उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में संशोधन करते हुए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अधिसूचित ई-कॉमर्स नियमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऑनलाइन खरीदारी के दौरान होने वाली अनुचित व्यापारिक गतिविधियों और भ्रामक व्यवहारों से सुरक्षा प्रदान करना है।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) को वर्ष 2025 में 17,71,622 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 5,11,196 शिकायतें, यानी लगभग 29 प्रतिशत, ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं।
संशोधित नियमों का उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के साथ-साथ ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए पारदर्शी, संतुलित और जवाबदेह नियामक व्यवस्था विकसित करना है। इससे डिजिटल बाजार में कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए उनकी जिम्मेदारियां अधिक स्पष्ट होंगी और सभी व्यवसायों के लिए समान अवसर का वातावरण तैयार होगा।
संशोधित नियमों के प्रमुख प्रावधान
- उपभोक्ता शिकायतें
प्रत्येक ई-कॉमर्स संस्था को शिकायतकर्ता को उसके शिकायत अधिकारी द्वारा दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति उपलब्ध करानी होगी।
- खोज परिणाम
ई-कॉमर्स कंपनियां खोज परिणामों में इस प्रकार हेरफेर नहीं कर सकेंगी, जिससे उपयोगकर्ता गुमराह हो या उसके द्वारा की गई खोज के अनुरूप परिणामों की प्रासंगिकता प्रभावित हो।
- प्रायोजित सूची
प्रायोजित उत्पादों या सूचियों की स्पष्ट और प्रमुख रूप से पहचान बताना अनिवार्य होगा, ताकि उपभोक्ता यह समझ सके कि कौन-सा परिणाम भुगतान किए गए प्रचार के आधार पर प्रदर्शित किया गया है।
- कीमत में कमी या छूट
जब किसी वस्तु या सेवा की कीमत में कमी घोषित की जाती है, तो कम की गई कीमत और पिछली कीमत दोनों प्रदर्शित करनी होंगी।
यहां “पिछली कीमत” से तात्पर्य उस वस्तु या सेवा की उस सबसे कम कीमत से है, जिस पर उसे कीमत में कमी की घोषणा से पहले के 30 दिनों के दौरान पेश किया गया था।
- डार्क पैटर्न पर रोक
ई-कॉमर्स संस्थाओं को डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन संबंधी दिशा-निर्देश, 2023 का पालन करना होगा।
इसके साथ उन्हें प्रत्येक वर्ष स्व-मूल्यांकन (स्व-ऑडिट) करना होगा और अनुपालन का प्रमाण-पत्र प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।
डार्क पैटर्न ऐसे भ्रामक ऑनलाइन डिजाइन या व्यवहार होते हैं, जिनका उपयोग उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा के विपरीत किसी निर्णय या खरीदारी के लिए प्रभावित करने में किया जा सकता है।
- विक्रेता और उत्पाद की जानकारी
मार्केटप्लेस आधारित ई-कॉमर्स संस्थाओं को उपभोक्ताओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी होगी, जैसे—
- बेस्ट बिफोर/यूज बिफोर तिथि
- वापसी और धनवापसी की शर्तें
- वारंटी
- वितरण संबंधी जानकारी
- भुगतान संबंधी विवरण
इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सूचित एवं उचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।
- उपभोक्ता की व्यक्तिगत जानकारी
मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स संस्थाएं उपभोक्ता की जानकारी का निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए उपयोग स्पष्ट और सकारात्मक सहमति के बिना नहीं कर सकेंगी।
- बंडल शुल्क
मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स संस्थाएं ऐसे शुल्क एक साथ नहीं वसूल सकेंगी, जो ई-कॉमर्स मंच से असंबंधित सेवाओं के लिए हों।
हालांकि, निर्धारित शर्तों के अंतर्गत लॉयल्टी या सदस्यता कार्यक्रमों के लिए अपवाद प्रदान किया गया है।
- आयातित वस्तुएं
आयातित वस्तुओं के संबंध में आयातक का विवरण और वस्तु के मूल देश की जानकारी उपभोक्ता के सामने स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
संशोधन का महत्व
इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं के हितों को मजबूत करना, भ्रामक ऑनलाइन व्यवहारों पर अंकुश लगाना, कीमतों और खोज परिणामों में पारदर्शिता बढ़ाना तथा ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
नए प्रावधान उपभोक्ताओं को खरीदारी से पहले उत्पाद, कीमत, विक्रेता, वापसी, वारंटी और भुगतान से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में सहायता करेंगे। साथ ही, ई-कॉमर्स व्यवसायों के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित होने से डिजिटल बाजार में अधिक निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
संशोधित नियम: उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026
मूल नियम: उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020
कानून: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
लागू होने की तिथि: 1 जनवरी 2027
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की 2025 शिकायतें: 17,71,622
ई-कॉमर्स से संबंधित शिकायतें: 5,11,196
अनुपात: लगभग 29%
प्रमुख प्रावधान: शिकायत की प्रति, खोज परिणामों में पारदर्शिता, प्रायोजित सूची की पहचान, कीमत में कमी का खुलासा, डार्क पैटर्न पर नियंत्रण, विक्रेता एवं उत्पाद की जानकारी, उपभोक्ता डेटा की सहमति और आयातित वस्तुओं की उत्पत्ति की जानकारी।