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Defence

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को नई मजबूती, भारतीय सेना खरीदेगी जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को नई मजबूती, भारतीय सेना खरीदेगी जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली भारतीय सेना ने अमेरिका से जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) प्रणाली खरीदने के लिए लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह खरीद अमेरिका की Foreign Military Sales (FMS) प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी। इस समझौते को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिका ने कहा है कि जेवलिन प्रणाली की खरीद से दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी और अधिक मजबूत तथा व्यापक होगी।

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को कहा कि यह समझौता भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की बढ़ती गहराई, क्षमता और रणनीतिक महत्त्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जेवलिन समझौता भारतीय सेना के लिए अमेरिका के समर्थन की मजबूती को प्रदर्शित करता है और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को साथ मिलकर काम करने के नए अवसर प्रदान करता है। अमेरिका का मानना है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच ऐसे सहयोग की काफी संभावनाएँ हैं, जिससे भारत और अमेरिका दोनों के रक्षा औद्योगिक आधार (Defence Industrial Base) को मजबूती मिलेगी।

यह घटनाक्रम अमेरिका के विदेश विभाग द्वारा भारतीय सेना को जेवलिन मिसाइल प्रणाली की संभावित बिक्री को मंजूरी दिए जाने के लगभग नौ महीने बाद सामने आया है। भारत ने अमेरिका से इस हथियार प्रणाली को खरीदने का अनुरोध किया था। प्रस्तावित बिक्री का अनुमानित मूल्य लगभग 45.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। जेवलिन एक आधुनिक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली है, जिसे मुख्य रूप से बख्तरबंद वाहनों और मजबूत किलेबंद ठिकानों जैसे लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। इसका उपयोग अमेरिका की सेना और मरीन कॉर्प्स के साथ-साथ कई अन्य देशों की सेनाएँ भी करती हैं।

जेवलिन प्रणाली का निर्माण जेवलिन ज्वाइंट वेंचर द्वारा किया जाता है, जो अमेरिकी रक्षा कंपनियों RTX और Lockheed Martin की साझेदारी है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि इसे विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध इस्तेमाल किया जा सकता है। विशेष रूप से बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ इसकी क्षमता इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण हथियार बनाती है। इसके माध्यम से भारतीय सेना की टैंक-रोधी क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को व्यापक बनाने के लिए दोनों देशों ने पिछले वर्ष 10 वर्षीय रक्षा सहयोग रूपरेखा पर भी हस्ताक्षर किए थे। जेवलिन समझौता इसी व्यापक रक्षा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी दूतावास के अनुसार, यह समझौता भारत-अमेरिका की प्रमुख रक्षा साझेदारी (Major Defense Partnership) को और मजबूत करता है। साथ ही, इससे दोनों देशों के बीच परस्पर लाभकारी सह-उत्पादन (Co-production) तथा रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत के नए रास्ते खुल सकते हैं।

अमेरिका की Defence Security Cooperation Agency (DSCA) ने पिछले वर्ष नवंबर में इस संभावित बिक्री का समर्थन किया था। DSCA के अनुसार, यह बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। इसके माध्यम से भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार की सुरक्षा क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखता है।

DSCA के अनुसार, भारत सरकार ने कुल 100 FGM-148 जेवलिन मिसाइल राउंड, एक FGM-148 जेवलिन मिसाइल (fly-to-buy) और 25 जेवलिन Lightweight Command Launch Units (LwCLU) अथवा Javelin Block 1 Command Launch Units (CLU) खरीदने का अनुरोध किया है। कमांड लॉन्च यूनिट वह प्रणाली है जिसके माध्यम से मिसाइल को लक्ष्य पर निर्देशित और प्रक्षेपित करने की प्रक्रिया संचालित की जाती है। इस प्रकार प्रस्तावित खरीद में केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि उन्हें संचालित करने के लिए आवश्यक लॉन्चिंग, प्रशिक्षण, तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता भी शामिल है।

इस सौदे में कई गैर-प्रमुख रक्षा उपकरण (Non-MDE) भी शामिल हैं। इनमें जेवलिन LwCLU या CLU के लिए बेसिक स्किल्स ट्रेनर, मिसाइल सिमुलेशन राउंड, बैटरी कूलेंट यूनिट और इंटरैक्टिव इलेक्ट्रॉनिक तकनीकी मैनुअल शामिल हैं। इसके अलावा, ऑपरेटर मैनुअल, जीवन-चक्र सहायता (Lifecycle Support), भौतिक सुरक्षा निरीक्षण, स्पेयर पार्ट्स, सिस्टम इंटीग्रेशन और सिस्टम की जाँच जैसी सेवाएँ भी प्रस्तावित पैकेज का हिस्सा हैं।

समझौते के अंतर्गत भारत को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें Security Assistance Management Directorate (SAMD) तथा Tactical Aviation and Ground Munitions (TAGM) Project Office की तकनीकी सहायता शामिल है। इसके अतिरिक्त आवश्यक टूल किट, प्रशिक्षण सुविधाएँ, Block 1 Command Launch Unit (CLU) की मरम्मत एवं नवीनीकरण सेवाएँ तथा अन्य संबंधित लॉजिस्टिक और कार्यक्रम सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे भारतीय सेना को प्रणाली के संचालन, रखरखाव और दीर्घकालिक उपयोग के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, जेवलिन मिसाइल प्रणाली की खरीद भारत की टैंक-रोधी युद्ध क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ भारत-अमेरिका के रक्षा औद्योगिक संबंधों को भी नई दिशा दे सकती है। यह समझौता केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, रखरखाव, लॉजिस्टिक सहयोग और भविष्य में सह-उत्पादन की संभावनाएँ भी शामिल हैं। ऐसे में जेवलिन सौदा भारत-अमेरिका के बढ़ते रणनीतिक एवं रक्षा संबंधों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा सकता है।

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