भारत, AI और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था: UN महासचिव एंतोनियो गुटेरेस

1. संदर्भ और पृष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres ने भारत को एक “बहुत सफल उभरती हुई अर्थव्यवस्था” बताते हुए कहा कि भारत की वैश्विक मामलों में भूमिका निरंतर बढ़ रही है।

  • उन्होंने यह टिप्पणी Press Trust of India को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में दिए गए विशेष साक्षात्कार में की।

  • यह साक्षात्कार India–AI Impact Summit 2026 से पूर्व लिया गया, जो 16–20 फरवरी 2026 तक आयोजित हो रहा है।

2. AI Impact Summit और भारत की भूमिका

  • यह ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला वैश्विक AI शिखर सम्मेलन है।

  • सम्मेलन तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है:

    • People (मानव-केंद्रित विकास)

    • Planet (पर्यावरणीय स्थिरता)

    • Progress (समावेशी प्रगति)

  • गुटेरेस के अनुसार भारत इस सम्मेलन की मेजबानी के लिए “सही स्थान” है क्योंकि:

    • भारत तकनीकी क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों का संयोजन प्रस्तुत करता है।

    • भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकता है।

3. AI को लेकर वैश्विक दृष्टिकोण

  • गुटेरेस ने स्पष्ट रूप से कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI):

    • केवल विकसित देशों या दो महाशक्तियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

    • संपूर्ण मानवता के लाभ का सार्वभौमिक साधन बननी चाहिए।

  • उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से United States और China के वर्चस्व पर चिंता व्यक्त की।

  • AI का एकाधिकार वैश्विक असमानता को और गहरा कर सकता है — यह उनके वक्तव्य का केंद्रीय संदेश है।

4. Global South और समावेशी AI

  • गुटेरेस ने ज़ोर देकर कहा कि Global South के देशों को AI के लाभों में पूर्ण भागीदारी मिलनी चाहिए।

  • AI को रोजगार, शासन, मानवाधिकार और विकास के अवसरों से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

  • यह दृष्टिकोण SDGs और “Technology for Development” की अवधारणा से जुड़ा हुआ है।

5. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World)

  • गुटेरेस ने स्वयं को “मजबूत बहुध्रुवीयता का समर्थक” बताया।

  • उन्होंने दो व्यवस्थाओं को अस्वीकार्य बताया:

    • एकध्रुवीय विश्व (एक शक्ति का वर्चस्व)

    • द्विध्रुवीय विश्व (दो महाशक्तियों में बंटा हुआ विश्व)

  • उनके अनुसार सच्ची बहुध्रुवीयता तभी संभव है जब उभरती अर्थव्यवस्थाएं निर्णायक भूमिका निभाएं।

6. भारत और बहुध्रुवीयता

  • गुटेरेस ने कहा कि भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्र में है।

  • भारत की भूमिका:

    • वैश्विक व्यापार नेटवर्क को मज़बूत करना

    • तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना

    • अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को अधिक प्रभावी बनाना

  • उन्होंने भारत–यूरोपीय संघ व्यापार समझौते को बहुध्रुवीय सहयोग का अच्छा उदाहरण बताया।

7. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार

  • गुटेरेस ने UN Security Council की निष्क्रियता पर निराशा व्यक्त की।

  • उन्होंने कहा कि:

    • सुरक्षा परिषद आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

    • इसकी संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर आधारित है।

  • उन्होंने सुरक्षा परिषद में “मौलिक सुधार” की आवश्यकता पर बल दिया।

8. भारत और UN नेतृत्व संवाद

  • गुटेरेस ने पहले Narendra Modi से G20 शिखर सम्मेलन के दौरान तथा
    S. Jaishankar से न्यूयॉर्क में मुलाकात की थी।

  • उन्होंने कहा कि वे भारत की नेतृत्व क्षमता और बहुध्रुवीय विश्व में उसकी भूमिका पर चर्चा को लेकर आशावान हैं।

9. वैश्विक नेतृत्व और सहभागिता

  • सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख वैश्विक नेता:

    • Emmanuel Macron

    • Luiz Inacio Lula da Silva

  • प्रमुख तकनीकी नेतृत्व:

    • Sundar Pichai

    • Shantanu Narayen

    • Dario Amodei

10. भारत की सभ्यता और ऐतिहासिक प्रभाव

  • गुटेरेस ने भारत को एक:

    • विविधतापूर्ण लोकतंत्र

    • प्राचीन और सतत सभ्यता

  • उन्होंने भारत के ऐतिहासिक सांस्कृतिक प्रभाव को चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, हिंद महासागर क्षेत्र और रोमन साम्राज्य तक विस्तारित बताया।