दुनिया भर में सांसदों (Members of Parliament) के खिलाफ राजनीतिक हिंसा और सार्वजनिक दुर्व्यवहार में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। Inter-Parliamentary Union (IPU) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अधिकांश सांसद नागरिकों की ओर से धमकी, अपमान और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि सर्वेक्षण में शामिल 71 प्रतिशत सांसदों ने सार्वजनिक हिंसा का अनुभव किया है, चाहे वह ऑनलाइन हो, ऑफलाइन हो या दोनों रूपों में। यह अध्ययन 85 देशों के सांसदों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है तथा अर्जेंटीना, बेनिन, इटली, मलेशिया और नीदरलैंड्स में गहन केस स्टडी के माध्यम से विविध राजनीतिक और क्षेत्रीय संदर्भों को दर्शाता है।
रिपोर्ट का महत्व इस तथ्य में निहित है कि हाल के वर्षों में कई देशों में सांसदों के खिलाफ धमकी और उत्पीड़न की घटनाएँ बढ़ी हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और उनके प्रतिनिधियों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जब यह असहमति हिंसा, धमकियों और यहां तक कि हत्याओं में बदल जाती है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन जाती है। यूनाइटेड किंगडम में 2016 में जो कॉक्स और 2021 में डेविड अमेस जैसे सांसदों की हत्या इस बढ़ती शत्रुता के चरम उदाहरण हैं। ऐसे मामले केवल व्यक्तिगत त्रासदियाँ नहीं, बल्कि एक व्यापक और गहराते हुए संकट के संकेत हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों के प्रति बढ़ती शत्रुता कई कारणों से प्रेरित है—राजनीतिक ध्रुवीकरण में वृद्धि, आर्थिक और सामाजिक दबावों से उपजी जन-असंतोष की भावना, सोशल मीडिया के माध्यम से क्रोध और नफरत का तीव्र प्रसार, तथा सार्वजनिक संस्थानों में घटता विश्वास। इस वातावरण में सांसद, जो पहले सार्वजनिक सेवक के रूप में देखे जाते थे, अब जन-असंतोष के प्रतीक या “लाइटनिंग रॉड” बनते जा रहे हैं। IPU ने धमकी और उत्पीड़न को राजनीतिक हिंसा का एक रूप माना है, जिसका उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों के व्यवहार को प्रभावित करना, उनकी भागीदारी को सीमित करना या लोकतांत्रिक संस्थानों की वैधता को कमजोर करना होता है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष अत्यंत चिंताजनक हैं। कुल मिलाकर 71 प्रतिशत सांसदों ने सार्वजनिक हिंसा का अनुभव किया है। हिंसा का सबसे बड़ा हिस्सा ऑनलाइन माध्यमों से आता है, जहाँ 65 से 77 प्रतिशत सांसदों ने डिजिटल दुर्व्यवहार की सूचना दी। अपमानजनक भाषा, झूठी या भ्रामक सूचनाओं का प्रसार और धमकियाँ सबसे आम रूप हैं। अर्जेंटीना और नीदरलैंड्स में दस में से आठ सांसदों ने पिछले पाँच वर्षों में हिंसा में वृद्धि की बात कही। ऑनलाइन हिंसा अक्सर चुनावों, विवादास्पद विधेयकों या ध्रुवीकरण पैदा करने वाले राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों से जुड़ी होती है। हालांकि ऑफलाइन हिंसा की घटनाएँ अपेक्षाकृत कम हैं, फिर भी मौखिक आक्रामकता, सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न और शारीरिक हमले गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
लैंगिक दृष्टि से भी यह समस्या असमान है। रिपोर्ट के अनुसार महिला सांसद पुरुषों की तुलना में अधिक प्रभावित हैं—लगभग 76 प्रतिशत महिला सांसदों ने हिंसा का अनुभव किया, जबकि पुरुषों में यह आँकड़ा 68 प्रतिशत है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा अक्सर लैंगिक और यौन प्रकृति की होती है, विशेषकर ऑनलाइन मंचों पर। इसके अलावा, नस्लीय अल्पसंख्यकों, दिव्यांगों और LGBTQIA+ समुदायों से आने वाले सांसदों को और अधिक तीव्र ऑनलाइन हिंसा का सामना करना पड़ता है। उभरती प्रौद्योगिकियाँ, जैसे AI-जनित सामग्री और डीपफेक, इस दुर्व्यवहार को और अधिक खतरनाक बना रही हैं।
हिंसा के कर्ताओं के बारे में रिपोर्ट बताती है कि अधिकांश मामलों में यह व्यक्तिगत स्तर पर की जाती है, न कि संगठित समूहों द्वारा। ऑनलाइन माध्यमों में गुमनाम उपयोगकर्ता प्रमुख अपराधी हैं—अर्जेंटीना, इटली, मलेशिया और नीदरलैंड्स में लगभग 89 से 93 प्रतिशत सांसदों ने अनाम खातों को जिम्मेदार ठहराया। यह गुमनामी हिंसा को बढ़ावा देती है और जवाबदेही को कमजोर करती है।
लोकतंत्र पर इसका प्रभाव अत्यंत गंभीर है। IPU ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक धमकी और उत्पीड़न के कारण कई सांसद आत्म-सेंसरशिप अपनाने लगते हैं, सार्वजनिक कार्यक्रमों से बचते हैं और उनके परिवार भी मानसिक दबाव में आ जाते हैं। कुछ सांसद राजनीति छोड़ने या पुनः चुनाव न लड़ने का निर्णय भी लेते हैं। दीर्घकाल में यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करती है, विविधता को हतोत्साहित करती है और संसद जैसी संस्थाओं की प्रभावशीलता को कम कर देती है। अंततः यह लोकतांत्रिक विमर्श की गुणवत्ता को गिराती है और योग्य व्यक्तियों को सार्वजनिक जीवन में आने से रोकती है।
अंत में, यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सांसदों के खिलाफ बढ़ती राजनीतिक हिंसा केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा प्रहार है। यदि इस प्रवृत्ति को रोका नहीं गया, तो यह प्रतिनिधि लोकतंत्र की विश्वसनीयता, समावेशिता और स्थायित्व को गंभीर रूप से क्षति पहुँचा सकती है।