक मजबूत नियमन और बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि तेजी से महत्वपूर्ण बनती जा रही बिजली प्रणालियों की दीर्घकालिक विश्वसनीयता, स्थिरता और लचीलापन सुनिश्चित किया जा सके।