भारत सरकार ने उच्च एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के नए मानकों E22, E25, E27 और E30 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। ये मानक भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कोड IS 19850:2026 के अंतर्गत जारी किए गए हैं।
यह कदम देशभर में E20 पेट्रोल के सफल कार्यान्वयन के बाद भारत के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blending Programme – EBP) के अगले चरण को दर्शाता है।
इस पहल का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
E30 पेट्रोल क्या है?
E30 पेट्रोल ऐसा ईंधन मिश्रण है जिसमें—
- 30% एथेनॉल
- 70% पेट्रोल
शामिल होता है।
एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जो मुख्य रूप से निम्न स्रोतों से तैयार किया जाता है—
- गन्ना
- मक्का
- खराब खाद्यान्न
- कृषि जैव-अपशिष्ट (Biomass)
इसी प्रकार—
- E20 में 20% एथेनॉल
- E25 में 25% एथेनॉल
- E27 में 27% एथेनॉल
मिलाया जाता है।
सरकार पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए एथेनॉल मिश्रण को चरणबद्ध तरीके से बढ़ा रही है।
उच्च एथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य
उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन लागू करने का मुख्य उद्देश्य भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करना है।
भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।
उच्च एथेनॉल मिश्रण से निम्न लाभ होने की उम्मीद है—
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
- वायु गुणवत्ता में सुधार
- किसानों की आय में वृद्धि
- कृषि उत्पादों की मांग बढ़ना
- घरेलू जैव ईंधन उद्योग को मजबूती
वाहन संगतता एवं चुनौतियाँ
E30 ईंधन के उपयोग को लेकर वाहन संगतता संबंधी कुछ चिंताएँ भी सामने आई हैं।
वर्ष 2023 के बाद निर्मित अधिकांश वाहन E20 ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किए गए हैं, लेकिन पुराने वाहनों में निम्न समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं—
- इंजन में जंग लगना
- माइलेज में कमी
- फ्यूल सिस्टम के पुर्जों को नुकसान
चूंकि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है, इसलिए ईंधन दक्षता में कुछ कमी आ सकती है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विकास को बढ़ावा दे रही है, जो विभिन्न एथेनॉल मिश्रणों पर प्रभावी ढंग से चल सकें।
पर्यावरणीय एवं आर्थिक लाभ
उच्च एथेनॉल मिश्रण से कई पर्यावरणीय एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे—
- कार्बन उत्सर्जन में कमी
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होना
- स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
- ग्रामीण विकास को प्रोत्साहन
- एथेनॉल उत्पादन हेतु कृषि फसलों की मांग में वृद्धि
- कच्चे तेल के आयात बिल में कमी
- दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती
भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम
भारत ने वर्ष 2003 में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (EBP) की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना था।
वर्ष 2021 में सरकार ने E20 रोडमैप की घोषणा की और वर्ष 2025 तक E20 ईंधन को देशभर में लागू कर दिया गया।
अब वर्ष 2026 में E22 से E30 तक के मानकों की अधिसूचना के साथ भारत उन्नत जैव ईंधन पारिस्थितिकी तंत्र एवं स्वच्छ परिवहन क्षेत्र की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- अधिसूचित नए ईंधन मानक — E22, E25, E27 एवं E30
- मानक जारी करने वाली संस्था — भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)
- मानक कोड — IS 19850:2026
- संबंधित मंत्रालय — पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
- मुख्य उद्देश्य — कच्चे तेल के आयात में कमी एवं स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा
- एथेनॉल के प्रमुख स्रोत — गन्ना, मक्का, खाद्यान्न एवं बायोमास
-
वर्तमान राष्ट्रीय ईंधन मिश्रण — E20 पेट्रोल