जूरी समिति द्वारा चयन प्रक्रिया
संसद रत्न पुरस्कार का उद्देश्य और स्थापना
संसद रत्न पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2010 में चेन्नई स्थित प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन द्वारा की गई थी। इस पुरस्कार की अवधारणा भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सुझाव से प्रेरित थी। इसका उद्देश्य सांसदों को विधायी कार्य, संसदीय बहसों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका के लिए प्रोत्साहित करना तथा उत्कृष्ट संसदीय प्रदर्शन को सम्मानित करना है।
चयन के मानदंड
पुरस्कार विजेताओं का चयन वस्तुनिष्ठ संसदीय प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इनमें संसद में पूछे गए प्रश्नों की संख्या, विभिन्न वाद-विवादों में भागीदारी, निजी सदस्य विधेयकों की प्रस्तुति, सदन में उपस्थिति तथा संसदीय समितियों में सक्रिय सहभागिता जैसे मानदंड शामिल होते हैं। चयन प्रक्रिया में पीआरएस विधायी अनुसंधान, लोकसभा सचिवालय तथा राज्यसभा सचिवालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक आंकड़ों का उपयोग किया जाता है।
डॉ. मेधा कुलकर्णी का परिचय
डॉ. मेधा कुलकर्णी महाराष्ट्र से भारतीय जनता पार्टी की राज्यसभा सांसद हैं। वह पहले पुणे के कोथरुड विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं और वर्ष 2024 में राज्यसभा की सदस्य बनीं। सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रिय भूमिका और संसदीय कार्यों में भागीदारी ने उन्हें इस सम्मान के लिए योग्य बनाया है।
स्मिता उदय वाघ का परिचय
स्मिता उदय वाघ महाराष्ट्र के जलगांव लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सांसद हैं। वह तीन दशकों से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने जलगांव जिला परिषद की अध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा की नेता तथा महाराष्ट्र विधान परिषद की सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। जनसेवा और संगठनात्मक नेतृत्व में उनके योगदान को व्यापक रूप से सराहा गया है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित संसदीय समितियाँ
इस वर्ष कुछ संसदीय स्थायी समितियों को भी उनके प्रभावी कार्य और नीति निर्माण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। इनमें कृषि संबंधी समिति, वित्त समिति, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति तथा कोयला एवं खान समिति शामिल हैं। इन समितियों ने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर महत्वपूर्ण सुझाव और अनुशंसाएँ प्रस्तुत की हैं।
संसद रत्न पुरस्कारों का महत्व
वर्ष 2026 का समारोह विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह 150वें संसद रत्न पुरस्कार के प्रदान किए जाने का प्रतीक होगा। पिछले 15 संस्करणों में सांसदों और संसदीय समितियों को 143 से अधिक पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं। यह सम्मान भारतीय लोकतंत्र में संसदीय जवाबदेही, पारदर्शिता और सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।