उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला : 2024

Ministry of Statistics & Programme Implementation ने हाल ही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की एक नई श्रृंखला शुरू की है, जिसका आधार वर्ष 2024 रखा गया है। इस नई श्रृंखला के तहत जनवरी माह की खुदरा महंगाई दर 2.75 प्रतिशत दर्ज की गई है। राज्यों के स्तर पर देखें तो तेलंगाना में महंगाई सबसे अधिक 4.92 प्रतिशत रही, इसके बाद केरल (3.67 प्रतिशत) और तमिलनाडु (3.36 प्रतिशत) का स्थान रहा। जनवरी में जिन वस्तुओं में महंगाई अधिक रही, उनमें चाँदी के आभूषण, टमाटर, नारियल–खोपरा, सोना/हीरा/प्लैटिनम आभूषण और नारियल तेल प्रमुख रहे। वहीं, कम महंगाई या नकारात्मक महंगाई वाली शीर्ष वस्तुओं में लहसुन, प्याज, आलू, अरहर, तूर दाल और मटर शामिल रहीं।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) वस्तुतः उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले परिवर्तन को मापता है, जिनका उपभोग सामान्य परिवार करता है। CPI पर आधारित खुदरा महंगाई दर किसी भी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को मापने का एक प्रमुख समष्टि-आर्थिक संकेतक मानी जाती है। यह समय के साथ चयनित वस्तुओं और सेवाओं की खुदरा कीमतों के औसत स्तर में होने वाले बदलाव को दर्शाता है। महंगाई की गणना CPI में वर्ष-दर-वर्ष (Year-on-Year) प्रतिशत परिवर्तन के आधार पर की जाती है। भारत में ग्रामीण, शहरी और संयुक्त CPI की शुरुआत जनवरी 2011 में की गई थी, जिसका आधार वर्ष 2012=100 था और इसका वस्तु टोकरी 2004–05 के उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण पर आधारित थी।

आधार वर्ष (Base Year) वह संदर्भ वर्ष होता है, जिसे सूचकांक के लिए 100 माना जाता है और उसी के सापेक्ष बाद के वर्षों में कीमतों में बदलाव को मापा जाता है। आधार वर्ष का महत्व इसलिए है क्योंकि इससे महंगाई के आँकड़े प्रासंगिक, तुलनात्मक और समझने में सरल बने रहते हैं। नई CPI श्रृंखला में आधार वर्ष 2024 रखा गया है।

आधार वर्ष को अद्यतन करने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि CPI वर्तमान उपभोग पैटर्न, आय संरचना, शहरीकरण, सेवा क्षेत्र के विस्तार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप बना रहे। पिछले दशक में उपभोक्ताओं की खर्च करने की आदतों में बड़े संरचनात्मक बदलाव आए हैं। इसलिए 2012=100 वाली पुरानी श्रृंखला अब वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं कर पा रही थी। नई CPI श्रृंखला को Household Consumption Expenditure Survey (HCES) 2023–24 के आधार पर तैयार किया गया है, जिससे वजन (weights) और वस्तु टोकरी अधिक यथार्थपरक और सुसंगत हो सकें।

CPI 2024 श्रृंखला में प्रमुख बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। नई श्रृंखला में वस्तु टोकरी और उनके भार HCES 2023–24 पर आधारित हैं, जिससे महंगाई मापन की प्रतिनिधिकता बढ़ी है। इसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप Classification of Individual Consumption According to Purpose (COICOP-2018) को अपनाया गया है, जिससे भारत का CPI वैश्विक CPI के साथ तुलनीय बनता है। सूचकांक संकलन पद्धति में सुधार, वैकल्पिक डेटा स्रोतों का उपयोग, आधुनिक तकनीक का प्रयोग और अधिक सूक्ष्म (granular) आँकड़ों का प्रकाशन इस श्रृंखला की विशेषताएँ हैं।

नई CPI श्रृंखला के अंतर्गत 1,465 ग्रामीण बाजार और 1,395 शहरी बाजार शामिल किए गए हैं, जो देश के 434 नगरों में फैले हुए हैं। वस्तुओं और सेवाओं की कुल संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है। इनमें वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़कर 308 और सेवाओं की संख्या 40 से बढ़कर 50 हो गई है। इसके अतिरिक्त, 25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 नगरों में 12 ऑनलाइन बाजारों को भी शामिल किया गया है, ताकि ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी सही ढंग से मापा जा सके।

नई वस्तुओं में ग्रामीण आवास, ऑनलाइन मीडिया/स्ट्रीमिंग सेवाएँ, मूल्यवर्धित डेयरी उत्पाद, जौ एवं उसके उत्पाद, पेन-ड्राइव और एक्सटर्नल हार्ड डिस्क, अटेंडेंट, बेबीसिटर तथा व्यायाम उपकरण शामिल किए गए हैं। वहीं, तकनीकी और उपभोग में अप्रासंगिक हो चुकी वस्तुएँ जैसे VCR/VCD/DVD प्लेयर, रेडियो, टेप रिकॉर्डर, सेकेंड-हैंड कपड़े, CD/DVD कैसेट और कॉयर/रस्सी को वस्तु टोकरी से हटा दिया गया है।

कुल मिलाकर, CPI 2024 श्रृंखला भारत में महंगाई मापन को अधिक यथार्थवादी, आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाती है। इससे नीति-निर्माताओं, रिज़र्व बैंक, वित्तीय संस्थानों, उद्योग जगत और आम नागरिकों को महंगाई की प्रवृत्तियों को बेहतर ढंग से समझने और सटीक निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।