भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम3 के सातवें परिचालन मिशन, अर्थात एलवीएम3-एम7, के लिए निर्धारित सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल हॉट परीक्षण किया है। यह परीक्षण मिशन की तैयारी और इंजन की उड़ान-योग्यता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह परीक्षण इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी), महेंद्रगिरि स्थित मुख्य इंजन एवं चरण परीक्षण सुविधा (एमईटी) में किया गया।
सीई20 क्रायोजेनिक इंजन क्या है?
सीई20 इसरो द्वारा विकसित एक उन्नत क्रायोजेनिक इंजन है, जिसका उपयोग एलवीएम3 के ऊपरी चरण को शक्ति प्रदान करने के लिए किया जाता है।
एलवीएम3 को पहले जीएसएलवी मार्क-3 (GSLV Mk III) के नाम से जाना जाता था। यह वर्तमान में इसरो का सबसे भारी प्रक्षेपण यान है।
क्रायोजेनिक इंजन में अत्यंत निम्न तापमान पर रखे गए तरल ऑक्सीजन (LOX) और तरल हाइड्रोजन (LH2) जैसे प्रणोदकों का उपयोग किया जाता है। ऐसे इंजन उच्च दक्षता प्रदान करते हैं और भारी पेलोड को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
हॉट परीक्षण कैसे किया गया?
किसी भी मिशन के लिए उपयोग किए जाने वाले क्रायोजेनिक इंजन को उड़ान से पहले हॉट परीक्षण से गुजरना पड़ता है। इस परीक्षण में इंजन को वास्तविक संचालन जैसी परिस्थितियों में चलाकर उसके प्रदर्शन और विभिन्न प्रणालियों की विश्वसनीयता की जांच की जाती है।
नोजल सुरक्षा प्रणाली की भूमिका
क्रायोजेनिक इंजन के ऊपरी चरण का नोजल सामान्यतः अधिक ऊंचाई पर संचालन के लिए बनाया जाता है। इसलिए समुद्र-तल की परिस्थितियों में इसका हॉट परीक्षण करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।
इस समस्या के समाधान के लिए इसरो ने नोजल सुरक्षा प्रणाली (NPS) विकसित की है। इसे पहले कई योग्यता परीक्षणों के माध्यम से मान्य किया जा चुका है।
इस प्रणाली की मदद से उड़ान-स्वीकृति परीक्षण के दौरान ऊपरी चरण के इंजन के लिए उड़ान जैसी निर्वात परिस्थितियों का अनुकरण किया जा सकता है। इससे क्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण में लगने वाला समय और प्रयास कम हुआ है।
22 टन के बढ़े हुए थ्रस्ट पर परीक्षण
एलवीएम3 की पेलोड क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भविष्य के मिशनों में इसके सी32 चरण को सीई20 इंजन के लिए 22 टन के बढ़े हुए थ्रस्ट स्तर पर संचालित करने की योजना है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए एलवीएम3-एम7 मिशन के लिए सीई20 इंजन का उड़ान-स्वीकृति परीक्षण 22 टन थ्रस्ट के स्तर पर किया गया।
परीक्षण के दौरान इंजन ने निर्धारित सभी परीक्षण उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इससे इंजन की प्रणालियों के संतोषजनक प्रदर्शन और विश्वसनीयता की पुष्टि हुई।
एलटीपीएम का भी प्रदर्शन प्रमाणित
इस परीक्षण के दौरान एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (LTPM) के प्रदर्शन का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया।
यह मॉड्यूल सी32 चरण के लिए विकसित किया गया है। सी32 एक उन्नत क्रायोजेनिक ऊपरी चरण है, जिसे भारत के गगनयान मिशनों के लिए उपयोग किए जाने की योजना है।
टैंक प्रेशराइजेशन प्रणाली का उद्देश्य उड़ान के दौरान प्रणोदक टैंकों के भीतर आवश्यक दबाव बनाए रखने में सहायता करना है, ताकि इंजन को लगातार और विश्वसनीय रूप से प्रणोदक उपलब्ध हो सके।
एलवीएम3-एम7 मिशन के लिए अगला चरण
सफल परीक्षण के बाद सीई20 इंजन को आवश्यक रखरखाव एवं पुनःसंयोजन से गुजराया जाएगा। इसके बाद इसे एलवीएम3-एम7 मिशन के लिए निर्धारित सी32 उड़ान चरण में जोड़ा जाएगा।
एलवीएम3-एम7 मिशन को 2026 की चौथी तिमाही में निर्धारित किया गया है।
इस परीक्षण का महत्व
सीई20 इंजन का सफल परीक्षण कई कारणों से महत्वपूर्ण है—
पहला, इससे एलवीएम3-एम7 मिशन के लिए इंजन की उड़ान-तैयारी की पुष्टि होती है।
दूसरा, 22 टन के बढ़े हुए थ्रस्ट स्तर पर सफल प्रदर्शन से एलवीएम3 की पेलोड क्षमता बढ़ाने की दिशा में तकनीकी प्रगति का संकेत मिलता है।
तीसरा, एलटीपीएम का सफल प्रदर्शन भविष्य के गगनयान अभियानों के लिए विकसित किए जा रहे उन्नत क्रायोजेनिक चरण की तैयारियों को भी मजबूती देता है।
चौथा, यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन तकनीक और भारी प्रक्षेपण यान क्षमता को और मजबूत करती है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
संगठन: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)
इंजन: सीई20 क्रायोजेनिक इंजन
प्रक्षेपण यान: एलवीएम3
मिशन: एलवीएम3-एम7
परीक्षण: उड़ान-स्वीकृति हॉट परीक्षण
परीक्षण स्थल: मुख्य इंजन एवं चरण परीक्षण सुविधा, आईपीआरसी, महेंद्रगिरि
थ्रस्ट स्तर: 22 टन
ऊपरी चरण: सी32
संबंधित प्रणोदक: तरल ऑक्सीजन (LOX) और तरल हाइड्रोजन
परीक्षण में प्रदर्शित अतिरिक्त प्रणाली: एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (LTPM)
गगनयान से संबंध: सी32 उन्नत क्रायोजेनिक ऊपरी चरण को गगनयान मिशनों के लिए नियोजित किया गया है।
एलवीएम3-एम7 का निर्धारित समय: 2026 की चौथी तिमाही
महत्व: भारी पेलोड प्रक्षेपण, बढ़ी हुई क्षमता और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए तकनीकी तैयारी।