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OECD द्वारा वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.1% रहने का अनुमान

Organisation for Economic Co-operation and Development ने अपनी नवीनतम अंतरिम आर्थिक रिपोर्ट (मार्च 2026) में भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) को लेकर महत्वपूर्ण अनुमान प्रस्तुत किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 6.1% की दर से बढ़ेगी, जो वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के 7.6% की तुलना में कम है।

OECD का मानना है कि अगले दो वित्त वर्षों तक भारत की विकास दर 6.5% से नीचे रह सकती है। हालांकि, यह वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद एक अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया (West Asia) संकट के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे भारत में मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ेगा। इस कारण आर्थिक वृद्धि धीमी होने की संभावना है।

बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को जून तिमाही में रेपो दर (Repo Rate) अस्थायी रूप से बढ़ानी पड़ सकती है, ताकि मांग को नियंत्रित किया जा सके और कीमतों को स्थिर रखा जा सके। OECD ने यह भी उल्लेख किया कि टैरिफ (शुल्क) में कमी भारत की आर्थिक वृद्धि को सहारा दे सकती है, लेकिन दूसरी ओर गैस की आपूर्ति में कमी (Gas Rationing) कुछ औद्योगिक उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। साथ ही, सरकार द्वारा दी जा रही राजकोषीय सहायता (Fiscal Support) में कमी आने से भी विकास दर पर असर पड़ेगा।

मुद्रास्फीति के संदर्भ में, रिपोर्ट के अनुसार भारत में महंगाई दर 2025-26 में 2.0% से बढ़कर 2026-27 में 5.1% हो सकती है, जबकि 2027-28 में यह कुछ घटकर 4.1% रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज वृद्धि और खाद्य व ऊर्जा कीमतों में पहले आई गिरावट का प्रभाव खत्म होना है।

सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत में रोजगार बाजार (Labour Market) मजबूत बना हुआ है और बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत कम है। इसके अलावा, राष्ट्रीय आय के आंकड़ों में संशोधन (National Accounts Revision) के कारण विकास अपेक्षा से बेहतर रहा है। हालांकि, OECD ने चेतावनी दी है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) में अस्थिरता भारत के उर्वरक (Fertilizer) उद्योग को प्रभावित कर सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

वैश्विक स्तर पर OECD ने 2026 के लिए आर्थिक वृद्धि दर 2.9% बनाए रखी है, जबकि 2027 के लिए इसे घटाकर 3% कर दिया गया है (पहले 3.1% अनुमान था)। वैश्विक वृद्धि को तकनीकी निवेश, कम टैरिफ और 2025 की मजबूत आर्थिक स्थिति से समर्थन मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक संकट, ऊर्जा कीमतों और महंगाई के दबाव के कारण निकट भविष्य में वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है।