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भारत-आसियान ने कृषि एवं वानिकी सहयोग के लिए 2026-2030 का पंचवर्षीय रोडमैप जारी किया

आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक (AIMMAF) की 9वीं बैठक 9 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता फिलीपींस के कृषि सचिव फ्रांसिस्को पी. तियू लॉरेल, जो आसियान अध्यक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।

बैठक में कृषि और वानिकी के क्षेत्र में व्यावहारिक, किसान-केंद्रित सहयोग को मजबूत करने तथा आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

2026-2030 के लिए नया कार्ययोजना रोडमैप

बैठक में 2026 से 2030 की अवधि के लिए नई आसियान-भारत मध्यम अवधि की कार्ययोजना को अपनाया गया। यह योजना कृषि और वानिकी के क्षेत्र में दोनों पक्षों के सहयोग की दिशा निर्धारित करेगी।

कार्ययोजना को मुख्य रूप से चार व्यापक क्षेत्रों में बांटा गया है—

  1. नीतिगत संवाद और सुदृढ़ मूल्य शृंखलाओं में व्यापार

आसियान और भारत कृषि एवं वानिकी से जुड़ी नीतियों पर नियमित संवाद को बढ़ावा देंगे। साथ ही ऐसी मूल्य शृंखलाओं को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, जो जलवायु, बाजार और अन्य व्यवधानों के प्रति अधिक सक्षम तथा टिकाऊ हों।

इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, कृषि उत्पादों के व्यापार को बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना है।

  1. संस्थागत नेटवर्किंग और डिजिटल नवाचार

दोनों पक्ष संबंधित संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और कृषि एजेंसियों के बीच संस्थागत सहयोग और नेटवर्किंग को मजबूत करेंगे।

इसके साथ कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। डिजिटल कृषि, बेहतर डेटा उपयोग, बाजार सूचना, तकनीकी सेवाओं और किसानों तक सूचना की आसान पहुंच जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी।

  1. तकनीकी सहयोग और संयुक्त अनुसंधान

भारत और आसियान देश कृषि एवं वानिकी के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और संयुक्त अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे।

इसके अंतर्गत कृषि उत्पादकता, टिकाऊ कृषि, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़े अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा सकता है।

  1. मानव संसाधन विकास और किसान आदान-प्रदान

योजना में मानव संसाधन विकास के साथ-साथ किसानों के बीच आदान-प्रदान को भी महत्व दिया गया है।

किसानों, विशेषज्ञों और कृषि क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के बीच अनुभव साझा करने से विभिन्न देशों की सफल कृषि पद्धतियों और तकनीकों को समझने तथा अपनाने में मदद मिलेगी।

अगली मंत्रिस्तरीय बैठक

बैठक में सहमति बनी कि आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक की 10वीं बैठक वर्ष 2028 में आयोजित की जाएगी।

आसियान क्या है?

आसियान (ASEAN) का पूरा नाम दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन है। इसका गठन 8 अगस्त 1967 को बैंकॉक, थाईलैंड में हुआ था।

आसियान की स्थापना करने वाले पांच संस्थापक देश थे—

इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड।

आसियान का प्रमुख उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

आसियान के सदस्य देश

वर्तमान में आसियान में 11 सदस्य देश हैं—

  1. इंडोनेशिया
  2. मलेशिया
  3. फिलीपींस
  4. सिंगापुर
  5. थाईलैंड
  6. ब्रुनेई
  7. लाओस
  8. म्यांमार
  9. कंबोडिया
  10. वियतनाम
  11. तिमोर-लेस्ते

तिमोर-लेस्ते आसियान का नवीनतम सदस्य है।

आसियान शिखर सम्मेलन

आसियान शिखर सम्मेलन संगठन की सर्वोच्च नीति-निर्धारण संस्था है। इसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकारों के प्रमुख भाग लेते हैं।

नियमित व्यवस्था के अनुसार आसियान शिखर सम्मेलन वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है।

आसियान का पहला शिखर सम्मेलन 23-24 फरवरी 1976 को इंडोनेशिया के बाली में आयोजित किया गया था।

आसियान का वैश्विक महत्व

आसियान को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठनों में से एक माना जाता है। दक्षिण-पूर्व एशिया की अर्थव्यवस्था, व्यापार, समुद्री संपर्क और क्षेत्रीय सुरक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

भारत आसियान का संवाद साझेदार है। इसके अलावा अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य प्रमुख देश भी आसियान के संवाद साझेदार हैं।

भारत और आसियान के बीच सहयोग केवल कृषि तक सीमित नहीं है। दोनों पक्ष व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी, डिजिटल प्रौद्योगिकी, शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग करते हैं।

भारत के लिए इस समझौते का महत्व

भारत और आसियान के बीच कृषि एवं वानिकी सहयोग का विस्तार कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की कृषि परिस्थितियां भारत के कई क्षेत्रों से समानताएं रखती हैं। ऐसे में कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास से संबंधित अनुभवों को साझा किया जा सकता है।

नए रोडमैप से किसानों और कृषि उत्पादकों को बेहतर बाजारों से जोड़ने, कृषि व्यापार बढ़ाने तथा सुदृढ़ और टिकाऊ कृषि मूल्य शृंखलाओं के निर्माण में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, डिजिटल नवाचार और संयुक्त अनुसंधान से कृषि क्षेत्र में उत्पादकता, दक्षता और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

बैठक: 9वीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक
तिथि: 9 सितंबर 2026
स्थान: नई दिल्ली
भारत की ओर से सह-अध्यक्ष: शिवराज सिंह चौहान
आसियान की ओर से सह-अध्यक्ष: फ्रांसिस्को पी. तियू लॉरेल
नई कार्ययोजना: 2026-2030
मुख्य क्षेत्र: नीति एवं व्यापार, संस्थागत नेटवर्किंग एवं डिजिटल नवाचार, तकनीकी सहयोग एवं संयुक्त अनुसंधान, मानव संसाधन एवं किसान आदान-प्रदान
10वीं मंत्रिस्तरीय बैठक: 2028
आसियान की स्थापना: 8 अगस्त 1967, बैंकॉक
संस्थापक देश: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड
वर्तमान सदस्य: 11
पहला आसियान शिखर सम्मेलन: 23-24 फरवरी 1976, बाली, इंडोनेशिया
सर्वोच्च नीति-निर्धारण संस्था: आसियान शिखर सम्मेलन