नेपाल की संसदीय सुनवाई समिति (Parliamentary Hearing Committee – PHC) ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. मनोज कुमार शर्मा को सर्वसम्मति से नेपाल के नए मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के रूप में मंजूरी प्रदान की है।
यह नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि डॉ. शर्मा ने वरिष्ठता क्रम में अपने से ऊपर मौजूद तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को पीछे छोड़ते हुए यह पद प्राप्त किया है। इससे नेपाल की न्यायिक व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही वरिष्ठता आधारित नियुक्ति परंपरा टूट गई है।
वरिष्ठता परंपरा क्या थी?
नेपाल में परंपरागत रूप से सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य न्यायपालिका में:
- संस्थागत निष्पक्षता बनाए रखना
- राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करना
- न्यायिक स्थिरता सुनिश्चित करना
माना जाता था कि वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति से न्यायपालिका की स्वतंत्रता मजबूत होती है।
किन वरिष्ठ न्यायाधीशों को पीछे छोड़ा गया?
डॉ. मनोज कुमार शर्मा वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर थे। उनसे वरिष्ठ तीन न्यायाधीश थे:
- सपना प्रधान मल्ला
- कुमार रेग्मी
- हरि प्रसाद फुयाल
इन सभी को पीछे छोड़कर डॉ. शर्मा का चयन किया गया, जिसे नेपाल के न्यायिक इतिहास में वरिष्ठता सिद्धांत से पहली बड़ी विचलन के रूप में देखा जा रहा है।
नियुक्ति प्रक्रिया कैसे हुई?
नेपाल में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है:
- नेपाल की संवैधानिक परिषद द्वारा सिफारिश
- संसदीय सुनवाई समिति (PHC) द्वारा सुनवाई और अनुमोदन
- अंत में राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक नियुक्ति
नेपाल की संवैधानिक परिषद
नेपाल की संवैधानिक परिषद (Constitutional Council) संवैधानिक निकायों और महत्वपूर्ण न्यायिक पदों पर नियुक्तियों की सिफारिश करती है।
इस परिषद में शामिल सदस्य हैं:
- प्रधानमंत्री
- प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष
- उपाध्यक्ष
- राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष
- विपक्ष के नेता
- कानून मंत्री (मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति बैठकों में)
नेपाल की न्यायपालिका
नेपाल में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसदीय पुष्टि के बाद की जाती है।
नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित है।
नेपाल : महत्वपूर्ण तथ्य
- राजधानी : काठमांडू
- राष्ट्रपति : रामचंद्र पौडेल
- मुद्रा : नेपाली रुपया