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पश्चिम बंगाल में रेल अवसंरचना विकास हेतु ₹895 करोड़ की परियोजनाएं

कोलकाता मेट्रो के नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर का आधुनिकीकरण

रेल मंत्रालय द्वारा पश्चिम बंगाल में रेल लाइन क्षमता बढ़ाने तथा माल परिवहन को सुगम बनाने के लिए कुल ₹895.30 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें सबसे प्रमुख हिस्सा कोलकाता मेट्रो के नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर के उन्नयन से संबंधित है, जिसके लिए ₹671.72 करोड़ की मंजूरी दी गई है। कोलकाता मेट्रो, जो 1980 के दशक में निर्मित देश की सबसे पुरानी मेट्रो प्रणाली है, मूल रूप से लगभग 5 मिनट की ट्रेन आवृत्ति के लिए डिजाइन की गई थी, लेकिन बढ़ती यात्री मांग के कारण अब अधिक उच्च आवृत्ति (frequency) की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 7 नए ट्रैक्शन सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिन पर ₹291.06 करोड़ का व्यय होगा। इसके अतिरिक्त, एस्प्लेनेड से कवि सुभाष (न्यू गरिया) तक के खंड में सहायक सबस्टेशन (ASS) और ट्रैक्शन सबस्टेशन (TSS) प्रणाली का उन्नयन किया जाएगा। साथ ही, नेताजी मेट्रो स्टेशन से कवि सुभाष मेट्रो स्टेशन तक एलिवेटेड सेक्शन में विद्युत आपूर्ति को भी मजबूत किया जाएगा, जिसमें मौजूदा 11 केवी प्रणाली को 33 केवी में परिवर्तित किया जाएगा। इस उन्नयन पर ₹380.66 करोड़ खर्च होंगे। इन सभी सुधारों के परिणामस्वरूप मेट्रो सेवा 2.5 मिनट के अंतराल पर संचालित हो सकेगी, जिससे यात्री सुविधा, सेवा आवृत्ति और लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

आद्रा डिवीजन में पुल अवसंरचना का पुनर्निर्माण

दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा डिवीजन से संबंधित है, जिसके अंतर्गत ₹223.58 करोड़ की लागत से मधुकुंडा दामोदर खंड में स्थित ब्रिज संख्या 520 (अप एवं डाउन लाइन) के सबस्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही यार्ड रीमॉडलिंग और ट्रैक सुधार कार्य भी किए जाएंगे। यह पुल मूल रूप से 1903 (डाउन लाइन) और 1965 (अप लाइन) में निर्मित हुआ था, जो अब काफी पुराना हो चुका है और इसमें संरचनात्मक कमजोरियां दिखाई दे रही हैं। इस कारण इसकी नींव और संरचना का पुनर्निर्माण आवश्यक हो गया है। यह रेलवे खंड आसनसोल और टाटानगर के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क कड़ी है तथा यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का फीडर रूट और कोयला परिवहन कॉरिडोर (सिनी–पुरुलिया–आसनसोल) का हिस्सा है, जहां 67 जीएमटी का उच्च ट्रैफिक घनत्व पाया जाता है। इस परियोजना के माध्यम से न केवल माल परिवहन की क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि सुरक्षा और विश्वसनीयता में भी सुधार आएगा।

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