भारत सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना को मजबूत करने के लिए अगले पाँच वर्षों में लगभग ₹4,800 करोड़ निवेश करने की योजना बनाई है। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाना, व्यापार और पर्यटन को प्रोत्साहित करना तथा पूर्वोत्तर भारत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग नेटवर्क से जोड़ना है।
यह परियोजना बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा लागू की जा रही है।
परियोजना के प्रमुख उद्देश्य
अंतर्देशीय जलमार्ग विकास कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- पूर्वोत्तर क्षेत्र में माल और यात्री परिवहन को बढ़ावा देना
- लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन लागत को कम करना
- बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ संपर्क बढ़ाना
- पर्यावरण-अनुकूल एवं ईंधन-कुशल परिवहन को प्रोत्साहित करना
- पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ाना
- भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” को मजबूती प्रदान करना
विकास योजना के अंतर्गत प्रस्तावित कार्य
परियोजना के तहत विभिन्न आधुनिक अवसंरचनाओं का निर्माण किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—
- आधुनिक नदी टर्मिनल
- जेट्टी एवं फ्लोटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
- नौवहन सहायता प्रणाली
- ड्रेजिंग सुविधाएँ
- कौशल विकास एवं पोत सहायता प्रणाली
पूर्वोत्तर भारत के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जलमार्ग
राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (NW-2)
- नदी : ब्रह्मपुत्र
- मार्ग : धुबरी से सादिया (असम)
- लंबाई : लगभग 891 किलोमीटर
- वर्ष 1988 में राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया।
राष्ट्रीय जलमार्ग-16 (NW-16)
- नदी : बराक नदी
- दक्षिणी असम क्षेत्र को जोड़ता है।
ये जलमार्ग पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापार और संपर्क के दृष्टिकोण से अत्यंत रणनीतिक महत्व रखते हैं।
पूर्वोत्तर भारत के लिए परियोजना का महत्व
अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास से निम्न लाभ होने की अपेक्षा है—
- बहु-माध्यम परिवहन संपर्क (Multimodal Connectivity) में सुधार
- बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापार में वृद्धि
- सड़क परिवहन पर निर्भरता में कमी
- सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा
- दूरस्थ क्षेत्रों के आर्थिक एकीकरण को मजबूती
यह परियोजना “पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान” के अनुरूप भी है, जिसका उद्देश्य समेकित अवसंरचना विकास को बढ़ावा देना है।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI)
- स्थापना : 1986
- मुख्यालय : नोएडा, उत्तर प्रदेश
- कार्यरत मंत्रालय : बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय
- कार्य : भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास एवं विनियमन
राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016
राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत भारत में 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया। इससे पहले देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे।
अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) के लाभ
- परिवहन का किफायती माध्यम
- कम कार्बन उत्सर्जन के कारण पर्यावरण-अनुकूल
- सड़क एवं रेल परिवहन की तुलना में अधिक ईंधन-कुशल
- भारी माल ढुलाई के लिए उपयुक्त
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्ग
| राष्ट्रीय जलमार्ग | नदी/नहर | संबंधित राज्य |
|---|---|---|
| NW-1 | गंगा-भागीरथी-हुगली | उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल |
| NW-2 | ब्रह्मपुत्र | असम |
| NW-3 | वेस्ट कोस्ट कैनाल | केरल |
जलमार्गों से संबंधित प्रमुख सरकारी योजनाएँ
जल मार्ग विकास परियोजना (JMVP)
गंगा नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के विकास हेतु संचालित परियोजना।
सागरमाला कार्यक्रम
बंदरगाह-आधारित विकास योजना, जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स और तटीय संपर्क को बेहतर बनाना है।
पीएम गति शक्ति
एकीकृत अवसंरचना योजना मंच, जिसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन एवं अवसंरचना परियोजनाओं के समन्वित विकास को बढ़ावा देना है।