भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन करते हुए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों हेतु नए प्रावधान लागू किए हैं। यह संशोधन नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 के माध्यम से नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 18 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है। यह नियम राजपत्र में प्रकाशित होते ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
नए नियम क्या हैं?
संशोधित नियमों के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आवेदन करने वाले व्यक्तियों को यह घोषित करना होगा कि उनके पास इन देशों द्वारा जारी कोई वैध या समाप्त हो चुका पासपोर्ट है या नहीं।
यदि आवेदक के पास ऐसा पासपोर्ट है, तो उसे निम्नलिखित विवरण देना अनिवार्य होगा—
- पासपोर्ट संख्या
- जारी करने की तिथि
- जारी करने का स्थान
- समाप्ति की तिथि
इसके अतिरिक्त आवेदकों को यह लिखित आश्वासन भी देना होगा कि भारतीय नागरिकता स्वीकृत होने के 15 दिनों के भीतर वे अपने पुराने पासपोर्ट को वरिष्ठ डाक अधीक्षक (Senior Superintendent of Post) या डाक अधीक्षक (Superintendent of Post) के पास जमा कर देंगे।
संशोधन का उद्देश्य
गृह मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन मुख्य रूप से प्रशासनिक स्पष्टता और दस्तावेजी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए किया गया है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—
- सत्यापन प्रक्रिया को अधिक सुदृढ़ बनाना
- रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार करना
- नागरिकता संबंधी दस्तावेजी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 से संबंध
यह संशोधन नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के कार्यान्वयन से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए धार्मिक उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
इन अल्पसंख्यक समुदायों में शामिल हैं—
- हिंदू
- सिख
- बौद्ध
- जैन
- पारसी
- ईसाई
यह लाभ उन प्रवासियों को दिया जाता है जो 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं।
CAA, 2019 की प्रमुख विशेषताएँ
- नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया।
- पात्र प्रवासियों के लिए प्राकृतिककरण (Naturalisation) की निवास अवधि 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी गई।
- CAA के क्रियान्वयन हेतु नियम 11 मार्च 2024 को अधिसूचित किए गए।
- आवेदन प्रक्रिया भारतीय नागरिकता ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाती है।
संवैधानिक प्रावधान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 तक नागरिकता संबंधी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता से संबंधित कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है।
नागरिकता से संबंधित प्रमुख अधिनियम
- नागरिकता अधिनियम, 1955
- विदेशी अधिनियम, 1946
- पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920
CAA से बाहर रखे गए क्षेत्र
CAA के प्रावधान निम्न क्षेत्रों पर लागू नहीं होते—
- असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के छठी अनुसूची वाले जनजातीय क्षेत्र
- इनर लाइन परमिट (ILP) प्रणाली के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र
प्रमुख विवाद और चिंताएँ
नागरिकता संशोधन अधिनियम और इससे जुड़े नियमों को लेकर देशभर में विभिन्न स्तरों पर बहस और विवाद भी देखने को मिले हैं। प्रमुख चिंताएँ निम्नलिखित हैं—
- नागरिकता प्रदान करने में धार्मिक आधार अपनाने का आरोप
- मुस्लिम प्रवासियों को बाहर रखने को लेकर विवाद
- संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता और धर्मनिरपेक्षता पर प्रश्न
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर संभावित प्रभाव को लेकर आशंकाएँ