भारत–यूनाइटेड किंगडम मुक्त व्यापार समझौता (CETA)

1. पृष्ठभूमि

  • भारत और United Kingdom के बीच Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर किए गए।
  • यह समझौता अब अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है।
  • यह भारत की नई पीढ़ी की मुक्त व्यापार नीति (New-age FTAs) का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

2. समझौते के लागू होने की प्रक्रिया

  • भारत में ऐसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलती है।
  • यूनाइटेड किंगडम में इसे संसद की स्वीकृति आवश्यक है:
    • House of Commons
    • House of Lords
  • ब्रिटिश संसद में बहस, समितियों की समीक्षा और अंतिम अनुमोदन के बाद इसे दोनों देशों की सहमति से लागू किया जाएगा।

3. CETA के प्रमुख प्रावधान

(क) भारतीय निर्यात को लाभ

  • भारत के 99% निर्यात ब्रिटिश बाजार में शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) पर प्रवेश करेंगे।
  • प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र:
    • वस्त्र (Textiles)
    • जूते-चप्पल (Footwear)
    • रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery)
    • खेल सामग्री (Sports Goods)
    • खिलौने (Toys)

(ख) ब्रिटिश निर्यात को रियायत

  • स्कॉच व्हिस्की पर भारत में शुल्क:
    • 150% से घटाकर तुरंत 75%
    • वर्ष 2035 तक चरणबद्ध रूप से 40%
  • ऑटोमोबाइल आयात शुल्क:
    • वर्तमान 110% तक से घटाकर 5 वर्षों में 10%
    • यह कटौती कोटा-आधारित और क्रमिक होगी।

4. भारतीय बाजार का सीमित लेकिन रणनीतिक खुलापन

  • भारत ने उपभोक्ता वस्तुओं के कुछ क्षेत्रों में बाजार खोला है, जैसे:
    • चॉकलेट
    • बिस्किट
    • कॉस्मेटिक्स
  • यह खुलापन नियंत्रित है और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है।

5. ऑटोमोबाइल और EV क्षेत्र में विशेष प्रावधान

  • भारत द्वारा आयात शुल्क घटाने के बदले:
    • भारतीय निर्माताओं को यू.के. में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के निर्यात की अनुमति।
  • यह भारत के लिए निम्न दृष्टियों से महत्वपूर्ण है:
    • मेक इन इंडिया
    • हरित ऊर्जा संक्रमण
    • वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एकीकरण

6. डबल कंट्रीब्यूशन्स कन्वेंशन (DCC)

  • CETA के साथ Double Contributions Convention (DCC) भी हस्ताक्षरित।
  • उद्देश्य:
    • अस्थायी रूप से काम करने वाले श्रमिकों को दो देशों में सामाजिक सुरक्षा कर (Social Levies) दोबारा न देना पड़े।
  • यह भारतीय पेशेवरों, IT कर्मियों और कुशल श्रमिकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी।

7. रणनीतिक और भू-आर्थिक महत्व

  • भारत और यू.के. दुनिया की पाँचवीं और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ हैं।
  • वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार: लगभग 56 अरब डॉलर।
  • लक्ष्य: वर्ष 2030 तक व्यापार को दोगुना करना।
  • यह समझौता भारत की “Trade Plus Strategy” को दर्शाता है, जिसमें केवल शुल्क नहीं बल्कि बाजार पहुंच, सेवाएं और श्रम गतिशीलता शामिल है।

8. राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि

  • ब्रिटिश सरकार (लेबर पार्टी) ने CETA को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
  • यह समझौता भारत की बढ़ती वैश्विक सौदेबाजी शक्ति और आर्थिक आत्मविश्वास को दर्शाता है।