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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने ईटानगर में ‘न्येदर नमलो’ का दौरा किया

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 9 सितंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में स्थित न्येदर नमलो का दौरा किया। यह स्थान अरुणाचल प्रदेश की न्यीशी जनजाति और अन्य स्वदेशी समुदायों की डोनी-पोलो आस्था से जुड़ा एक पवित्र धार्मिक एवं सामुदायिक केंद्र है।

न्येदर नमलो क्या है?

न्येदर नमलो डोनी-पोलो परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पूजा स्थल और सामुदायिक केंद्र है। यहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन से जुड़ी गतिविधियां भी होती हैं।

उपराष्ट्रपति को इस अवसर पर न्यीशी समुदाय की स्वदेशी आस्था, धार्मिक मान्यताओं और प्रार्थना पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें येरकोस्वदेशी गुरुकुल प्रणाली, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण तथा पारंपरिक औषधीय प्रथाओं के बारे में भी अवगत कराया गया।

डोनी-पोलो परंपरा का महत्व

डोनी-पोलो अरुणाचल प्रदेश की कई स्वदेशी जनजातियों से जुड़ी एक पारंपरिक आस्था है। डोनीका अर्थ सूर्य और पोलोका अर्थ चंद्रमा माना जाता है। इस परंपरा में प्रकृति, सत्य, संतुलन और सामुदायिक जीवन को विशेष महत्व दिया जाता है।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि प्रकृति, सत्य, सद्भाव और समुदाय पर डोनी-पोलो परंपरा का जोर आज के आधुनिक विश्व में भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन और समाज में सहयोग की भावना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में शामिल हैं।

येरको स्वदेशी गुरुकुल प्रणाली

उपराष्ट्रपति ने येरको गुरुकुल प्रणाली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा की ऐसी महत्वपूर्ण प्रणाली है, जो आधुनिक शिक्षा और स्वदेशी ज्ञान को एक साथ जोड़ने का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था बच्चों को आधुनिक दुनिया में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति, परंपरा और जड़ों से जुड़े रहने में भी सहायता करती है।

येरको प्रणाली के माध्यम से स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, जीवन पद्धति और सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

जवाहरलाल नेहरू राज्य संग्रहालय का दौरा

उपराष्ट्रपति ने ईटानगर स्थित जवाहरलाल नेहरू राज्य संग्रहालय का भी दौरा किया। यह संग्रहालय अरुणाचल प्रदेश और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय एवं मानवशास्त्रीय विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करता है।

संग्रहालय में उन्होंने विभिन्न प्रकार के संग्रहों का अवलोकन किया, जिनमें—

  • पारंपरिक वस्त्र एवं कपड़े
  • पुरातात्त्विक अवशेष
  • चित्र एवं कलाकृतियां
  • बांस और बेंत से बनी टोकरियां
  • लकड़ी की नक्काशी
  • पारंपरिक आभूषण
  • घरेलू उपयोग की वस्तुएं

शामिल हैं।

इन वस्तुओं के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की विभिन्न स्वदेशी जनजातियों की परंपराओं, कला, संस्कृति और जीवन शैली की झलक मिलती है।

यात्रा का महत्व

उपराष्ट्रपति का यह दौरा अरुणाचल प्रदेश की स्वदेशी संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय शिक्षा प्रणालियों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है। डोनी-पोलो जैसी पारंपरिक आस्थाएं और येरको जैसी स्वदेशी शिक्षा प्रणालियां भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

साथ ही, संग्रहालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के माध्यम से इन परंपराओं को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

उपराष्ट्रपति: सी. पी. राधाकृष्णन
दौरा: 9 सितंबर 2026
स्थान: ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश
प्रमुख स्थल: न्येदर नमलो
संबंधित समुदाय: न्यीशी एवं अन्य स्वदेशी समुदाय
प्रमुख आस्था: डोनी-पोलो
स्वदेशी शिक्षा प्रणाली: येरको गुरुकुल
संग्रहालय: जवाहरलाल नेहरू राज्य संग्रहालय, ईटानगर