अमेरिका का नया समुद्री अभियान
अमेरिका एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ में अपने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिकी सेना को अपने एयरबेस और हवाई क्षेत्र के उपयोग की अनुमति दोबारा दे दी है। इससे अमेरिका को फारस की खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान और अमेरिका-इज़राइल तनाव के बीच इस जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
क्या है ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’
‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अमेरिका का वह अभियान है जिसके तहत अमेरिकी नौसेना और वायुसेना की सुरक्षा में व्यापारिक जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ से सुरक्षित निकाला जाता है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार जहाजों को एक संकरे, माइंस-मुक्त समुद्री कॉरिडोर से गुजारा जाता है, जिसकी निगरानी अमेरिकी युद्धपोत और लड़ाकू विमान करते हैं।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरानी मिसाइलों, ड्रोन हमलों और समुद्री माइंस से व्यापारिक जहाजों की रक्षा करना है ताकि वैश्विक व्यापार बाधित न हो।
सऊदी अरब और कुवैत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण
इस मिशन के लिए सऊदी अरब और कुवैत के एयरबेस बेहद अहम माने जा रहे हैं। अमेरिकी सैन्य विमानों को लगातार गश्त, निगरानी और सुरक्षा अभियान चलाने के लिए इन बेसों की आवश्यकता पड़ती है।
रिपोर्ट के अनुसार, पहले सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिकी सेना पर कुछ प्रतिबंध लगाए थे क्योंकि उन्हें डर था कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ा तो अमेरिका उनकी पर्याप्त सुरक्षा नहीं कर पाएगा। हालांकि अब दोनों देशों ने प्रतिबंध हटाकर अमेरिका को फिर से सैन्य सुविधा देने का फैसला किया है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस अभियान को दोबारा शुरू करने पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने फारस की खाड़ी में गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात किए हैं ताकि ईरान के प्रभाव को चुनौती दी जा सके।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इस अभियान को कुछ समय के लिए पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध पर रोका गया था। उनका दावा है कि ईरान के साथ संभावित समझौते और सैन्य सफलता को देखते हुए यह अस्थायी विराम लिया गया।
ईरान-अमेरिका तनाव और समुद्री संकट
ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी तनाव के बीच कई व्यापारिक जहाजों की आवाजाही रोक दी है। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 1600 जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ के आसपास फंसे हुए हैं। दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना ने भी ईरानी जहाजों की गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ा दिया है।
यह स्थिति वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
भू-राजनीतिक महत्व
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति के माध्यम से वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा का दावा करता है, जबकि ईरान इसे अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जोड़कर देखता है।
सऊदी अरब, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों की भूमिका इस संघर्ष में निर्णायक बनती जा रही है क्योंकि उनके सैन्य ठिकाने और हवाई क्षेत्र अमेरिका की रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।